{"_id":"d053e06ccc0df54d217e0bd76904ed68","slug":"shrimad-bhagvad-geeta-base-of-islam-moh-hanif-khan-shashtri-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद् भागवत गीता है ईस्लाम की बुनियाद : मो.हनीफ खान शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद् भागवत गीता है ईस्लाम की बुनियाद : मो.हनीफ खान शास्त्री
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 19 Dec 2015 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीमद् भागवत गीता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे सेमिनार में
विज्ञापन
दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से आए डॉ. मोहम्मद हनीफ खान
शास्त्री ने कहा कि कोई गीता पढ़े न पढ़े, लेकिन प्रत्येक मुसलमान को
श्रीमद् भागवत गीता अवश्य पढ़नी चाहिए।
श्रीमद् भागवत गीता ही इस्लाम की बुनियाद है। यदि इस्लाम को समझना है, तो उससे पहले गीता को पढ़ना अनिवार्य है। डॉ. हनीफ खान शास्त्री केयू ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठी में ऑडिटोरियम के सभागार में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कोई गीता पढ़े न पढ़े, कोई इसे समझे न समझे, लेकिन एक मुसलमान को श्रीमद् भागवत गीता अवश्य समझना और पढ़ना चाहिए। यदि मुकम्मल ईमान चाहिए, तो गीता को समझना अनिवार्य है। श्रीमद् भागवत गीता ही पूरे इस्लाम की बुनियाद है।
इस्लाम का सच्चा अर्थ है, समर्पण और शांति। अर्थात ईश्वर द्वारा रचित नियमों के सामने स्वयं का समर्पण। गीता में भी समर्पण और शांतिमय जीवन जीने को ही सर्वोपरी कहा गया है। ऐसे में श्रीमद् भागवत गीता की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है।
डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने कहा कि किसी भी भाषा हिंदी, अंग्रेजी, अरबी, ऊर्दू की डिक्शनरी ले आएं और इसके माध्यम से गीता को अवश्य पढ़ें। उन्होंने कहा कि मैं हर समय अपने पास गीता को साथ रखता हूं।
श्रीमद् भागवत गीता ही इस्लाम की बुनियाद है। यदि इस्लाम को समझना है, तो उससे पहले गीता को पढ़ना अनिवार्य है। डॉ. हनीफ खान शास्त्री केयू ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठी में ऑडिटोरियम के सभागार में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कोई गीता पढ़े न पढ़े, कोई इसे समझे न समझे, लेकिन एक मुसलमान को श्रीमद् भागवत गीता अवश्य समझना और पढ़ना चाहिए। यदि मुकम्मल ईमान चाहिए, तो गीता को समझना अनिवार्य है। श्रीमद् भागवत गीता ही पूरे इस्लाम की बुनियाद है।
इस्लाम का सच्चा अर्थ है, समर्पण और शांति। अर्थात ईश्वर द्वारा रचित नियमों के सामने स्वयं का समर्पण। गीता में भी समर्पण और शांतिमय जीवन जीने को ही सर्वोपरी कहा गया है। ऐसे में श्रीमद् भागवत गीता की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है।
डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने कहा कि किसी भी भाषा हिंदी, अंग्रेजी, अरबी, ऊर्दू की डिक्शनरी ले आएं और इसके माध्यम से गीता को अवश्य पढ़ें। उन्होंने कहा कि मैं हर समय अपने पास गीता को साथ रखता हूं।