{"_id":"656908e02e3504ef6c02cb94","slug":"students-from-jharkhand-left-dharmanagari-with-the-message-of-geeta-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-9457-2023-12-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: धर्मनगरी से गीता का संदेश लेकर रवाना हुए झारखंड से आए विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: धर्मनगरी से गीता का संदेश लेकर रवाना हुए झारखंड से आए विद्यार्थी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र। युवा संगम कार्यक्रम के तहत आईआईआईटी रांची, झारखंड से आए 54 विद्यार्थियों और उनके साथ आए पांच शिक्षकों ने धर्मनगरी से गीता ज्ञान लेकर रवाना हो गए। सात दिवसीय कार्यक्रम में युवाओं ने हरियाणा के विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया और हरियाणवी संस्कृति की जानकारी हासिल की। युवा संगम के समापन समारोह का आयोजन जुबली हॉल में किया गया, जिसमें झारखंड से आए शिक्षकों ने अपने यात्रा की समीक्षा सांझा की। नोडल अधिकारी डॉ. सेंथिल ने सात दिनों से चल रहे युवा संगम का विश्लेषण दिया और वहीं छात्र कल्याण संकायध्यक्ष डॉ. दीक्षित गर्ग ने सरकार की योजनाएं युवा कौशल योजना आदि का जिक्र करते हुए देश के सांस्कृतिक विकास पर युवाओं के योगदान का महत्व बताया।
झारखंड से डॉ. कीर्ति ने अलग अलग राज्यों की अपनी संस्कृति के महत्व को बताया एवं सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम के तहत एक दूसरे की संस्कृति को जानने एवं उन्हें सम्मान देने की बात कही। इस दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति के गीतों के साथ दोनों राज्यों के लोक गीत एवं लोक नृत्य की प्रस्तुति दी । झारखंड से डॉ. ऋषिकेश कुमार तिवारी ने गीता के प्रथम एवं अंतिम श्लोक का जिक्र करते हुए युवा को वायु के समान तेज बताया। युवा संगम के अनुभव सांझा करते हुए उन्होंने कहा की झारखंड से आए छात्रों को हरियाणा की संस्कृति के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।
वहीं बुधवार को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल का भ्रमण किया। इसी के साथ कृष्णा संग्रहालय और धरोहर का भी भ्रमण करवाया गया। विद्यार्थियों को शोध कार्यों को करीबी से समझाने के लिए करनाल के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी ले जाया गया और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहां विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त की। शोध को नए सिरे से कैसे करे और शोध के लिए किन पहलुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताया गया। हरियाणा की संस्कृति और समृद्ध परंपरा को दिखाने के लिए विद्यार्थियों को धरोहर संग्रहालय का दौरा कराया गया। कृषि, घरेलू, कला और शिल्प वस्तुओं को देख विद्यार्थी बहुत उत्साहित हुए। इस दौरान छात्रों को पुरातात्विक कलाकृतियों, पांडुलिपियों, दीवार चित्रों, आभूषणों आदि के बारे में भी अवगत कराया गया। शाम के समय ब्रह्मसरोवर तीर्थ का भ्रमण किया और विद्यार्थियों को उसके इतिहास के बारे में अवगत कराया गया और वहीं विद्यार्थियों ने खूब खरीददारी की और ब्रह्मसरोवर पर शाम की संध्या आरती का लुत्फ उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
झारखंड से डॉ. कीर्ति ने अलग अलग राज्यों की अपनी संस्कृति के महत्व को बताया एवं सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम के तहत एक दूसरे की संस्कृति को जानने एवं उन्हें सम्मान देने की बात कही। इस दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति के गीतों के साथ दोनों राज्यों के लोक गीत एवं लोक नृत्य की प्रस्तुति दी । झारखंड से डॉ. ऋषिकेश कुमार तिवारी ने गीता के प्रथम एवं अंतिम श्लोक का जिक्र करते हुए युवा को वायु के समान तेज बताया। युवा संगम के अनुभव सांझा करते हुए उन्होंने कहा की झारखंड से आए छात्रों को हरियाणा की संस्कृति के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।
विज्ञापन
वहीं बुधवार को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल का भ्रमण किया। इसी के साथ कृष्णा संग्रहालय और धरोहर का भी भ्रमण करवाया गया। विद्यार्थियों को शोध कार्यों को करीबी से समझाने के लिए करनाल के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी ले जाया गया और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहां विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त की। शोध को नए सिरे से कैसे करे और शोध के लिए किन पहलुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताया गया। हरियाणा की संस्कृति और समृद्ध परंपरा को दिखाने के लिए विद्यार्थियों को धरोहर संग्रहालय का दौरा कराया गया। कृषि, घरेलू, कला और शिल्प वस्तुओं को देख विद्यार्थी बहुत उत्साहित हुए। इस दौरान छात्रों को पुरातात्विक कलाकृतियों, पांडुलिपियों, दीवार चित्रों, आभूषणों आदि के बारे में भी अवगत कराया गया। शाम के समय ब्रह्मसरोवर तीर्थ का भ्रमण किया और विद्यार्थियों को उसके इतिहास के बारे में अवगत कराया गया और वहीं विद्यार्थियों ने खूब खरीददारी की और ब्रह्मसरोवर पर शाम की संध्या आरती का लुत्फ उठाया।
विज्ञापन