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Kurukshetra News: दोष सिद्धि रद्द कर आरोपी को किया बरी
Sun, 29 Mar 2026 03:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 29 Mar 2026 03:05 AM IST
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कुरुक्षेत्र। चेक बाउंस के एक मामले में जिला अदालत ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के बाद दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
जानकारी के अनुसार चावला लॉक कंपनी व उसके संचालक वेद प्रकाश चावला के खिलाफ सब्जी मंडी रेलवे रोड निवासी अनिल कुमार ने धारा 138 के तहत याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सबूतों के आधार पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ट्रायल कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया और 29 मार्च 2025 को तीन महीने की सश्रम कारावास और 1,56,174 रुपये मुआवजे देने की सजा दी थी। इसके बाद दोषी ने सत्र अदालत में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया। जिला सत्र जज दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने समझौता में आरोपी द्वारा पूरी राशि शिकायतकर्ता को चुका देने के बाद समझौता करने की मंजूरी दे दी।
इसके बाद दोनों पक्षों ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से बयान दिए कि मामला सुलझ गया है और आरोपी ने शिकायतकर्ता को पूरा पैसा लौटा दिया है। शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है अगर आरोपी को बरी कर दिया जाए। अदालत ने धारा 147 एनआई एक्ट के तहत अपराध को कंपाउंड करने की अनुमति दे दी और ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द कर दिए गए। संवाद
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जानकारी के अनुसार चावला लॉक कंपनी व उसके संचालक वेद प्रकाश चावला के खिलाफ सब्जी मंडी रेलवे रोड निवासी अनिल कुमार ने धारा 138 के तहत याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सबूतों के आधार पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ट्रायल कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया और 29 मार्च 2025 को तीन महीने की सश्रम कारावास और 1,56,174 रुपये मुआवजे देने की सजा दी थी। इसके बाद दोषी ने सत्र अदालत में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया। जिला सत्र जज दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने समझौता में आरोपी द्वारा पूरी राशि शिकायतकर्ता को चुका देने के बाद समझौता करने की मंजूरी दे दी।
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इसके बाद दोनों पक्षों ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से बयान दिए कि मामला सुलझ गया है और आरोपी ने शिकायतकर्ता को पूरा पैसा लौटा दिया है। शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है अगर आरोपी को बरी कर दिया जाए। अदालत ने धारा 147 एनआई एक्ट के तहत अपराध को कंपाउंड करने की अनुमति दे दी और ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द कर दिए गए। संवाद
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