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बंदरों का आतंक, मासूम को काटा
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धर्मनगरी के तीर्थस्थलों के अलावा शहर के सेक्टरों में भी बंदरों, आवारा कुत्तों और बेसहारा गौवंश का आतंक है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बंदर बच्चों से लेकर बड़े लोगों पर भी हमला कर रहे हैं, जिससे हर समय बड़ी घटना की आशंका बनी रहती है।
तीन दिन पहले ही बंदरों ने सेक्टर सात में छह साल के एक मासूम को जख्मी कर दिया। परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया है। ऐसे में अन्य लोगों में भी भय बना हुआ है। लोगों की मानें तो हर ओर बंदरों, कुत्तों व बेसहारा गोवंश के झुंड खड़े रहते हैं, जिनके पास से गुजरना भी खतरे से खाली नहीं होता। बंदर तो घरों में घुसने लगे हैं, जिसके चलते महिलाओं व बच्चों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो चुका है।
गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में भी बंदरों का आतंक बरकरार है। हालात ये हैं कि 250 करोड़ रुपये के बजट से ज्योतिसर तीर्थ पर्यटन का केंद्र बनने जा रहा है। तीर्थ पर पिछले आठ साल से बंदरों का आतंक है। पर्यटक और श्रद्धालु डर के साए में ज्योतिसर में पूजा करने को मजबूर हैं। न जाने कब और कहां से बंदरों का झुंड हमलाकर उनको जख्मी कर दी।
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बंदरों को डराने के लिए पुजारी और स्थानीय दुकानदार लठ, गुलेल और एयरगन का इस्तेमाल करते हैं। अब इनसे भी बंदरों को कोई डर नहीं रहा। उधर नगर परिषद व केडीबी लोगों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। अधिकारी जल्द समस्या का समाधान कराने का भरोसा देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इस संबंध में चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर रूप रविंद्र बिश्नोई का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी। किसी को परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जाएगा।
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तीन दिन पहले ही बंदरों ने सेक्टर सात में छह साल के एक मासूम को जख्मी कर दिया। परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया है। ऐसे में अन्य लोगों में भी भय बना हुआ है। लोगों की मानें तो हर ओर बंदरों, कुत्तों व बेसहारा गोवंश के झुंड खड़े रहते हैं, जिनके पास से गुजरना भी खतरे से खाली नहीं होता। बंदर तो घरों में घुसने लगे हैं, जिसके चलते महिलाओं व बच्चों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो चुका है।
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गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में भी बंदरों का आतंक बरकरार है। हालात ये हैं कि 250 करोड़ रुपये के बजट से ज्योतिसर तीर्थ पर्यटन का केंद्र बनने जा रहा है। तीर्थ पर पिछले आठ साल से बंदरों का आतंक है। पर्यटक और श्रद्धालु डर के साए में ज्योतिसर में पूजा करने को मजबूर हैं। न जाने कब और कहां से बंदरों का झुंड हमलाकर उनको जख्मी कर दी।
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बंदरों को डराने के लिए पुजारी और स्थानीय दुकानदार लठ, गुलेल और एयरगन का इस्तेमाल करते हैं। अब इनसे भी बंदरों को कोई डर नहीं रहा। उधर नगर परिषद व केडीबी लोगों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। अधिकारी जल्द समस्या का समाधान कराने का भरोसा देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इस संबंध में चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर रूप रविंद्र बिश्नोई का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी। किसी को परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जाएगा।