{"_id":"5f68ee688ebc3e34fc13883c","slug":"schools-open-after-186-days-15-percent-of-students-reach-school-kurukshetra-news-knl44977739","type":"story","status":"publish","title_hn":"186 दिन बाद खुले स्कूल, 15 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंचे स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
186 दिन बाद खुले स्कूल, 15 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंचे स्कूल
विज्ञापन
कोरोना के चलते 186 दिन बाद स्कूल खुले, हालांकि पहले दिन मात्र 15 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बच्चों के स्कूल न आने का मुख्य कारण परिजनों में कोरोना को लेकर दहशत पता चला। वहीं, स्कूल में प्रवेश से पहले गुरुजनों और शिष्यों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इसके साथ ही हाथों को अच्छे से सैनिटाइज भी किया गया। वहीं कक्षा के दौरान सोशल डिस्टेंस का पूरा ख्याल रखा गया। शिक्षकों ने इस बार किताबी ज्ञान के साथ-साथ कोरोना के प्रति जागरूकता का ज्ञान भी विद्यार्थियों को दिया। शिक्षा विभाग के आदेशानुसार स्कूलों में रेगुलर क्लास नहीं लगेगी और न ही विद्यार्थियों को स्कूल में बैग लेकर आना होगा। शिक्षा विभाग ने नो पेपर एक्सचेंज पॉलिसी के तहत स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है।
इसके साथ ही स्कूलों को खोलने से पहले सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट जरूरी किया गया है, लेकिन अभी तक जिले के सभी शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट नहीं हो सके। हालांकि पिछले 15 दिनों में जिन शिक्षकों के अब तक टेस्ट हुए हैं, उनमें से 22 शिक्षक कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर में मात्र चार विद्यार्थी पहुंचे। इसके अलावा लाडवा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में नौवीं से बारहवीं कक्षा तक 12 ही विद्यार्थियों ने स्कूल में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा किसी भी स्कूल में कोई विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए नहीं पहुंचा।
प्राचार्य विपिन शर्मा ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार सोमवार से सुबह 8 बजे से ढाई बजे तक स्कूल लगाने का आदेश जारी हुआ था। उसी कड़ी में सोमवार को बच्चों सोशल डिस्टेंस मास्क और सैनिटाइजर के द्वारा स्कूल में प्रवेश कराया गया है, लेकिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक कुल 12 ही विद्यार्थी स्कूल में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आएंगे तो उनके लिए उचित व्यवस्था की गई है। वहीं सोशल डिस्टेंस और सैनिटाइजर आदि की पूरी व्यवस्था स्कूल की ओर से की गई है और किसी भी बच्चे को कोरोना की चपेट में नहीं आने दिया जाएगा। इस बात का ध्यान रखते हुए शिक्षा दी जाएगी।
विज्ञापन
वही विद्यार्थी स्कूल आए, जिन्हें सिलेबस से संबंधित कोई दिक्कत हो : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री ने कहा कि स्कूल में वही विद्यार्थी स्कूल आए, जिन्हें सिलेबस संबंधित कोई दिक्कत हो। इसके लिए भी उसे अभिभावकों से लिखित में अनुमति लेनी होगी। इस संदर्भ में उन्होंने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को निर्देश दिये गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। अगर स्कूल के अंदर विद्यार्थियों की भीड़ हो गई तो प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा स्कूल में वो ही शिक्षक आ रहे हैं, जिनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने कहा कि लाडवा, मथाना, शाहाबाद में 90 प्रतिशत शिक्षकों का कोविड-19 टेस्ट हो चुका है, जबकि थानेसर में शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
इसके साथ ही स्कूलों को खोलने से पहले सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट जरूरी किया गया है, लेकिन अभी तक जिले के सभी शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट नहीं हो सके। हालांकि पिछले 15 दिनों में जिन शिक्षकों के अब तक टेस्ट हुए हैं, उनमें से 22 शिक्षक कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर में मात्र चार विद्यार्थी पहुंचे। इसके अलावा लाडवा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में नौवीं से बारहवीं कक्षा तक 12 ही विद्यार्थियों ने स्कूल में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा किसी भी स्कूल में कोई विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
प्राचार्य विपिन शर्मा ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार सोमवार से सुबह 8 बजे से ढाई बजे तक स्कूल लगाने का आदेश जारी हुआ था। उसी कड़ी में सोमवार को बच्चों सोशल डिस्टेंस मास्क और सैनिटाइजर के द्वारा स्कूल में प्रवेश कराया गया है, लेकिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक कुल 12 ही विद्यार्थी स्कूल में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आएंगे तो उनके लिए उचित व्यवस्था की गई है। वहीं सोशल डिस्टेंस और सैनिटाइजर आदि की पूरी व्यवस्था स्कूल की ओर से की गई है और किसी भी बच्चे को कोरोना की चपेट में नहीं आने दिया जाएगा। इस बात का ध्यान रखते हुए शिक्षा दी जाएगी।
विज्ञापन
वही विद्यार्थी स्कूल आए, जिन्हें सिलेबस से संबंधित कोई दिक्कत हो : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री ने कहा कि स्कूल में वही विद्यार्थी स्कूल आए, जिन्हें सिलेबस संबंधित कोई दिक्कत हो। इसके लिए भी उसे अभिभावकों से लिखित में अनुमति लेनी होगी। इस संदर्भ में उन्होंने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को निर्देश दिये गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। अगर स्कूल के अंदर विद्यार्थियों की भीड़ हो गई तो प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा स्कूल में वो ही शिक्षक आ रहे हैं, जिनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने कहा कि लाडवा, मथाना, शाहाबाद में 90 प्रतिशत शिक्षकों का कोविड-19 टेस्ट हो चुका है, जबकि थानेसर में शिक्षकों के कोविड-19 टेस्ट कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है।