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Kurukshetra News: रकबा वही, पैदावार ज्यादा, फिर भी धान खरीद 2.13 लाख टन पीछे
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कुरुक्षेत्र। थानेसर सब्जी मंडी में बुधवार को भी इस तरह लगे रहे धान के अंबार । संवाद
सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। धान का रकबा पिछले साल जितना ही है और इस बार पैदावार भी अधिक होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद जिले में धान खरीद का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी पीछे चल रहा है। इसे सरकार की सख्ती का असर माना जाए या फिर फसल वैरिफिकेशन में रही गड़बड़ी, यह सवाल उठने लगा है।
किसानों की ओर से सरकार द्वारा प्रति एकड़ तय खरीद सीमा हटाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। सरकार ने पिछले तीन साल के रिकॉर्ड के आधार पर खरीद में ढील देने के निर्देश भी दिए हैं, लेकिन अब तक खरीद के आंकड़ों में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दे रही। जिले में इस बार भी धान का रकबा करीब 1.20 लाख हेक्टेयर है। इसमें लगभग 15 हजार हेक्टेयर में बासमती धान की खेती की गई है। बुधवार तक जिले की मंडियों में 6,50,948 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है, जबकि पिछले साल इसी दिन तक 8,63,785 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था। पिछले पूरे सीजन में 1,53,414 किसानों से करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।
इस बार धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू हुई थी, जो पिछले साल के मुकाबले चार दिन बाद है। खरीद 15 नवंबर तक जारी रहनी है। इसके बावजूद मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस बार कुल खरीद करीब साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन तक रहने की आशंका जताई जा रही है। इससे लक्ष्य को लेकर अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है।
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80 फीसदी तक हो चुकी कटाई : डॉ. नागपाल
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल के अनुसार, जिले में धान का रकबा पिछले साल के बराबर है। इस बार अब तक करीब 80 फीसदी फसल की कटाई हो चुकी है और अधिकतर धान मंडियों में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पैदावार पिछले साल से अधिक होने के कारण कुल खरीद भी ज्यादा होने की उम्मीद थी। ऐसे में खरीद के आंकड़ों में इतना अंतर चिंतित करने वाला है।
आवक के साथ खरीद भी घट रही
मंडियों में धान की आवक कम होने से अब भीड़ घटने लगी है और व्यवस्था को राहत मिल रही है। हालांकि, आवक के साथ खरीद में भी कमी दर्ज की जा रही है। बुधवार को 41,863 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जबकि दशहरा के कारण मंगलवार को 9,498 मीट्रिक टन और सोमवार को 43,514 मीट्रिक टन खरीद हुई थी। बुधवार को उठान महज छह फीसदी रहा। अब तक किसानों को 1,222 करोड़ 89 लाख 41 हजार 496 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का करीब 96 फीसदी है।
आवक में से अधिकतर धान की खरीद, उठान 79 फीसदी : डीएफएससी
डीएफएससी नरेश कुमार ने बताया कि अब तक 6,50,948 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है और उठान करीब 79 फीसदी हुआ है। उनके अनुसार, अब लगभग 20 फीसदी धान की आवक बाकी है। सीजन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद का लक्ष्य कितना हासिल हुआ। उन्होंने बताया कि इस बार खरीद पिछले साल के मुकाबले चार दिन बाद शुरू हुई थी।
खरीद में गड़बड़ी रुकी, लेकिन वैरिफिकेशन भी सही नहीं हुई : राकेश बैंस
भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने आरोप लगाया कि इस बार धान की वैरिफिकेशन में भारी गड़बड़ी रही है और बड़े क्षेत्र को कृषि योग्य नहीं दर्शाया गया। उनके अनुसार, औसतन प्रति एकड़ करीब 33 क्विंटल उपज हो रही है, जबकि सरकार ने खरीद की सीमा तय की हुई है। इससे किसानों की काफी फसल बिना बिके रह गई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी, जिस पर इस बार बाहरी धान पर नियंत्रण के चलते कुछ हद तक रोक लगी है। ऐसे में इस बार कागजों में कुल खरीद पिछले साल के मुकाबले कम दिखाई दे रही है।
