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Kurukshetra News: गांधी शिल्प मेले में मधुबनी पेंटिंग का जादू
Tue, 04 Feb 2025 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 04 Feb 2025 02:12 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कला कीर्ति भवन में लगे गांधी शिल्प बाजार में देशभर के शिल्पकार अपनी अनूठी कला लेकर पहुंचे हैं लेकिन खास आकर्षण का केंद्र बनी हैं सिद्धिका शर्मा की मधुबनी पेंटिंग्स। बिहार की पारंपरिक कला को जीवंत बनाते हुए उन्होंने कपड़े, बेडशीट, बैंगल, दुपट्टे सहित कई वस्तुएं प्रदर्शित की हैं, जो पर्यटकों को बेहद पसंद आ रही हैं।
सिद्धिका शर्मा ने 2024 में ही आफ्ट यूनिवर्सिटी से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स पूरा किया है, अपने काम के जरिए भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण की दिशा में कार्य करने के साथ युवा पीढ़ी को उद्यमिता का संदेश भी दे रही हैं कि नौकरी लेने नहीं खुद का कारोबार कर नौकरी देने वाले बनो।
सिद्धिका का कहना है कि मेरी इस यात्रा में मेरे अभिभावकों और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी प्रेरणा और समर्थन से ही मैं यहां तक पहुंची हूं। प्रत्येक युवा को अपने आस-पास की विलुप्त होती पुरातन संस्कृति और सभ्यता के लिए कार्य करना चाहिए।
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गांधी शिल्प मेले में सिद्धिका की स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और मधुबनी कला से सजी वस्तुओं को खरीद रहे हैं। उनकी बनाई गई कलाकृतियां देश की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाती हैं, जिसकी लोग न केवल सराहना कर रहे हैं, बल्कि अपने घरों का हिस्सा भी बना रहे हैं। सिद्धिका ने बताया कि उनकी स्टॉल पर 250 से लेकर 9000 तक की अलग-अलग वैरायटी की वस्तुएं हैं, जिनमें पेंटिंग, साड़ी, सूट, बैंगल्स और अन्य वस्तुएं शामिल हैं
मधुबनी कला को मिल रही व्यापक पहचान
पारंपरिक कला को आधुनिक स्वरूप देने की इस पहल को हाल ही में उस वक्त और भी प्रोत्साहन मिला जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश किया। इससे न केवल इस कला को व्यापक पहचान मिली, बल्कि शिल्पकारों को भी नया उत्साह मिला।
नौ फरवरी तक चलेगा गांधी शिल्प बाजार
नौ फरवरी तक चलने वाले गांधी शिल्प बाजार में देशभर के 70 से अधिक शिल्पकारों ने अपनी कृतियों की प्रदर्शनी लगाई हैं, जोकि पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है। इसमें राजस्थान की कसीदाकारी, बिहार की मधुबनी पेंटिंग, लखनऊ की चित्रकारी, पंजाब की जुत्ती के साथ-साथ खिलौने, कलकत्ता के फलावर, फिरोजाबाद का ग्लास, सहारनपुर का फर्नीचर, भागलपुर का सिल्क तथा बनारस की साड़ियों की दुकानों पर भीड़ देखने को मिल रही है।
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सिद्धिका शर्मा ने 2024 में ही आफ्ट यूनिवर्सिटी से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स पूरा किया है, अपने काम के जरिए भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण की दिशा में कार्य करने के साथ युवा पीढ़ी को उद्यमिता का संदेश भी दे रही हैं कि नौकरी लेने नहीं खुद का कारोबार कर नौकरी देने वाले बनो।
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सिद्धिका का कहना है कि मेरी इस यात्रा में मेरे अभिभावकों और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी प्रेरणा और समर्थन से ही मैं यहां तक पहुंची हूं। प्रत्येक युवा को अपने आस-पास की विलुप्त होती पुरातन संस्कृति और सभ्यता के लिए कार्य करना चाहिए।
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गांधी शिल्प मेले में सिद्धिका की स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और मधुबनी कला से सजी वस्तुओं को खरीद रहे हैं। उनकी बनाई गई कलाकृतियां देश की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाती हैं, जिसकी लोग न केवल सराहना कर रहे हैं, बल्कि अपने घरों का हिस्सा भी बना रहे हैं। सिद्धिका ने बताया कि उनकी स्टॉल पर 250 से लेकर 9000 तक की अलग-अलग वैरायटी की वस्तुएं हैं, जिनमें पेंटिंग, साड़ी, सूट, बैंगल्स और अन्य वस्तुएं शामिल हैं
मधुबनी कला को मिल रही व्यापक पहचान
पारंपरिक कला को आधुनिक स्वरूप देने की इस पहल को हाल ही में उस वक्त और भी प्रोत्साहन मिला जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश किया। इससे न केवल इस कला को व्यापक पहचान मिली, बल्कि शिल्पकारों को भी नया उत्साह मिला।
नौ फरवरी तक चलेगा गांधी शिल्प बाजार
नौ फरवरी तक चलने वाले गांधी शिल्प बाजार में देशभर के 70 से अधिक शिल्पकारों ने अपनी कृतियों की प्रदर्शनी लगाई हैं, जोकि पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है। इसमें राजस्थान की कसीदाकारी, बिहार की मधुबनी पेंटिंग, लखनऊ की चित्रकारी, पंजाब की जुत्ती के साथ-साथ खिलौने, कलकत्ता के फलावर, फिरोजाबाद का ग्लास, सहारनपुर का फर्नीचर, भागलपुर का सिल्क तथा बनारस की साड़ियों की दुकानों पर भीड़ देखने को मिल रही है।