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मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान की जिम्मेदारी एचएसजीएमसी को सौंपी जाए : झींडा
Sat, 19 Jul 2025 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 19 Jul 2025 02:41 AM IST
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शाहाबाद। मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेशों के अनुसार हरियाणा कमेटी के अधीन आना चाहिए। फैसले में लिखा है कि हरियाणा राज्य की सीमा में आने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सभी चल-अचल संपत्तियां अब हरियाणा कमेटी के अधीन मानी जाएंगी। इसका पालन करते हुए इस संस्थान की सभी जिम्मेदारी एचएसजीएमसी को सौंपी जानी चाहिए। हरियाणा कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने यह जानकारी दी। वे शुक्रवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब में पहुंचे थे, जहां संगत के साथ खुलकर चर्चा की। उन्होंने इस मुद्दे पर टकराव से बचने और पंथ में एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वह इस संबंध में एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर विनम्रतापूर्वक अनुरोध करेंगे। अगर हम इस विषय पर आपसी संवाद और सहयोग से समाधान निकालते हैं, तो इससे संगत को एकजुटता और समर्पण का संदेश मिलेगा। आज पंथ की सेवा में टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है।
झींडा ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो हरियाणा कमेटी इस मुद्दे पर कानूनी तरीका अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन प्राथमिकता पंथ की एकता और आपसी सहमति से समाधान निकालने की होगी। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में जब हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन हुआ था, तब एसजीपीसी ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस लंबी कानूनी लड़ाई में दोनों पक्षों का बहुमूल्य समय और धन व्यर्थ हुआ, जिसका कोई लाभ संगत को नहीं मिला। झिंडा ने कहा कि अब समय है कि संगत को फिर से किसी विवाद में न झोंका जाए और सभी सिख संस्थाएं अपनी-अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों का सम्मान करते हुए सेवा करें।
प्रधान झींडा के समक्ष सुखमीत सिंह नगला, करतार सिंह दामली, काला आहूजा, राजकुमार आहूजा, साहिब सिंह सहित संगत के कई सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की और शिकायतें भी दर्ज कार्रवाई। प्रधान ने भरोसा देते है कि हर शिकायत और सुझाव पर कार्रवाई अवश्य होगी। इस मौके शमशेर सिंह, लवप्रीत सिंह, गुरवंत सिंह, नरिंदर सिंह भिंडर, सुखवंत सिंह बग्गी, सुरजीत सिंह जुनेजा, प्रीतम सिंह शिंगारी, हरजीत राणा, बलविंदर सिंह और जगजीत सिंह मक्क्ड़ सहित संगत उपस्थित रही। संवाद
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झींडा ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो हरियाणा कमेटी इस मुद्दे पर कानूनी तरीका अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन प्राथमिकता पंथ की एकता और आपसी सहमति से समाधान निकालने की होगी। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में जब हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन हुआ था, तब एसजीपीसी ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस लंबी कानूनी लड़ाई में दोनों पक्षों का बहुमूल्य समय और धन व्यर्थ हुआ, जिसका कोई लाभ संगत को नहीं मिला। झिंडा ने कहा कि अब समय है कि संगत को फिर से किसी विवाद में न झोंका जाए और सभी सिख संस्थाएं अपनी-अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों का सम्मान करते हुए सेवा करें।
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प्रधान झींडा के समक्ष सुखमीत सिंह नगला, करतार सिंह दामली, काला आहूजा, राजकुमार आहूजा, साहिब सिंह सहित संगत के कई सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की और शिकायतें भी दर्ज कार्रवाई। प्रधान ने भरोसा देते है कि हर शिकायत और सुझाव पर कार्रवाई अवश्य होगी। इस मौके शमशेर सिंह, लवप्रीत सिंह, गुरवंत सिंह, नरिंदर सिंह भिंडर, सुखवंत सिंह बग्गी, सुरजीत सिंह जुनेजा, प्रीतम सिंह शिंगारी, हरजीत राणा, बलविंदर सिंह और जगजीत सिंह मक्क्ड़ सहित संगत उपस्थित रही। संवाद
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