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Kurukshetra News: प्रदेश सरकार पर विश्वविद्यालय सहायकों के साथ अन्याय का आरोप
Sun, 22 Mar 2026 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:16 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सहायकों को उचित न्याय न देने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ आपत्ति जताई गई है। इसके लिए सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव ने सरकार के विरुद्ध कड़ी नाराजगी जताई और बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 एवं समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कई मामलों में यह स्थापित किया गया कि एक समान स्थिति में सभी कर्मचारियों को समान लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल याचिकाकर्ताओं को। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव दविंदर सचदेवा ने कहा कि कुवित, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय के याचिकाकर्ता व अन्य समान पदधारी सहायकों को 27 फरवरी 2009 की चिट्ठी अनुसार 1 जनवरी-2006 से 3600 ग्रेड-पे प्रदान किया गया था। बाद में हरियाणा सरकार की ओर से अक्तूबर-2014 में उक्त ग्रेड-पे को घटाकर 3200 कर दिया, जोकि अवैध एवं मनमाना था।
सचदेवा ने बताया कि अन्याय के विरुद्ध कर्मचारियों ने एकजुट होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें उच्च न्यायालय ने 15 जुलाई 2019 का फैसला देकर 3600 ग्रेड-पे को बहाल करने के आदेश पारित किए, जबकि राज्य सरकार ने उक्त निर्णय के विरुद्ध अपील दायर की। इसको 11 अप्रैल 2023 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ खारिज ने कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के 15 जुलाई 2019 के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष लीव पिटीशन दायर की। उसे भी टॉप कोर्ट की डबल बैंच ने 15 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया।
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बोले कि उपरोक्त सभी न्यायिक आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने 90 दिन बाद केवल याचिकाकर्ताओं को ही लाभ देने के लिए 20 मार्च-2026 को पत्र जारी किया, जबकि समान रूप से प्रभावित अन्य कर्मचारियों को उक्त लाभ से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि यह कृत्य स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 एवं समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई मामलों में यह स्थापित किया जा चुका है कि एक समान स्थिति में सभी कर्मचारियों को समान लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल याचिकाकर्ताओं को। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावित कर्मियों को 3600 ग्रेड-पे का लाभ नहीं मिलने तक अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
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उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कई मामलों में यह स्थापित किया गया कि एक समान स्थिति में सभी कर्मचारियों को समान लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल याचिकाकर्ताओं को। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त सहायक कुलसचिव दविंदर सचदेवा ने कहा कि कुवित, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय के याचिकाकर्ता व अन्य समान पदधारी सहायकों को 27 फरवरी 2009 की चिट्ठी अनुसार 1 जनवरी-2006 से 3600 ग्रेड-पे प्रदान किया गया था। बाद में हरियाणा सरकार की ओर से अक्तूबर-2014 में उक्त ग्रेड-पे को घटाकर 3200 कर दिया, जोकि अवैध एवं मनमाना था।
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सचदेवा ने बताया कि अन्याय के विरुद्ध कर्मचारियों ने एकजुट होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें उच्च न्यायालय ने 15 जुलाई 2019 का फैसला देकर 3600 ग्रेड-पे को बहाल करने के आदेश पारित किए, जबकि राज्य सरकार ने उक्त निर्णय के विरुद्ध अपील दायर की। इसको 11 अप्रैल 2023 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ खारिज ने कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के 15 जुलाई 2019 के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष लीव पिटीशन दायर की। उसे भी टॉप कोर्ट की डबल बैंच ने 15 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया।
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बोले कि उपरोक्त सभी न्यायिक आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने 90 दिन बाद केवल याचिकाकर्ताओं को ही लाभ देने के लिए 20 मार्च-2026 को पत्र जारी किया, जबकि समान रूप से प्रभावित अन्य कर्मचारियों को उक्त लाभ से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि यह कृत्य स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 एवं समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई मामलों में यह स्थापित किया जा चुका है कि एक समान स्थिति में सभी कर्मचारियों को समान लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल याचिकाकर्ताओं को। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावित कर्मियों को 3600 ग्रेड-पे का लाभ नहीं मिलने तक अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।