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Kurukshetra News: फसल अवशेष जलाने से रोकना बना चुनौती, अधिकारियों के छूट रहे पसीने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2024 04:56 AM IST
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Stopping burning of crop residue becomes a challenge, officials are sweating
कुरुक्षेत्र। फसल अवशेष में लगाई आग की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे अ​धिकारी। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिले में फसल अवशेष जलाने से रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। कड़ी सख्ती व लाख प्रयास के बावजूद भी ये मामले थम नहीं रहे हैं। यहां तक कि प्रदेश में कैथल के बाद कुरुक्षेत्र में फसल अवशेष जलाने के सबसे ज्यादा 86 मामले अब तक सामने आ चुके हैं। अभी धान कटाई करीब 50 फीसदी ही मानी जा रही है, जिसके चलते ये मामले भी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सोमवार को जहां नौ घटनाओं की सूचना मिली थी तो वहीं मंगलवार को भी पांच मामले सामने आए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं के चलते धर्मनगरी की आबोहवा भी दमघोटू होने लगी है। देर शाम करीब साढ़े सात बजे कुरुक्षेत्र का एक्यूआई 170 तक पहुंचा, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है।
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यह स्थिति तब है जब प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है तो तत्काल कार्रवाई भी की जा रही है। अभी तक जहां फसल अवशेष जलाने पर संबंधित किसानों पर एक लाख 22 हजार 500 रुपये जुर्माना किया जा चुका है वहीं 11 किसानों के फार्म में रेड एंट्री भी दर्ज की जा चुकी है। हालांकि अभी प्रशासन की ओर से किसी किसान के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है लेकिन तीन गांव के पंचायत सचिव के साथ-साथ सरपंचों व संबंधित क्षेत्र के तीन थाना प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
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अब एसडीएम को फील्ड में उतारा
फसल अवशेष में आग लगाए जाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन की ओर से अब एसडीएम को भी अपने-अपने क्षेत्र में फील्ड में उतारा गया है। इस संबंध में जिला उपायुक्त ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। मंगलवार को भी उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की तो वहीं कहा कि लापरवाही पाए जाने पर किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। एसडीएम भी अपने-अपने क्षेत्रों में समय-समय पर दौरा करे और उपमंडल स्तर पर अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें यह सुनिश्चित करने के निर्देश दे कि खेतों में कहीं पर भी पराली में आग नहीं लगनी चाहिए।
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डॉयल 112 पर भी दी जा सकती है सूचना
उपायुक्त ने यह भी कहा कि खेतों में पड़ी पराली में आगजनी की घटनाओं के तहत इसकी सूचना पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन का मकसद चालान काटना नहीं है अपितु किसानों को जागरूक करते हुए पराली का सही निस्तारण करने बारे है।

30 नवंबर तक करवा सकते हैं पराली प्रबंधन के लिए पंजीकरण

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचन्द ने कहा कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध है। अब तक जिला के 2025 किसानों द्वारा कुल 17122 एकड़ इन सीटू व एक्स-सीटू एक हजार रुपये प्रति एकड़ पराली प्रबंधन के लिए पोर्टल पर पंजीकरण करवाया जा चुका है। पोर्टल पर पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 नवंबर है।



पिछले साल सामने आए थे 327 मामले, किए थे 302 चालान
पिछले वर्ष भी प्रशासन की सख्ती के बावजूद जिले में 327 मामले सामने आए थे, जिनमें 302 चालान किए गए थे और सात लाख 92 हजार 500 रुपये के चालान किए गए थे। इस वर्ष भी फसल अवशेषों में आग लगाने से रोकने के लिए अधिकारियों को रात को भी खेतों में पहुंचना पड़ा था।
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