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Kurukshetra News: श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का किया वर्णन
Sun, 24 May 2026 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 24 May 2026 02:01 AM IST
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कुरुक्षेत्र।श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते कथा वाचक। स्वयं
- फोटो : Archive
कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट की ओर से वार्ड-20 स्थित गुरुदेव नगर 7-बी में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालु श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हो उठे। कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने भजनों सहित विवाह प्रसंग का वर्णन किया।
कथाव्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह प्रेम, साहस और ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं, जबकि उनके भाई रुक्मी ने राजनीतिक कारणों से उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मिणी के भेजे गए संदेश के बाद भगवान श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और माता कात्यायनी मंदिर से रुक्मिणी को अपने साथ द्वारका ले गए। इसके बाद द्वारका में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ।
कथा से पूर्व मुख्य यजमान एवं ट्रस्ट अध्यक्ष पंडित राजेश मोदगिल परिवार ने भागवत पूजन कर मंचासीन संतों का स्वागत किया। इस दौरान काशी से पधारे सनातन शास्त्र मर्मज्ञ संत गुरुचरण दास महाराज ने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन किया। समाजसेवी अशोक शर्मा पहलवान, स्थाणु सेवा मंडल के प्रधान सतीश शर्मा मौजूद रहे।
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कथाव्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह प्रेम, साहस और ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं, जबकि उनके भाई रुक्मी ने राजनीतिक कारणों से उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मिणी के भेजे गए संदेश के बाद भगवान श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और माता कात्यायनी मंदिर से रुक्मिणी को अपने साथ द्वारका ले गए। इसके बाद द्वारका में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ।
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कथा से पूर्व मुख्य यजमान एवं ट्रस्ट अध्यक्ष पंडित राजेश मोदगिल परिवार ने भागवत पूजन कर मंचासीन संतों का स्वागत किया। इस दौरान काशी से पधारे सनातन शास्त्र मर्मज्ञ संत गुरुचरण दास महाराज ने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन किया। समाजसेवी अशोक शर्मा पहलवान, स्थाणु सेवा मंडल के प्रधान सतीश शर्मा मौजूद रहे।
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