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Kurukshetra News: श्रीमद्भगवद्गीता केवल पाठ नहीं, जीने की है कला
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित 18 दिवसीय कार्यक्रम के पांचवें दिन सामाजिक जीवन में गीता के महत्व विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इसमें भारतीय जानता पार्टी के केंद्रीय संघटक विवेक दांडेकर ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। मुख्य वक्ता दांडेकर ने कहा श्रीमद्भगवद्गीता केवल पढ़ने के लिए एक पाठ नहीं है बल्कि जीने का एक तरीका है।
जब आप इस यात्रा पर निकलेंगे, तो याद रखें कि ईश्वर का गीत हम में से हर एक के भीतर गूंजता है, जो प्रकट होने का इंतजार कर रहा है। इसकी बुद्धिमत्ता आपको पूर्णता और आंतरिक शांति के मार्ग पर ले जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डाॅ. मिश्र ने कहा कि भारत आज विश्व के सामने स्वाभिमान से खड़ा है। इसमें महाभारत, रामायण, गीता जैसे आध्यात्मिक साहित्य का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इनमें से एक भी ग्रंथ भारत में निर्माण नहीं होता, तो भारत का अस्तित्व कब का समाप्त हो चुका होता। अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी दैनंदिन व्यवहार में भी गीता आंशिक रूप से कहीं ना कहीं जरूर होती है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विवेक दांडेकर, मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के डिप्टी एडवोकेट जनरल रोहित आर्य ने किया।
कार्यक्रम अतिथि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के डिप्टी एडवोकेट जनरल रोहित आर्य ने कहा गीता में दिए गए उपदेशों से मनुष्य को सही फैसला लेने में मदद मिलती है। गीता में दिए गए ज्ञान से मनुष्य को जीवन की चुनौतियों से निपटने में न्याय सम्मत समाधान प्राप्त होता है।
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इसमें भारतीय जानता पार्टी के केंद्रीय संघटक विवेक दांडेकर ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। मुख्य वक्ता दांडेकर ने कहा श्रीमद्भगवद्गीता केवल पढ़ने के लिए एक पाठ नहीं है बल्कि जीने का एक तरीका है।
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जब आप इस यात्रा पर निकलेंगे, तो याद रखें कि ईश्वर का गीत हम में से हर एक के भीतर गूंजता है, जो प्रकट होने का इंतजार कर रहा है। इसकी बुद्धिमत्ता आपको पूर्णता और आंतरिक शांति के मार्ग पर ले जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डाॅ. मिश्र ने कहा कि भारत आज विश्व के सामने स्वाभिमान से खड़ा है। इसमें महाभारत, रामायण, गीता जैसे आध्यात्मिक साहित्य का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इनमें से एक भी ग्रंथ भारत में निर्माण नहीं होता, तो भारत का अस्तित्व कब का समाप्त हो चुका होता। अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी दैनंदिन व्यवहार में भी गीता आंशिक रूप से कहीं ना कहीं जरूर होती है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विवेक दांडेकर, मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के डिप्टी एडवोकेट जनरल रोहित आर्य ने किया।
कार्यक्रम अतिथि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के डिप्टी एडवोकेट जनरल रोहित आर्य ने कहा गीता में दिए गए उपदेशों से मनुष्य को सही फैसला लेने में मदद मिलती है। गीता में दिए गए ज्ञान से मनुष्य को जीवन की चुनौतियों से निपटने में न्याय सम्मत समाधान प्राप्त होता है।