सर्वे के नाम अवैध वसूली वसूली, शिकायत की तो वापस
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंद लोगों से सर्वे के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। इसके तहत सर्वे के नाम पर फार्म भरने के लिए अवैध रूप से 1000 से 1500 रुपये की वसूली की जा रही है। आरोप है कि सर्वे के दौरान रविदास नगर वार्ड नंबर-2 में फार्म भरने से पहले दो लोगों ने 1000-1000 रुपये की वसूली की। इसके बाद बताया गया है कि डीसी दफ्तर में शिकायत करने के साथ ही जिन जरूरतमंद लोगों से पैसों की वसूली की गई थी, उनके पैसे वापस कर दिए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि अवैध रूप से वसूली गई राशि किस शर्त पर वापस हुई और पैसा वापस लेने के बाद उक्त जरूरतमंद लोग अचानक चुप्पी क्यों साध गए, इस बात का खुलासा जांच के बाद ही हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि अमर उजाला को प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर जरूरतमंद लोगों से वसूली जानकारी मिली थी। पड़ताल करने पर पता चला है कि वार्ड नंबर दो रविदास नगर वासी मुकेश कुमार ने 25 अप्रैल 2017 को उक्त संदर्भ में डीसी के नाम एक शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट लिखा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्मों की कार्रवाई में 1000 हजार रुपये प्रति व्यक्ति अवैध रूप से मांगे जा रहे हैं। कई लोग यह राशि दे चुके हैं। इसलिए इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यहां बता दें कि 25 अप्रैल 2017 को डीसी कार्यालय में मुकेश के अलावा रविंद्र कटारिया, किश्नी देवी, प्रवीण कुमार, संतरी देवी, गीता रानी, सिंद्रो देवी, कश्मीरी लाल, राजेश कुमार, विजय और अन्य तीन लोगों ने शिकायत दी थी।
एक हजार दो, वरना नहीं भरा जाएगा फार्म
रविदास नगर वार्ड नंबर-2 वासी मुकेश कुमार का कहना है कि उसने एक माह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना में अपने वार्ड पार्षद गीता रानी और उनके पति बलबीर सिंह के माध्यम से फार्म भरा था। मुकेश ने बताया कि गत 22 और 23 अप्रैल को उनके वार्ड में भी सर्वे हुआ था। इस दौरान उसके घर का सर्वे दो कर्मचारियों ने किया। इन्होंने उसके बैंक की कॉपी और फोटो लेने के बाद एक हजार रुपये की मांग की थी। मुकेश का कहना है कि उसने सर्वे पर आए इन कर्मचारियों से 1000 रुपये की रसीद मांगी थी, लेकिन इन्होंने रसीद देने से साफ इनकार कर दिया। साथ ही सर्वे करने आए उक्त दोनों लोगों ने उसे आगाह किया कि 1000 रुपये के बिना फार्म भरने की कार्रवाई नहीं होगी। मुकेश ने कहा कि उसने वार्ड की पार्षद गीता रानी और उनके पति बलबीर सिंह को फोन किया था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद परेशान होकर नगर पार्षद के पास गए और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता।
पार्षद ने भी की जांच की मांग
जब इस संबंध में पार्षद गीता रानी और उनके पति बलबीर सिंह से बात की गई तो कहा कि वे किसी से पैसे नहीं लेते। यदि सर्वे के दौरान कोई पैसा मांग रहा है तो उसे ना दो। वार्ड के लोगों से हो रही इस अवैध वसूली के खिलाफ क्या पार्षद की ओर से जांच की मांग की जाएगी ? इस सवाल के उत्तर में पार्षद ने कहा कि इस अवैध वसूली की जांच होनी चाहिए, क्योंकि इससे सरकार, विधायक, प्रशासन और उनकी बदनामी हो रही है।
जांच के बाद कोई मामला सामने नहीं आया
सर्वे टीम के स्टेट कोआर्डिनेटर नरेश कुमार ने इस बात की पुष्टि की कि सर्वे के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्म भरने के नाम पर वसूली की शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि इसकी उन्होंने अपने स्तर पर जांच कराई है, लेकिन वसूली का ऐसा कोई मामला नहीं पाया गया। हैरत की बात ये है कि सर्वे टीम के स्टेट कोआर्डिनेटर ने इसकी जांच इतनी जल्दी करा ली और खुद ही क्लीन चिट भी दे दी।
प्रशासन ऐसा नहीं होने देगा, सख्त एक्शन लेंगे : डीसी
डीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि शिकायत की जांच पर जांच कराई जाएगी। प्रशासन ऐसा कतई नहीं होने देगा। यदि इस तरह की अवैध वसूली में कोई भी संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य किसी सरकारी योजना के नाम पर बगैर रसीद के कोई राशि ना दें। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा कर रहा है, वह प्रशासन को इसकी सूचना दे।