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Kurukshetra News: सुरा में दूसरे दिन भी स्वास्थ्य व जन स्वास्थ्य विभाग की टीमें डटी रहीं
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लाडवा। गांव सुरा में छह लोगों की एक माह के दौरान मौत व उल्टी एवं दस्त से पीड़ित 35 से ज्यादा ग्रामीणों के चलते स्वास्थ्य व जनस्वास्थ्य विभाग की टीमें दूसरे दिन बुधवार को भी गांव में डटी रही। जहां पानी के सैंपल लिए तो वहीं लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए अस्थायी ओपीडी भी शुरू की।
पिछले कई दिनों से ग्रामीणों को उल्टी व दस्त लगने की शिकायत से दहशत का माहौल बना है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले एक महीने में अज्ञात कारणों से 6-7 लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं 35 से 40 मरीज सरकारी व निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे। मंगलवार को जैसे ही सरकारी विभाग को इसकी सूचना मिली थी स्वास्थ्य व जन स्वास्थ्य विभाग के हाथ पैर फुल गए थे।
आनन फानन में सिविल सर्जन डॉ सुखबीर सिंह, सीएमओ डॉ कृष्णकांत, जन स्वास्थ्य विभाग से एक्शन सुमित गर्ग, एसडीओ विनोद कुमार अपनी टीमों सहित सुरा गांव में मौके पर पहुंच कर जांच शुरू करवाई थी।
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बुधवार को भी स्वास्थ्य व जन स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर दिखाई दी। गांव में ही डाक्टरों की टीमें अस्थाई ओपीडी बनाकर मरीजों की जांच कर इलाज करती रही ।
सरकारी विभाग द्वारा शुरुआती लक्षणों में बीमारी का कारण दूषित पानी माना जा रहा था। उसी को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अवैध कनेक्शन और टंकियां व होदियों से वापस जा रही पेयजल की सप्लाई को काटा। वहीं विभाग द्वारा पेयजल में प्रयोग लोहे के सभी पाइपों को हटाया जा रहा है।
गांव के सरपंच नितिन पुनियां ने बताया कि गांव में पेयजल के लिए डाली गई लोहे की पाइपलाइन बहुत पुरानी हो गई है जिस कारण उसमें कई जगह लीकेज का खतरा बना हुआ है। उन्होंने जन स्वास्थ्य विभाग से मांग करते हुए कहा कि पुरानी पेयजल की पाइप की जगह नई पाइपलाइन की विभाग द्वारा व्यवस्था की जाए।
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पिछले कई दिनों से ग्रामीणों को उल्टी व दस्त लगने की शिकायत से दहशत का माहौल बना है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले एक महीने में अज्ञात कारणों से 6-7 लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं 35 से 40 मरीज सरकारी व निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे। मंगलवार को जैसे ही सरकारी विभाग को इसकी सूचना मिली थी स्वास्थ्य व जन स्वास्थ्य विभाग के हाथ पैर फुल गए थे।
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आनन फानन में सिविल सर्जन डॉ सुखबीर सिंह, सीएमओ डॉ कृष्णकांत, जन स्वास्थ्य विभाग से एक्शन सुमित गर्ग, एसडीओ विनोद कुमार अपनी टीमों सहित सुरा गांव में मौके पर पहुंच कर जांच शुरू करवाई थी।
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बुधवार को भी स्वास्थ्य व जन स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर दिखाई दी। गांव में ही डाक्टरों की टीमें अस्थाई ओपीडी बनाकर मरीजों की जांच कर इलाज करती रही ।
सरकारी विभाग द्वारा शुरुआती लक्षणों में बीमारी का कारण दूषित पानी माना जा रहा था। उसी को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अवैध कनेक्शन और टंकियां व होदियों से वापस जा रही पेयजल की सप्लाई को काटा। वहीं विभाग द्वारा पेयजल में प्रयोग लोहे के सभी पाइपों को हटाया जा रहा है।
गांव के सरपंच नितिन पुनियां ने बताया कि गांव में पेयजल के लिए डाली गई लोहे की पाइपलाइन बहुत पुरानी हो गई है जिस कारण उसमें कई जगह लीकेज का खतरा बना हुआ है। उन्होंने जन स्वास्थ्य विभाग से मांग करते हुए कहा कि पुरानी पेयजल की पाइप की जगह नई पाइपलाइन की विभाग द्वारा व्यवस्था की जाए।