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कुरुक्षेत्र। धान का रकबा पिछले साल जितना ही है और इस बार पैदावार भी अधिक होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद जिले में धान खरीद का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी पीछे चल रहा है। इसे सरकार की सख्ती का असर माना जाए या फिर फसल वैरिफिकेशन में रही गड़बड़ी, यह सवाल उठने लगा है।
किसानों की ओर से सरकार द्वारा प्रति एकड़ तय खरीद सीमा हटाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। सरकार ने पिछले तीन साल के रिकॉर्ड के आधार पर खरीद में ढील देने के निर्देश भी दिए हैं, लेकिन अब तक खरीद के आंकड़ों में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दे रही। जिले में इस बार भी धान का रकबा करीब 1.20 लाख हेक्टेयर है। इसमें लगभग 15 हजार हेक्टेयर में बासमती धान की खेती की गई है। बुधवार तक जिले की मंडियों में 6,50,948 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है, जबकि पिछले साल इसी दिन तक 8,63,785 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था। पिछले पूरे सीजन में 1,53,414 किसानों से करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।
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इस बार धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू हुई थी, जो पिछले साल के मुकाबले चार दिन बाद है। खरीद 15 नवंबर तक जारी रहनी है। इसके बावजूद मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस बार कुल खरीद करीब साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन तक रहने की आशंका जताई जा रही है। इससे लक्ष्य को लेकर अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है।
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80 फीसदी तक हो चुकी कटाई : डॉ. नागपाल
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल के अनुसार, जिले में धान का रकबा पिछले साल के बराबर है। इस बार अब तक करीब 80 फीसदी फसल की कटाई हो चुकी है और अधिकतर धान मंडियों में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पैदावार पिछले साल से अधिक होने के कारण कुल खरीद भी ज्यादा होने की उम्मीद थी। ऐसे में खरीद के आंकड़ों में इतना अंतर चिंतित करने वाला है।
आवक के साथ खरीद भी घट रही
मंडियों में धान की आवक कम होने से अब भीड़ घटने लगी है और व्यवस्था को राहत मिल रही है। हालांकि, आवक के साथ खरीद में भी कमी दर्ज की जा रही है। बुधवार को 41,863 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जबकि दशहरा के कारण मंगलवार को 9,498 मीट्रिक टन और सोमवार को 43,514 मीट्रिक टन खरीद हुई थी। बुधवार को उठान महज छह फीसदी रहा। अब तक किसानों को 1,222 करोड़ 89 लाख 41 हजार 496 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का करीब 96 फीसदी है।
आवक में से अधिकतर धान की खरीद, उठान 79 फीसदी : डीएफएससी
डीएफएससी नरेश कुमार ने बताया कि अब तक 6,50,948 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है और उठान करीब 79 फीसदी हुआ है। उनके अनुसार, अब लगभग 20 फीसदी धान की आवक बाकी है। सीजन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद का लक्ष्य कितना हासिल हुआ। उन्होंने बताया कि इस बार खरीद पिछले साल के मुकाबले चार दिन बाद शुरू हुई थी।
खरीद में गड़बड़ी रुकी, लेकिन वैरिफिकेशन भी सही नहीं हुई : राकेश बैंस
भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने आरोप लगाया कि इस बार धान की वैरिफिकेशन में भारी गड़बड़ी रही है और बड़े क्षेत्र को कृषि योग्य नहीं दर्शाया गया। उनके अनुसार, औसतन प्रति एकड़ करीब 33 क्विंटल उपज हो रही है, जबकि सरकार ने खरीद की सीमा तय की हुई है। इससे किसानों की काफी फसल बिना बिके रह गई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी, जिस पर इस बार बाहरी धान पर नियंत्रण के चलते कुछ हद तक रोक लगी है। ऐसे में इस बार कागजों में कुल खरीद पिछले साल के मुकाबले कम दिखाई दे रही है।