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मंच पर बेबस औरत की लाचारी से रूबरू कराया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 May 2022 01:33 AM IST
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The helplessness of the helpless woman was introduced on the stage, Kurukshetra
कलाकृति भवन में नाटक लाइसेंस का मंचन करते कलाकार। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित नाट्य मेले में कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में एवीआर ग्रुप ऑफ ड्रामा, गुरुग्राम के कलाकारों ने सादत हसन मंटो की कहानी लाइसेंस का नाट्य मंचन किया। अशोक भाकरी के निर्देशन में तैयार नाटक में कलाकारों ने औरत पर हो रहे अत्याचारों को अपने अभिनय के साथ प्रस्तुत किया।
नाटक में दिखाया गया कि एक नेत्रहीन महिला इनायत से एक तांगेवाला प्यार करने लग जाता है। महिला भी जिंदगी में सहारे की तलाश के कारण तांगे वाले से निकाह कर लेती है। निकाह के बाद तांगेवाला इनायत का इलाज करवाता है और इनायत की आंखों की रोशनी वापस आ जाती है। दोनों की जिंदगी खुशी-खुशी कट रही होती है, लेकिन इनायत के पिता तांगे वाले के खिलाफ उसकी बेटी को अगवा कर निकाह करने के जुर्म में पुलिस में रिपोर्ट लिखवा देते हैं, जिसके कारण पुलिस तांगे वाले को जेल में डाल देती है।
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एक दिन तांगेवाले की जेल में मौत हो जाती है। पति की मौत के बाद इनायत अपना गुजारा करने के लिए तांगा चलाना शुरु कर देती है, लेकिन लोगों को उसका तांगा चलाना रास नहीं आता और आए दिन लोग उस पर तानाकशी करना शुरू कर देते हैं। कुछ आवारा लोग इनायत पर गलत नजर रखते हैं। एक दिन लोग पंचायत बुलाकर इनायत से तांगा चलाने का लाइसेंस पूछते हैं। इनायत पंचायत से ही तांगा चलाने का लाइसेंस दिलवाने की मांग करती है, लेकिन पंचायत में बैठे भ्रष्ट लोग इनायत को कहते हैं कि उसे तांगा चलाने का नहीं, जिस्मफरोशी का लाइसेंस दे सकते हैं।
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लोगों की बात सुनकर इनायत अपने पति की कब्र पर जाकर रोना शुरु कर देती है और अपनी जिंदगी खत्म कर देती है। नाटक में इनायत का किरदार पारुल कौशिक ने निभाया, वहीं उसके पति के किरदार में स्वयं नाटक निर्देशक अशोक भाकरी रहे। अन्य कलाकारों में दिनेश, प्रेम कुमार, अनिल, रिदम, दुर्गा प्रसाद, रजनीश भनोट आदि ने साथ दिया। संचालन विकास शर्मा ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रमेश सुखीजा ने नाटक निर्देशक अशोक भाकरी व हरियाणा कला परिषद की ओर से रजनीश शर्मा ने रमेश सुखीजा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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