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Kurukshetra News: केयू में हरियाणा के भूजल पर होगा वैज्ञानिक शोध
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा में भूजल संसाधनों की स्थिति, गुणवत्ता और सतत उपयोग पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में दो वर्षीय शोध किया जाएगा। इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. कुलविंदर कौर को हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि (एचएसआरएफ) के तहत 15 लाख रुपये का शोध अनुदान स्वीकृत हुआ है।
शोध के दौरान प्रदेश में भूजल की उपलब्धता, उसकी गुणवत्ता, वर्तमान उपयोग और दीर्घकालिक संरक्षण की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। परियोजना से प्राप्त निष्कर्ष भूजल संरक्षण, जल प्रबंधन और सतत विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए उपयोगी आधार तैयार करेंगे। दो वर्ष की इस परियोजना के लिए स्वीकृत बजट में पहली किस्त के रूप में 8.25 लाख रुपये जारी किए जाएंगे। शेष राशि परियोजना की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. कुलविंदर कौर ने बताया कि हरियाणा में लगातार घटते भूजल स्तर और जल गुणवत्ता की चुनौतियों को देखते हुए यह अध्ययन महत्वपूर्ण होगा। शोध के निष्कर्ष राज्य सरकार और नीति-निर्माताओं को भूजल संरक्षण और वैज्ञानिक जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं तैयार करने में मदद करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन और भूगोल विभाग के शिक्षकों ने डॉ. कुलविंदर कौर को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह परियोजना हरियाणा में भूजल संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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शोध के दौरान प्रदेश में भूजल की उपलब्धता, उसकी गुणवत्ता, वर्तमान उपयोग और दीर्घकालिक संरक्षण की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। परियोजना से प्राप्त निष्कर्ष भूजल संरक्षण, जल प्रबंधन और सतत विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए उपयोगी आधार तैयार करेंगे। दो वर्ष की इस परियोजना के लिए स्वीकृत बजट में पहली किस्त के रूप में 8.25 लाख रुपये जारी किए जाएंगे। शेष राशि परियोजना की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।
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डॉ. कुलविंदर कौर ने बताया कि हरियाणा में लगातार घटते भूजल स्तर और जल गुणवत्ता की चुनौतियों को देखते हुए यह अध्ययन महत्वपूर्ण होगा। शोध के निष्कर्ष राज्य सरकार और नीति-निर्माताओं को भूजल संरक्षण और वैज्ञानिक जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं तैयार करने में मदद करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन और भूगोल विभाग के शिक्षकों ने डॉ. कुलविंदर कौर को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह परियोजना हरियाणा में भूजल संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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