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कर्मचारियों, चिकित्सकों और लोगों की जान दांव पर
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एलएनजेपी अस्पताल में आने वाले मरीज, यहां तैनात चिकित्सकों व अन्य लोगों की सुरक्षा दांव पर है। न केवल कर्मचारी बल्कि चिकित्सक भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए अस्पताल परिसर में महज 12 सुरक्षाकर्मी ही तैनात है। अस्पताल में मारपीट, चोरी, चिकित्सकों से दुर्व्यवहार व हंगामे के मामले सामने सामान्य हो चुके हैं। गत रविवार रात को ही अस्पताल में हथियारबंद युवकों ने दहशत फैला दी थी। इन युवकों ने अस्पताल के महिला शौचालय में खुद को बंद करने वाले एक युवक पर फायरिंग की थी। गनीमत रही इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, मगर वारदात के बाद अस्पताल की सुरक्षा पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि यह कोई पहली घटना नहीं है। दो-तीन महीने पहले अस्पताल परिसर में एक व्यक्ति ने तेजधार हथियार से महिला पर हमला करके उसे घायल कर दिया था। गत सप्ताह पार्किंग में बाइक खड़ी करने को लेकर एक कर्मी और युवक के बीच हाथापाई हो गई थी। वहीं छह दिन पहले सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने इमरजेंसी के बाहर खूब हंगामा किया था। इन सब घटनाओं के बावजूद अस्पताल प्रबंधन कोई सबक लेने को तैयार नहीं है।
अस्पताल प्रबंधन मात्र सीसीटीवी कैमरों और तैनात सुरक्षा कर्मियों के भरोसे ही सुरक्षा का दावा करता रहा है। अस्पताल में सुरक्षा के लिहाज से 64 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं अस्पताल में 12 सुरक्षाकर्मी तैनात है, मगर तीन पद काफी समय से रिक्त है। यह 12 कर्मी भी शिफ्ट में ही काम करते हैं। लंबा वक्त बीतने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन खाली पड़े पदों को भर नहीं पाया है।
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अस्पताल में हो रही आपराधिक घटनाओं के चलते परिसर में पुलिस चौकी बनाने की मांग काफी पुरानी है। कोरोना काल के दौरान अस्पताल में पुलिस चौकी बनाने की मांग उठाई गई थी, क्योंकि कोरोना की जांच कराने आए लोग हंगामा करते थे। कोरोना काल से पहले अस्पताल प्रबंधन की ओर से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को चौकी बनाने की मांग रखी थी। एलएनजेपी अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से 1500 तक ओपीडी होती हैं। इसके अलावा एमएलआर कटाने और इमरजेंसी में लोग पहुंचते हैं। मरीज, तीमारदार, चिकित्सक सहित अस्पताल में आने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए मात्र 12 सुरक्षाकर्मी के कंधों पर ही है। वहीं अस्पताल के नए और पुराने भवन समेत तीन मेन गेट पर कोई भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है। बेरोकटोक कोई भी परिसर में दाखिल हो जाता है।
सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह का कहना है कि कोरोना काल से पहले अस्पताल की ओर से परिसर में पुलिस चौकी बनाने की मांग तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को भेजी थी। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस अधीक्षक को दोबारा पत्र लिखकर पुलिस चौकी बनाने और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग करेंगे।
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हालांकि यह कोई पहली घटना नहीं है। दो-तीन महीने पहले अस्पताल परिसर में एक व्यक्ति ने तेजधार हथियार से महिला पर हमला करके उसे घायल कर दिया था। गत सप्ताह पार्किंग में बाइक खड़ी करने को लेकर एक कर्मी और युवक के बीच हाथापाई हो गई थी। वहीं छह दिन पहले सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने इमरजेंसी के बाहर खूब हंगामा किया था। इन सब घटनाओं के बावजूद अस्पताल प्रबंधन कोई सबक लेने को तैयार नहीं है।
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अस्पताल प्रबंधन मात्र सीसीटीवी कैमरों और तैनात सुरक्षा कर्मियों के भरोसे ही सुरक्षा का दावा करता रहा है। अस्पताल में सुरक्षा के लिहाज से 64 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं अस्पताल में 12 सुरक्षाकर्मी तैनात है, मगर तीन पद काफी समय से रिक्त है। यह 12 कर्मी भी शिफ्ट में ही काम करते हैं। लंबा वक्त बीतने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन खाली पड़े पदों को भर नहीं पाया है।
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अस्पताल में हो रही आपराधिक घटनाओं के चलते परिसर में पुलिस चौकी बनाने की मांग काफी पुरानी है। कोरोना काल के दौरान अस्पताल में पुलिस चौकी बनाने की मांग उठाई गई थी, क्योंकि कोरोना की जांच कराने आए लोग हंगामा करते थे। कोरोना काल से पहले अस्पताल प्रबंधन की ओर से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को चौकी बनाने की मांग रखी थी। एलएनजेपी अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से 1500 तक ओपीडी होती हैं। इसके अलावा एमएलआर कटाने और इमरजेंसी में लोग पहुंचते हैं। मरीज, तीमारदार, चिकित्सक सहित अस्पताल में आने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए मात्र 12 सुरक्षाकर्मी के कंधों पर ही है। वहीं अस्पताल के नए और पुराने भवन समेत तीन मेन गेट पर कोई भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है। बेरोकटोक कोई भी परिसर में दाखिल हो जाता है।
सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह का कहना है कि कोरोना काल से पहले अस्पताल की ओर से परिसर में पुलिस चौकी बनाने की मांग तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को भेजी थी। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस अधीक्षक को दोबारा पत्र लिखकर पुलिस चौकी बनाने और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग करेंगे।