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भाषण प्रतियोगिता में सुधा प्रथम
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जयराम कन्या महाविद्यालय लोहार माजरा में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भाषण प्रतियोगिता एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में पीजी डिप्लोमा इन योग की सुधा ने प्रथम स्थान, बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा आरती ने द्वितीय स्थान वा बीए प्रथम वर्ष की छात्रा रितु देवी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
काव्य पाठ प्रतियोगिता में बीए तृतीय वर्ष की अमन ने प्रथम स्थान, बीए प्रथम वर्ष की सपना ने द्वितीय स्थान, पीजी डिप्लोमा इन योगा की छात्रा पूर्णिमा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। मुख्य अतिथि के तौर पर कला भारती से डॉ. अशोक ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो सरल है, मीठी है और इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि यह हमें एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास करती है। हम सब का कर्तव्य बनता है कि अपनी मातृभाषा का सम्मान करें।
प्राचार्य डॉ. सुदेश रावल ने कहा कि जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहते हैं। मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं भाषाई पहचान होती है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में अपनी भाषा, संस्कृति के प्रति लोगों में प्रेम उत्पन्न करना, जागरूकता फैलाना है। उन्होंने आयोजन के लिए संयोजिका डॉ. सुनीता शर्मा एवं हिंदी एसोसिएशन की सराहना की।
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कुरुक्षेत्र। जयराम कन्या महाविद्यालय लोहार माजरा में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भाषण प्रतियोगिता एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में पीजी डिप्लोमा इन योग की सुधा ने प्रथम स्थान, बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा आरती ने द्वितीय स्थान वा बीए प्रथम वर्ष की छात्रा रितु देवी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
काव्य पाठ प्रतियोगिता में बीए तृतीय वर्ष की अमन ने प्रथम स्थान, बीए प्रथम वर्ष की सपना ने द्वितीय स्थान, पीजी डिप्लोमा इन योगा की छात्रा पूर्णिमा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। मुख्य अतिथि के तौर पर कला भारती से डॉ. अशोक ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो सरल है, मीठी है और इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि यह हमें एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास करती है। हम सब का कर्तव्य बनता है कि अपनी मातृभाषा का सम्मान करें।
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प्राचार्य डॉ. सुदेश रावल ने कहा कि जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहते हैं। मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं भाषाई पहचान होती है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में अपनी भाषा, संस्कृति के प्रति लोगों में प्रेम उत्पन्न करना, जागरूकता फैलाना है। उन्होंने आयोजन के लिए संयोजिका डॉ. सुनीता शर्मा एवं हिंदी एसोसिएशन की सराहना की।
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