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Kurukshetra News: उत्तर भारत में अंतरिक्ष शोध को मिलेगा नया आयाम
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राजरानी
कुरुक्षेत्र। उत्तर भारत में अंतरिक्ष शोध को अब नया आयाम मिलने वाला है। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र की ओर से संयुक्त पहल की जा रही है।
इसी के तहत आज मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। इसमें उत्तर क्षेत्र के लिए इसरो के शैक्षणिक सहयोग को लेकर वैज्ञानिक अपने विचार साझा करेंगे, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोगों की अगली पीढ़ी को केंद्रित करना है।
कार्यशाला में इसरो अध्यक्ष भारतीय रॉकेट प्रोप्लशन एक्सपर्ट और एयरोस्पेस इंजीनियर डॉ. वी नारायणन बतौर मुख्यातिथि अंतरिक्ष में आगामी अनुसंधान चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा करेंगे। इसी के साथ इसरो के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी प्रतिभागियों को शोध के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। ऐसे में प्रतिभागियों को इसरो के डोमेन एक्सपर्ट्स से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें मूल्यवान जानकारियां प्राप्त होंगी और अपने शोध प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के अवसरों की खोज करने का मंच मिलेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी करेंगे।
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यह आयोजन हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे उत्तर भारत के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के नियमित फैकल्टी सदस्यों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया है। यह इसरो के भावी मिशनों में अकादमिक योगदान सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम माना जा रहा है।
शैक्षणिक संस्थानों का इसरो के बीच सहयोग होगा सुदृढ़
रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस के क्षेत्रीय समन्वयक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह के मुताबिक निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला उत्तरी भारत के शैक्षणिक संस्थानों और इसरो के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी, जहां छात्र, शोधकर्ता और वैज्ञानिक मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान में नवाचार और अनुसंधान के नए रास्ते खोजेंगे। इसरो की ओर से यह पहल अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस का उद्देश्य भी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की भविष्य की तकनीकी और कार्यक्रमगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्नत शोध को प्रोत्साहित करना है।
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कुरुक्षेत्र। उत्तर भारत में अंतरिक्ष शोध को अब नया आयाम मिलने वाला है। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र की ओर से संयुक्त पहल की जा रही है।
इसी के तहत आज मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। इसमें उत्तर क्षेत्र के लिए इसरो के शैक्षणिक सहयोग को लेकर वैज्ञानिक अपने विचार साझा करेंगे, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोगों की अगली पीढ़ी को केंद्रित करना है।
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कार्यशाला में इसरो अध्यक्ष भारतीय रॉकेट प्रोप्लशन एक्सपर्ट और एयरोस्पेस इंजीनियर डॉ. वी नारायणन बतौर मुख्यातिथि अंतरिक्ष में आगामी अनुसंधान चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा करेंगे। इसी के साथ इसरो के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी प्रतिभागियों को शोध के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। ऐसे में प्रतिभागियों को इसरो के डोमेन एक्सपर्ट्स से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें मूल्यवान जानकारियां प्राप्त होंगी और अपने शोध प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के अवसरों की खोज करने का मंच मिलेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी करेंगे।
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यह आयोजन हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे उत्तर भारत के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के नियमित फैकल्टी सदस्यों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया है। यह इसरो के भावी मिशनों में अकादमिक योगदान सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम माना जा रहा है।
शैक्षणिक संस्थानों का इसरो के बीच सहयोग होगा सुदृढ़
रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस के क्षेत्रीय समन्वयक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह के मुताबिक निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला उत्तरी भारत के शैक्षणिक संस्थानों और इसरो के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी, जहां छात्र, शोधकर्ता और वैज्ञानिक मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान में नवाचार और अनुसंधान के नए रास्ते खोजेंगे। इसरो की ओर से यह पहल अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस का उद्देश्य भी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की भविष्य की तकनीकी और कार्यक्रमगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्नत शोध को प्रोत्साहित करना है।