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यौन उत्पीड़न भेदभाव का एक गंभीर रूप,इसे बरदाश्त नहीं करना चाहिए: प्रो. शुचिस्मिता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2022 09:00 AM IST
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Sexual harassment is a serious form of discrimination and should not be tolerated
कुरुक्षेत्र। केयू के शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की ओर से वीरवार को डॉ. आरके सदन में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान यौन उत्पीड़न को भेदभाव का गंभीर रूप बताते हुए इसे बरदाश्त न करने पर जोर दिया गया।
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मुख्यातिथि केयू की आंतरिक शिकायत कमेटी की अध्यक्ष और संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. शुचिस्मिता ने कहा कि यौन उत्पीड़न वैसे अवांछनीय यौन व्यवहार अथवा यौन प्रकृति वाले मौखिक या शारीरिक आचरण को कहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति के काम काज में अनुचित हस्तक्षेप होता है या फिर काम का माहौल भयपूर्ण, शत्रुतापूर्ण या अपमानजनक बन जाता है। यौन उत्पीड़न भेदभाव का एक गंभीर रूप है, और इसे बरदाश्त नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपरोक्त स्थिति काम में समानता का अवमूल्यन है, और काम करने वालों की इज्जत, गरिमा और सलामती के खिलाफ है। भारत ने इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 पारित किया है। इससे पहले प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. अमीषा सिंह व प्रो. वनिता ढींगरा द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती को पुष्प अर्पित करते हुए किया गया।
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मुख्य वक्ता समाज कार्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वनिता ढींगरा ने इस विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय लैंगिक संवेदनशीलता को गंभीरता से लेते हुए काम कर रहा है और लैंगिक समानता को बढ़ावा दे रहा है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, लैंगिक समानता, जीवन और स्वतंत्रता को लेकर महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है। कार्यस्थल पर महिलाओं के अनुरूप वातावरण न होने की स्थिति में उनके वहां कार्य करना मुश्किल हो जाता है और अगर ऐसे में यौन उत्पीड़न होता है तो महिलाओं की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस वजह से देश की महिलाओं, आर्थिक सशक्तिकरण और उनके समावेशी विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थान की प्राचार्य प्रो. अमीषा सिंह ने विचार व्यक्त किए। अंत में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बेटी के महत्व का संदेश दिया गया। इस अवसर पर शिक्षकों, गैर शिक्षक कर्मचारियों व विद्यार्थियों सहित करीब 300 लोग मौजूद थे।
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