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नए टैक्स सिस्टम की करदाताओं ने की सराहना, बोले- अब करदाताओं को चोर नहीं समझा जाएगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 11:51 PM IST
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rsperent taxcetion sceem Feedback
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन प्रोग्राम (पारदर्शी टैक्सेशन व्यवस्था-इमानदारों को सम्मान) की लांचिंग की। फेसलेस टैक्स सिस्टम के तहत सब कुछ फेसलेस है। यानी किसी को पता नहीं चलेगा कि कौन टैक्सपेयर है और कौन आयकर अधिकारी किस टैक्सपेयर का केस देख रहा है। यानी अब जुगाड़-सिफारिश और दबाव बनाने का सिलसिला खत्म हो जाएगा। इसके तहत तीन सुविधाएं शुरू की गई हैं, जो फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर हैं। फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर अभी से लागू हो गए हैं, जबकि फेसलेस अपील 25 सितंबर से लागू होगी। इस नए सिस्टम के जरिए इमानदार टैक्सपेयर्स को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इस नए फेसलेस टैक्स सिस्टम को लेकर ईमानदार करदाताओं को राहत पहुंची है। जिले के करदाताओं का कहना है कि अब उन्हें आयकर विभाग द्वारा बेवजहर परेशान नहीं किया जाएगा। यदि करदाता को किसी प्रकार की परेशानी है तो वह अब बेझिझक आयकर विभाग में जाकर अपनी परेशानी का हल निकाल सकता है। अब करदाताओं को चोर की निगाह से भी नहीं देखा जाएगा। अब अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल है आखिर ये फेसलेस सुविधा कैसी होगी और इसमें क्या होगा।
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टैक्सपेयर को नहीं किया जाएगा परेशान : राजेश्वर गोयल
सेक्टर 17 वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राजेश्वर गोयल ने कहा कि नए फेसलेस टैक्स सिस्टम सब कुछ फेसलेस होगा। अब अधिकारियों टैक्सपेयर को बेवजह परेशान नहीं करेंगे। यह सिस्टम बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था। अब तक टैक्स संबंधित मामलों में जिले का आयकर विभाग की जांच करता था, लेकिन अब फेसलेस असेस्मेंट में किसी भी अन्य शहर या राज्य का अधिकारी कहीं भी जांच कर सकता है। जांच के लिए अधिकारी का सेलेक्शन भी कंप्यूटर द्वारा खुद किया जाएगा।
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नए सिस्टम में मनवीय दखल को कम किया जाएगा : पीएन गौतम
अधिवक्ता पीएन गौतम ने कहा कि नए सिस्टम में मानवीय दखल को कम किया जाएगा और ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। जैसे कौन सा अधिकारी किस व्यक्ति का केस देखेगा अब ये भी कंप्यूटर के जरिए ही तय होगा। अभी जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर का टैक्स डिपार्टमेंट हमारी टैक्स से जुड़ी सभी बातों को हैंडल करता है। स्क्रूटनी हो, नोटिस हो, सर्वे हो या फिर जब्ती हो, इसमें उसी शहर के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की, आयकर अधिकारी की मुख्य भूमिका रहती है, लेकिन नए सिस्टम में हो सकता है कि जिस टैक्स अधिकारी किसी दूसरे राज्य का हो। ये किसी को पहले से पता नहीं होगा कि कौन सा अधिकारी किसका केस हैंडल करने जा रहा है। इतना ही नहीं अब टैक्सपेयर को कोई चोर की निगाह से नहीं देखेगा। नए टैक्स सिस्टम से आयकर विभाग और आयकरदाता के बीच एक अच्छा संबंध स्थापित होगा, जिसमें आयकरदाता बेझिझक आयकर विभाग में जाकर अपनी समस्या का समाधान करा सकेगा।
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टैक्सपेयर की प्रतिष्ठा को नहीं पहुंचेगी ठेस : अमरजीत
आढ़ती अमरजीत सिंह इनकम टैक्स विभाग अब टैक्सपेयर की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचा सकेगा। आयकर विभाग को अब टैक्सपेयर की प्रतिष्ठा का, संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा। अब टैक्सपेयर की बात पर विश्वास करना होगा, डिपार्टमेंट उसको बिना किसी आधार के ही शक की नजर से नहीं देख सकता।
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