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Kurukshetra News: किसी ने ट्रक-घर बेचा तो किसी की लग गई जीवनभर की कमाई
Tue, 28 Oct 2025 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 28 Oct 2025 02:35 AM IST
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प्रदीप पिलानिया
कुरुक्षेत्र। डॉलर की खनक व सुनहरे जीवन के सपनों का पीछा करने वाले युवाओं की निराशा थमने का नाम नहीं ले रही। अवैध आप्रवासन के इस सिलसिले ने न केवल परिवारों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है, बल्कि भावनात्मक आघात भी पहुंचाया है। शनिवार देर रात को एक और फ्लाइट में जिले के विक्रम व पारस सहित पांच युवाओं को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर डिपोर्ट कर भारत लौटाया गया।
ये युवा बहकावे में आए एजेंटों के जाल में फंसकर डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन अमेरिकी सीमा पर पकड़े जाने के बाद महीनों की हिरासत और निर्वासन का दर्द भुगतना पड़ा। शहर के ही रहने वाले सतनाम सिंह ने बताया कि उनके छोटे भाई विक्रम ने पिता की मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के ख्वाब संजोए थे। अगस्त 2024 में विक्रम पिता के दो ट्रक और पुश्तैनी घर बेचकर करीब 40 लाख रुपये जुटाकर रवाना हुए। एजेंट ने डंकी रूट से अमेरिका पहुंचाने व वहां एसाइलम और नौकरी की गारंटी दी थी। विक्रम ब्राजील तक हवाई जहाज से बिना किसी परेशानी के पहुंचे, लेकिन उसके बाद डोंकर ने उन्हें बस, समुद्री जहाज और पैदल रास्तों से आगे बढ़ाया। ब्राजील से ग्वाटेमाला, होंडुरास, कोलंबिया, पनामा और मेक्सिको के रास्ते जाते हुए विक्रम को घने जंगलों से गुजरना पड़ा, जहां अपराधी गिरोहों का खतरा और जानलेवा बीमारियां आम हैं।
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कुरुक्षेत्र। डॉलर की खनक व सुनहरे जीवन के सपनों का पीछा करने वाले युवाओं की निराशा थमने का नाम नहीं ले रही। अवैध आप्रवासन के इस सिलसिले ने न केवल परिवारों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है, बल्कि भावनात्मक आघात भी पहुंचाया है। शनिवार देर रात को एक और फ्लाइट में जिले के विक्रम व पारस सहित पांच युवाओं को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर डिपोर्ट कर भारत लौटाया गया।
ये युवा बहकावे में आए एजेंटों के जाल में फंसकर डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन अमेरिकी सीमा पर पकड़े जाने के बाद महीनों की हिरासत और निर्वासन का दर्द भुगतना पड़ा। शहर के ही रहने वाले सतनाम सिंह ने बताया कि उनके छोटे भाई विक्रम ने पिता की मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के ख्वाब संजोए थे। अगस्त 2024 में विक्रम पिता के दो ट्रक और पुश्तैनी घर बेचकर करीब 40 लाख रुपये जुटाकर रवाना हुए। एजेंट ने डंकी रूट से अमेरिका पहुंचाने व वहां एसाइलम और नौकरी की गारंटी दी थी। विक्रम ब्राजील तक हवाई जहाज से बिना किसी परेशानी के पहुंचे, लेकिन उसके बाद डोंकर ने उन्हें बस, समुद्री जहाज और पैदल रास्तों से आगे बढ़ाया। ब्राजील से ग्वाटेमाला, होंडुरास, कोलंबिया, पनामा और मेक्सिको के रास्ते जाते हुए विक्रम को घने जंगलों से गुजरना पड़ा, जहां अपराधी गिरोहों का खतरा और जानलेवा बीमारियां आम हैं।
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