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किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन को समन जारी
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गांव की किशोरी से गत वर्ष दुष्कर्म करने के बाद वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेलने वाले तीन आरोपियों को न्यायालय द्वारा समन जारी किए गए हैं। पीड़िता के दूसरी बार न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान दर्ज हुए हैं। जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने तीन मुख्य आरोपियों को आईपीसी की 363, 366, 375 पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं के तहत समन जारी कर न्यायालय में पेश होने को कहा गया है।
मामले को लेकर समाज से जुड़े लोगों द्वारा रविवार को पैराकीट में प्रेसवार्ता हुई, जिसमें पूर्व डीएसपी कर्ताराम व समाजसेवी तरसेम कश्यप ने बताया कि गत वर्ष 30 जनवरी 2020 को गांव की किशोरी के साथ तीन आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म करके उसे जिस्म फरोशी के धंधे में धकेल दिया था। जैसे ही मामला समाज के लोगों और सामाजिक संगठनों के सामने आया तो उन्होंने ने मामले को प्रमुखता से उठाने का काम किया। आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य आरोपियों की राजनीतिक पहुंच व पुलिस से मिलीभगत के चलते पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सका। पुलिस ने मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए उनको बचाने का काम किया। पुलिस के ढुलमुल रवैया के कारण आज भी बेखौफ बाहर घूम रहे हैं। पुलिस से न्याय न मिलने के कारण पीड़ित परिवार को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। पूर्व डीएसपी कर्ताराम ने आरोप लगाते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने किशोरी ने बयानों में अपने साथ हुई व्यथा सुनाई थी, लेकिन तत्कालीन जांच अधिकारी द्वारा इन बयानों को दरकिनार कर मुख्य आरोपियों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जांच अधिकारियों की भी जांच कराने की मांग
इस मामले में अब 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जिनमें से नौ जेल में हैं, जबकि एक को जमानत मिल चुकी है। कर्ताराम व तरसेम कश्यप ने आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत से मामले के मुख्य तीन आरोपी बाहर घूम रहे हैं। उन्होंने मांगी की कि अधिकारियों की भी जांच कराई जाए कि मुख्य आरोपियों को कैसे क्लीन चिट दी गई। जांच को लेकर वे मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेेंगे।
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मामले को लेकर समाज से जुड़े लोगों द्वारा रविवार को पैराकीट में प्रेसवार्ता हुई, जिसमें पूर्व डीएसपी कर्ताराम व समाजसेवी तरसेम कश्यप ने बताया कि गत वर्ष 30 जनवरी 2020 को गांव की किशोरी के साथ तीन आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म करके उसे जिस्म फरोशी के धंधे में धकेल दिया था। जैसे ही मामला समाज के लोगों और सामाजिक संगठनों के सामने आया तो उन्होंने ने मामले को प्रमुखता से उठाने का काम किया। आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य आरोपियों की राजनीतिक पहुंच व पुलिस से मिलीभगत के चलते पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सका। पुलिस ने मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए उनको बचाने का काम किया। पुलिस के ढुलमुल रवैया के कारण आज भी बेखौफ बाहर घूम रहे हैं। पुलिस से न्याय न मिलने के कारण पीड़ित परिवार को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। पूर्व डीएसपी कर्ताराम ने आरोप लगाते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने किशोरी ने बयानों में अपने साथ हुई व्यथा सुनाई थी, लेकिन तत्कालीन जांच अधिकारी द्वारा इन बयानों को दरकिनार कर मुख्य आरोपियों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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जांच अधिकारियों की भी जांच कराने की मांग
इस मामले में अब 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जिनमें से नौ जेल में हैं, जबकि एक को जमानत मिल चुकी है। कर्ताराम व तरसेम कश्यप ने आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत से मामले के मुख्य तीन आरोपी बाहर घूम रहे हैं। उन्होंने मांगी की कि अधिकारियों की भी जांच कराई जाए कि मुख्य आरोपियों को कैसे क्लीन चिट दी गई। जांच को लेकर वे मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेेंगे।
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