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Kurukshetra News: भरत के श्रेष्ठ व्यवहार देख जनसमूह ने लगाए जयकारे
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कुरुक्षेत्र। रामलीला का मंचन करते कलाकार । विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव एसोसिएशन के तत्वावधान में दिल्ली एनसीआर के स्कूलों और गुरुकुल के बच्चों की ओर से गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित दूसरे दिन की रामलीला का अवलोकन करने सैकड़ों लोग पहुंचे। अतिथियों में धर्मवीर डागर (चेयरमैन हरियाणा शुगर मिल बोर्ड), विजयपाल (प्रदेश संयोजक वन नेशन वन इलेक्शन), दिल्ली राज्य शिक्षा विभाग डिप्टी डायरेक्टर अनिल शर्मा, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर शैलेंद्र सारस्वत, आईटीएल प्रशासनिक अधिकारी एम सी शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
दीप प्रज्ज्वलन और गणपति वंदना के बाद अंतरराष्ट्रीय महोत्सव एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश टंडन और संयोजिका डॉ. वंदना टंडन से विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र और रामलला की छवि भेंट कर स्वागत किया।
डॉ. वेद टंडन ने बताया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति को भी बढ़ावा देने वाली इस लीला का उद्देश्य देश के प्रत्येक बच्चे और उसके माता-पिता को यह अहसास करना है कि हम सब प्रभु श्री राम की संतान हैं। आज की भावुक संवादों वाली रामलीला का शुभारंभ अयोध्या में जानकी जी को लौटी बारात के स्वागत से हुआ। अयोध्या में उत्सवी वातावरण में राजा दशरथ जी द्वारा राम जी को अपना युवराज बनाने का निर्णय किया तो अयोध्या वासियों की खुशियां कई गुना बढ़ गई लेकिन विधि की रचना के अनुसार मंथरा ने सभी के मन को थर्रा दिया।
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कैकई मंथरा संवाद के बाद कैकेयी की ओर से राजा दशरथ से दो वर मांगने में भरत को राजतिलक और राम जी को 14 वर्ष वनवास का समाचार पाकर प्रजा के विलाप के बीच राजसी वस्त्रों का त्याग राम, लक्ष्मण सीता सहित वन गमन कर गए तो दशरथ जी ने संसार त्यागने के बाद चित्रकूट में भरत की ओर से रामजी से भेंट के बाद उनके प्रतिनिधि के रूप में चरण पादुका लेकर लौटने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। आज की लीला ने सीता हरण के बाद जटायु की मुक्ति के मंचन से विराम लिया।
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दीप प्रज्ज्वलन और गणपति वंदना के बाद अंतरराष्ट्रीय महोत्सव एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश टंडन और संयोजिका डॉ. वंदना टंडन से विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र और रामलला की छवि भेंट कर स्वागत किया।
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डॉ. वेद टंडन ने बताया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति को भी बढ़ावा देने वाली इस लीला का उद्देश्य देश के प्रत्येक बच्चे और उसके माता-पिता को यह अहसास करना है कि हम सब प्रभु श्री राम की संतान हैं। आज की भावुक संवादों वाली रामलीला का शुभारंभ अयोध्या में जानकी जी को लौटी बारात के स्वागत से हुआ। अयोध्या में उत्सवी वातावरण में राजा दशरथ जी द्वारा राम जी को अपना युवराज बनाने का निर्णय किया तो अयोध्या वासियों की खुशियां कई गुना बढ़ गई लेकिन विधि की रचना के अनुसार मंथरा ने सभी के मन को थर्रा दिया।
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कैकई मंथरा संवाद के बाद कैकेयी की ओर से राजा दशरथ से दो वर मांगने में भरत को राजतिलक और राम जी को 14 वर्ष वनवास का समाचार पाकर प्रजा के विलाप के बीच राजसी वस्त्रों का त्याग राम, लक्ष्मण सीता सहित वन गमन कर गए तो दशरथ जी ने संसार त्यागने के बाद चित्रकूट में भरत की ओर से रामजी से भेंट के बाद उनके प्रतिनिधि के रूप में चरण पादुका लेकर लौटने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। आज की लीला ने सीता हरण के बाद जटायु की मुक्ति के मंचन से विराम लिया।

कुरुक्षेत्र। रामलीला का मंचन करते कलाकार । विज्ञप्ति