{"_id":"5766fc2e4f1c1bd76711b912","slug":"the-audience-was-mesmerized-by-the-bdrwa-burson-kurukshetra","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदरवा बरसन को आए से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदरवा बरसन को आए से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Mon, 20 Jun 2016 01:40 AM IST
विज्ञापन
श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते कलाकार।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑर्गेनाइजेशन फॉर सोशल एंड कल्चरल अवेयरनेस (ओस्का) द्वारा शांति नगर के श्री साधुराम आश्रम में शास्त्रीय गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ओस्का के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल पूनिया, उपाध्यक्ष डॉ. पुरूषोतम, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ललित कुमार कौशल, कार्यक्रम संयोजक मनप्रीत तथा संयोजक समिति के सदस्य डॉ. अशोक यमन तथा प्रोफेसर सौभाग्यवर्धन ने मां सरस्वती के पूजन से किया।
विज्ञापन
इस दौरान प्रो. सौभाग्यवर्धन बृहस्पति ने बारिश के रागों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का आगाज बारिश की रिमझिम बूंदों से हुआ, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हो गया। माहौल देखकर सौभाग्यवर्धन ने मल्हार के प्रकारों को चुना और शुरुआत राग मेघ मल्हार में 'बदरवा बरसन को आए' से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध बंदिश से की। इसी कड़ी में उन्होंने मियां मल्हार, केदार मल्हार, रामदासिया मल्हार राग प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
अंत में दो भजनों से कार्यक्रम की समाप्ति की। कार्यक्रम में उस्ताद महमूद खां ने तबले पर और राजेश कुमार ने सारंगी तथा घनश्याम ने तानपूरे पर संगत दी। संगीमय कार्यक्रम के दौरान श्रोता आनंदित हो झूम उठे। संयोजक समिति के सदस्य डॉ. अशोक यमन एवं सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ललित कौशल ने बताया कि ओस्का द्वारा विद्यालयों में शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि बच्चों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराया जा सके। मंच संचालन डा. पुरुषोत्तम कुमार ने किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम समापन पर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मनप्रीत सिंह, अनीता चंद्रा, रेणुका, किरण सैनी, ललन कुमार, केशव तथा शिव कुमार, साधुराम आश्रम के तारागिरि महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।