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नई तकनीक ने खत्म की दूरियां : राघवेंद्र तंवर
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 31 Mar 2014 12:44 AM IST
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कुरुक्षेत्र। केयू के डीन एकेडमिक अफेयर प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर ने कहा है नई तकनीक ने दूरियों को खत्म कर दिया है। एक छोटे गांव व कस्बे की खबर लोकल नहीं रही बल्कि उसे सिडनी व अमेरिका में भी पढ़ा जाने लगा है। यह सब नई तकनीक से संभव हुआ है। वे रविवार को जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से मीडिया साक्षरता-‘मुद्दे व चुनौतियां’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मीडिया साक्षरता जैसे विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित कर जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक नई पहल की है।
समापन सत्र के मुख्य वक्ता रहे बीबीसी हिंदी के संपादक नीधीश त्यागी ने कहा कि इस समय में मीडिया साक्षरता पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित करवाना बहुत ही उपयोगी है। चूंकि इस दौरान मीडिया में विषयवस्तु को अधिक से अधिक नाटकीय व उत्तेजक बनाया जा रहा है। वहीं अमर उजाला के डिजिटल एंड कन्वरजेंस एडिटर विनोद वर्मा ने कहा कि मीडिया साक्षरता पर विमर्श करने से पहले हमें मीडिया और साक्षरता पर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 30 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं, जबकि मात्र 8 प्रतिशत लोग ही अंग्रेजी बोलते हैं। ऐसे में पहले पूर्णतया शिक्षित होना आवश्यक है। वर्मा ने कहा कि विकासात्मक पत्रकारिता अखबार के पन्नों में हाशिए पर है। संस्थान के निदेशक प्रो एसएस बूरा ने समापन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर इस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था, उसमें यह कांफ्रेंस सफल रही है। इसके लिए उन्होंने सभी का धन्यवाद किया।
कांफ्रेस की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कांफ्रेंस की कन्वीनर डॉ. बिंदु शर्मा ने कहा कि इस कांफ्रेंस के दस तकनीकी सत्रों में 250 से अधिक मीडिया शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। कार्यशाला के समापन पर धन्यवाद करते हुए कांफ्रेंस के सह संयोजक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि बहुत कम अवधि में एक सफल कांफ्रेंस के आयोजन में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व देश भर के शिक्षाविदों, विदेश से आए पत्रकार साथियों व विश्वविद्यालय प्रशासन का भरपूर सहयोग रहा है। इस मौके पर प्रोफेसर एचपीएस वालिया, प्रोफेसर गुरमीत मान, प्रोफेसर हरीश कुमार, प्रोफेसर रजनीश शर्मा, प्रोफेसर मनोज जोशी, डा. संजीव शर्मा, प्रोफेसर सुभाष, प्रोफेसर रामविरंजन, डा. विक्रम कौशिक, डॉ मधु दीप सिंह, आबिद अली अंसारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
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इन विषयों पर हुई विशेष चर्चा
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जब समाचार उपभोक्ता खुद समाचार बन जाए, हरियाणा में मीडिया शिक्षा की वर्तमान स्थिति, विजुअल मीडिया साक्षरता व समझ, सोशल मीडिया एवं उसकी चुनौतियां, इनफोरमेशन लिट्रेसी, भाषा व तकनीक भविष्य के मीडिया कर्मियों के आगे बड़ी चुनौतियां, चुनाव सर्वेक्षण, मीडिया का प्रोपगेंडा मॉडल, मीडिया स्वामित्व सहित उन सभी मुद्दों पर चर्चा हुई, जो पाठक, श्रोता, दर्शक, तकनीक, संदेश को प्रभावित करते हैं।
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समापन सत्र के मुख्य वक्ता रहे बीबीसी हिंदी के संपादक नीधीश त्यागी ने कहा कि इस समय में मीडिया साक्षरता पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित करवाना बहुत ही उपयोगी है। चूंकि इस दौरान मीडिया में विषयवस्तु को अधिक से अधिक नाटकीय व उत्तेजक बनाया जा रहा है। वहीं अमर उजाला के डिजिटल एंड कन्वरजेंस एडिटर विनोद वर्मा ने कहा कि मीडिया साक्षरता पर विमर्श करने से पहले हमें मीडिया और साक्षरता पर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 30 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं, जबकि मात्र 8 प्रतिशत लोग ही अंग्रेजी बोलते हैं। ऐसे में पहले पूर्णतया शिक्षित होना आवश्यक है। वर्मा ने कहा कि विकासात्मक पत्रकारिता अखबार के पन्नों में हाशिए पर है। संस्थान के निदेशक प्रो एसएस बूरा ने समापन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर इस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था, उसमें यह कांफ्रेंस सफल रही है। इसके लिए उन्होंने सभी का धन्यवाद किया।
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कांफ्रेस की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कांफ्रेंस की कन्वीनर डॉ. बिंदु शर्मा ने कहा कि इस कांफ्रेंस के दस तकनीकी सत्रों में 250 से अधिक मीडिया शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। कार्यशाला के समापन पर धन्यवाद करते हुए कांफ्रेंस के सह संयोजक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि बहुत कम अवधि में एक सफल कांफ्रेंस के आयोजन में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व देश भर के शिक्षाविदों, विदेश से आए पत्रकार साथियों व विश्वविद्यालय प्रशासन का भरपूर सहयोग रहा है। इस मौके पर प्रोफेसर एचपीएस वालिया, प्रोफेसर गुरमीत मान, प्रोफेसर हरीश कुमार, प्रोफेसर रजनीश शर्मा, प्रोफेसर मनोज जोशी, डा. संजीव शर्मा, प्रोफेसर सुभाष, प्रोफेसर रामविरंजन, डा. विक्रम कौशिक, डॉ मधु दीप सिंह, आबिद अली अंसारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
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जब समाचार उपभोक्ता खुद समाचार बन जाए, हरियाणा में मीडिया शिक्षा की वर्तमान स्थिति, विजुअल मीडिया साक्षरता व समझ, सोशल मीडिया एवं उसकी चुनौतियां, इनफोरमेशन लिट्रेसी, भाषा व तकनीक भविष्य के मीडिया कर्मियों के आगे बड़ी चुनौतियां, चुनाव सर्वेक्षण, मीडिया का प्रोपगेंडा मॉडल, मीडिया स्वामित्व सहित उन सभी मुद्दों पर चर्चा हुई, जो पाठक, श्रोता, दर्शक, तकनीक, संदेश को प्रभावित करते हैं।