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तीन पीढ़ियों ने एक साथ शरीर दान का संकल्प लिया

Mon, 04 Aug 2014 12:44 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 04 Aug 2014 12:44 AM IST
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Resolved to donate a body with three generations
मोहन नगर चौक निवासी एक पिता-पुत्र व पोते ने अपना शरीर दान करने का संकल्प लिया। वहीं आकाशवाणी कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ उद्घोषक अनिल भटनागर ने अपने पुत्र अंकुर भटनागर के साथ मिलकर पीजीआई चंडीगढ़ को शरीर दान किया।
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लोक स्वराज जनसेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुबीर गर्ग ने बताया कि उनके ट्रस्ट ने अब तक 50 लोगों को शरीर दान करने का संकल्प दिलाया है।

वे स्वयं 6 वर्ष पूर्व शरीर दान करने का संकल्प ले चुके हैं। अब वे लोगों को भी शरीर दान करने की प्रेरणा दे रहे हैं। इसी प्रेरणा के चलते रविवार को कुरुक्षेत्र के मोहननगर में रहने वाले सुरेश मंगला, उनके पुत्र प्रवीन मंगला और पौत्र दिपेश मंगला ने शरीर दान करने का संकल्प लिया।
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रघुबीर गर्ग ने शरीर दान करने संबंधी फॉर्म भराने के बाद बताया कि तीनों पीढ़ियों के इन जांबाजों ने शरीर दान जनहित में किया है।

उनकी सोच है कि शरीर के अगर कोई अंग किसी के काम आ सके तथा उनके शरीर से मेडिकल के विद्यार्थी रिसर्च कर कोई नई खोज कर सकें, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं है।
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गर्ग ने बताया कि मंगला परिवार अग्रसेन चौक पर व्यवसायिक संस्थान चलाता है। ट्रस्ट द्वारा अब शरीर दान का संकल्प दिलाने वाले लोगों की संख्या 53 हो रही है।

वहीं दूसरी ओर कुरुक्षेत्र के सेक्टर-8 निवासी अनिल भटनागर ने बताया कि हम अपनी प्राचीन मान्यताओं का पालन पूरी निष्ठा के साथ करने में लगे हैं।

हमारा ये भी नैतिक कर्तव्य है कि हम पर्यावरण की सुरक्षा और समाज को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाएं। इसी के चलते उन्होंने अपने पुत्र अंकुर भटनागर के साथ अपना शरीर दान करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि पेड़ों को कटने से बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को सुरक्षित करने और गंगा जैसी पवित्र नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का कार्य भी कर रहे हैं।

उनका मानना है कि संस्कार प्रक्रिया के दौरान जलाई जाने वाली लकड़ी कई पेड़ों को काट कर लाई जाती है। इतना ही नहीं इस प्रक्रिया के दौरान पर्यावरण भी काफी प्रभावित होता है।

संस्कार प्रक्रिया के अगले चरण में गंगा जैसी पवित्र नदियाें में डाली गई सामग्री कई कारणों से नदियों के पवित्र जल को प्रदूषित करती है। इन्हीं कई बातों पर अपने परिवार के बीच गहन विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने अपना शरीर दान करने का फैसला लिया है।

परिवार सहित नेत्र दान का भी संकल्प

अनिल भटनागर ने बताया कि बीते वर्ष पूरे परिवार, जिसमें वह स्वयं, उनके पुत्र अंकुर, पत्नी साधना भटनागर और पुत्री अंकिता ने करनाल के माधव नेत्र बैंक को अपनी आंखें दान देने की घोषणा करते हुए सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी की हैं।


भटनागर का कहना है कि उनके सभी पारिवारिक सदस्यों की यही सोच है कि उनके शरीर का कोई भी हिस्सा अगर किसी अन्य के काम आ जाए तो इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है।
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