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माता पिता व गुरुओं की सेवा करना की मनुष्य का प्रथम धर्म
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इस्माईलाबाद। गुरु गोरखनाथ धाम में प्रवचन देते महंत नरेश नाथ।
- फोटो : Kurukshetra
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इस्माईलाबाद। गुरु गोरखनाथ धाम के गद्दीनशीन महंत नरेश नाथ ने कहा कि माता-पिता व गुरुजनों की सेवा करना व उनका कहना मानना मनुष्य का प्रथम धर्म बनता है। सभी को अपने माता-पिता व गुरुजनों की आज्ञा का पालन करना चाहिए। यह शिक्षा हमारे पूर्वज व देवी देवताओं ने हमें दी है। वे बुधवार को धाम में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भी अपने पिता की आज्ञा मानकर राजपाट छोड़ कर चौदह वर्ष के लिए जंगल में चले गए थे। उनकी पितृभक्ति आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने मार्ग से भटक गया है। आज का युवा मोबाइल फोन में ही सीमित होकर रह गया है, जिससे आपसी बोलचाल खत्म हो गई है। उन्हें सही रास्ता दिखाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बिना गुरु के यह कार्य संभव नहीं है। एक अच्छा गुरु ही अपने शिष्य का जीवन पार लगा सकता है। उन्होंने कहा कि गुरुओं के बताए मार्ग पर ही चलें और जीवन को समाज सेवा के कामों में लगाए। इस मौके पर उनके साथ बाबा तेजनाथ, प्रहलाद भगत शर्मा, सुनील कोमल, राजवीर, डॉ.पाल, राजेंद्र गोयल, रामचंद्र, सूरज बंसल व जवाहरलाल बंसल आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भी अपने पिता की आज्ञा मानकर राजपाट छोड़ कर चौदह वर्ष के लिए जंगल में चले गए थे। उनकी पितृभक्ति आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने मार्ग से भटक गया है। आज का युवा मोबाइल फोन में ही सीमित होकर रह गया है, जिससे आपसी बोलचाल खत्म हो गई है। उन्हें सही रास्ता दिखाने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि बिना गुरु के यह कार्य संभव नहीं है। एक अच्छा गुरु ही अपने शिष्य का जीवन पार लगा सकता है। उन्होंने कहा कि गुरुओं के बताए मार्ग पर ही चलें और जीवन को समाज सेवा के कामों में लगाए। इस मौके पर उनके साथ बाबा तेजनाथ, प्रहलाद भगत शर्मा, सुनील कोमल, राजवीर, डॉ.पाल, राजेंद्र गोयल, रामचंद्र, सूरज बंसल व जवाहरलाल बंसल आदि मौजूद रहे।
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