{"_id":"62e592c5e4c3340d8944b3ed","slug":"sick-hospital-treat-two-in-one-bed-kurukshetra-kurukshetra-news-knl116343477","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमार अस्पताल ! एक बेड पर दो का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमार अस्पताल ! एक बेड पर दो का इलाज
विज्ञापन
एलएनजेपी अस्पताल के पुरुष वार्ड में उपचाराधीन मरीज और तीमारदार। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शहर का एकमात्र लोकनायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) नागरिक अस्पताल स्वयं बीमार है। अस्पताल को अव्यवस्थाओं ने घेर रखा है। अस्पताल के पुरुष और महिला वार्डों में एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा। वहीं अस्पताल में बेड शीट की भारी कमी है। रोजाना 1500 मरीजों का इलाज करने वाले एलएनजेपी अस्पताल को स्वयं उपचार की जरूरत हैं।
अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर से लेकर तृतीय तल पर वॉल सीलिंग जगह-जगह से उखड़ी है। तीनों तलों पर पीने की पानी के लिए लगाए गए अधिकांश वाटर कूलर खराब पड़े हैं और जो ठीक है, उसमें गंदगी की भरमार है।
पुरुष व महिला वार्ड में 40-40 बेड हैं। इन पर चादरें रोजाना नहीं बदली जाती हैं। करीब छह माह पहले इंडिगो कलर की 40 चादरें मिली थी। अन्य चादरों को मिलें हुए दो-तीन साल बीत चुके हैं। अस्पताल में जो पुरानी चादरें बची हुई है, सिर्फ उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। दोनों वार्डों में बेडशीट की कमी हैं। वहीं अस्पताल में दोपहर 12 बजे सभी वार्डों में लगे हुए डस्टबिन तक भरे हुए मिले। जब इनके बार में स्टाफ से पूछा तो जवाब मिला कि कर्मचारी ने अभी सफाई की है, जिससे डस्टबिन भर गए। गंदगी उठाने वाले अभी तक नहीं आए हैं।
विज्ञापन
मरीज अमनदीप ने बताया कि उसे पुरुष वार्ड में दाखिल हुए शनिवार को 26 दिन हो गए। इस बीच अस्पताल प्रशासन ने मात्र दो बार ही चादर बदल पाया है। वहीं जो चादर बदली वह भी फटी हुई दी गई। इसके लिए कई बार बोल चुके हैं, मगर कोई हल नहीं निकला।
तीमारदार बहादुर सिंह ने बताया कि उसके रिश्तेदार का एक्सीडेंट होने के कारण वह तीन दिनों से दाखिल है। जब वे यहां आए तो बेड पर चादर नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपने घर से चादर मंगवाकर बिछा रखी है। अस्पताल स्टाफ का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं।
मरीज संदीप ने बताया कि वह पिछले आठ दिनों से अस्पताल में भर्ती है। जो चादर पहले दिन मिली थी उसी पर लेटा हुआ हूं। जब स्टाफ नर्स को बोला तो उन्होंने चादर न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
तीमारदार पुष्पा ने बताया कि वह अपने भाई के इलाज के लिए पिछले पांच दिनों से अस्पताल परिसर में है। उसे अभी तक बेड तक मुहैया नहीं हो पाया। ऐसे में उसे और मरीज भाई को जमीन पर लेटकर ही रात बितानी पड़ रही है। वार्ड में पर्याप्त बेड नहीं हैं।
अस्पताल प्रशासन को कई साल पहले चादरें मिली थी। जिसके बाद से अभी तक एक भी चादर नहीं आ पाई है। वहीं एक कमरे में छह बेड की बजाय आठ बेड लगाए हुए हैं। उनके पास पर्याप्त जगह और बेड नहीं है। ऐसे में एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज चल रहा है।
- डॉ. साराह अग्रवाल, चिकित्सा अधिकारी, एलएनजेपी सिविल अस्पताल, कुरुक्षेत्र।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। शहर का एकमात्र लोकनायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) नागरिक अस्पताल स्वयं बीमार है। अस्पताल को अव्यवस्थाओं ने घेर रखा है। अस्पताल के पुरुष और महिला वार्डों में एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा। वहीं अस्पताल में बेड शीट की भारी कमी है। रोजाना 1500 मरीजों का इलाज करने वाले एलएनजेपी अस्पताल को स्वयं उपचार की जरूरत हैं।
अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर से लेकर तृतीय तल पर वॉल सीलिंग जगह-जगह से उखड़ी है। तीनों तलों पर पीने की पानी के लिए लगाए गए अधिकांश वाटर कूलर खराब पड़े हैं और जो ठीक है, उसमें गंदगी की भरमार है।
विज्ञापन
पुरुष व महिला वार्ड में 40-40 बेड हैं। इन पर चादरें रोजाना नहीं बदली जाती हैं। करीब छह माह पहले इंडिगो कलर की 40 चादरें मिली थी। अन्य चादरों को मिलें हुए दो-तीन साल बीत चुके हैं। अस्पताल में जो पुरानी चादरें बची हुई है, सिर्फ उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। दोनों वार्डों में बेडशीट की कमी हैं। वहीं अस्पताल में दोपहर 12 बजे सभी वार्डों में लगे हुए डस्टबिन तक भरे हुए मिले। जब इनके बार में स्टाफ से पूछा तो जवाब मिला कि कर्मचारी ने अभी सफाई की है, जिससे डस्टबिन भर गए। गंदगी उठाने वाले अभी तक नहीं आए हैं।
विज्ञापन
मरीज अमनदीप ने बताया कि उसे पुरुष वार्ड में दाखिल हुए शनिवार को 26 दिन हो गए। इस बीच अस्पताल प्रशासन ने मात्र दो बार ही चादर बदल पाया है। वहीं जो चादर बदली वह भी फटी हुई दी गई। इसके लिए कई बार बोल चुके हैं, मगर कोई हल नहीं निकला।
तीमारदार बहादुर सिंह ने बताया कि उसके रिश्तेदार का एक्सीडेंट होने के कारण वह तीन दिनों से दाखिल है। जब वे यहां आए तो बेड पर चादर नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपने घर से चादर मंगवाकर बिछा रखी है। अस्पताल स्टाफ का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं।
मरीज संदीप ने बताया कि वह पिछले आठ दिनों से अस्पताल में भर्ती है। जो चादर पहले दिन मिली थी उसी पर लेटा हुआ हूं। जब स्टाफ नर्स को बोला तो उन्होंने चादर न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
तीमारदार पुष्पा ने बताया कि वह अपने भाई के इलाज के लिए पिछले पांच दिनों से अस्पताल परिसर में है। उसे अभी तक बेड तक मुहैया नहीं हो पाया। ऐसे में उसे और मरीज भाई को जमीन पर लेटकर ही रात बितानी पड़ रही है। वार्ड में पर्याप्त बेड नहीं हैं।
अस्पताल प्रशासन को कई साल पहले चादरें मिली थी। जिसके बाद से अभी तक एक भी चादर नहीं आ पाई है। वहीं एक कमरे में छह बेड की बजाय आठ बेड लगाए हुए हैं। उनके पास पर्याप्त जगह और बेड नहीं है। ऐसे में एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज चल रहा है।
- डॉ. साराह अग्रवाल, चिकित्सा अधिकारी, एलएनजेपी सिविल अस्पताल, कुरुक्षेत्र।

नवजात शिशु केयर यूनिट के बाहर जमीन पर बैठे मरीजों के तीमारदार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

अस्पताल के पुरुष वार्ड में फटी चादर दिखाता मरीज। संवाद- फोटो : Kurukshetra