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लोककथाओं की बदलती प्रवृत्ति पर डाला प्रकाश
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केयू के सीनेट हॉल में आयोजित 8वें अखिल भाषा विज्ञान और लोकगीत सम्मेलन के मुख्यातिथि डॉ. गुरपाल सि?
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित अखिल भाषा विज्ञान और लोकगीत सम्मेलन का समापन हुआ। हरजिंदर सिंह ने ‘पंजाबी लोकगीत बदले परिपेक्ष्य’ पर शोधपत्र पढ़ा और लोककथाओं की बदलती प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला।
द्वितीय शैक्षणिक सत्र में डॉ. जसविंदर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और प्रो. नरविंद्र सिंह कौशल बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। इस सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया और अपने शोध पत्र पढे़। सम्मेलन के तृतीय शैक्षणिक सत्र में नई शिक्षा नीति और 21वीं सदी में ‘हरियाणा और पंजाब की बोलियां, स्थितियां, चुनौतियां और संभावनाएं’ आदि विषयों पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. राजिंदर सिंह भट्टी व प्रो. सरबजीत सिंह ने की।
इसमें विशेष मेहमान के रूप में डॉ. रमेश कुमार उपस्थित रहे। इस सत्र की शुरुआत गुरजंत सिंह के विषय 21वीं सदी में पंजाबी भाषा का बदलता स्वरूप (पंजाबी संस्कृति के एक विशेष संदर्भ में) से हुई। शोधार्थी नवलदीप ने ‘राष्ट्रीय भाषा शिक्षा नीति में बोलियों का महत्व और चुनौतियां’ विषय पर शिक्षा नीति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन के चौथे शैक्षणिक सत्र का विषय भाषा विज्ञान था, जिसमें योगराज सिंह, महासिंह पूनिया और डॉ. आर मौदगिल मुख्य रूप से शामिल रहे।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित अखिल भाषा विज्ञान और लोकगीत सम्मेलन का समापन हुआ। हरजिंदर सिंह ने ‘पंजाबी लोकगीत बदले परिपेक्ष्य’ पर शोधपत्र पढ़ा और लोककथाओं की बदलती प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला।
द्वितीय शैक्षणिक सत्र में डॉ. जसविंदर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और प्रो. नरविंद्र सिंह कौशल बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। इस सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया और अपने शोध पत्र पढे़। सम्मेलन के तृतीय शैक्षणिक सत्र में नई शिक्षा नीति और 21वीं सदी में ‘हरियाणा और पंजाब की बोलियां, स्थितियां, चुनौतियां और संभावनाएं’ आदि विषयों पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. राजिंदर सिंह भट्टी व प्रो. सरबजीत सिंह ने की।
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इसमें विशेष मेहमान के रूप में डॉ. रमेश कुमार उपस्थित रहे। इस सत्र की शुरुआत गुरजंत सिंह के विषय 21वीं सदी में पंजाबी भाषा का बदलता स्वरूप (पंजाबी संस्कृति के एक विशेष संदर्भ में) से हुई। शोधार्थी नवलदीप ने ‘राष्ट्रीय भाषा शिक्षा नीति में बोलियों का महत्व और चुनौतियां’ विषय पर शिक्षा नीति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन के चौथे शैक्षणिक सत्र का विषय भाषा विज्ञान था, जिसमें योगराज सिंह, महासिंह पूनिया और डॉ. आर मौदगिल मुख्य रूप से शामिल रहे।
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