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गीतड़ू लोकनृत्य को देख याद आया कश्मीर
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 15 Dec 2015 12:09 AM IST
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तेरहां
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ताली लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर लोक कलाकारों ने राजस्थान, तो गीतड़
लोकनृत्य को देखकर पर्यटकों को कश्मीर की याद आ गई। लोक कलाकारों ने तेरहां
ताली लोकनृत्य के माध्यम से भगवान श्रीराम की आरती की।
गीता जयंती समारोह क्राफ्ट मेले के चौथे दिन सोमवार को ब्रह्मसरोवर के महिला घाट पर दोपहर में पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। सबसे पहले राजस्थान के लोक कलाकारों के नए ग्रुप ने विशेष तौर पर तेरहां ताली, घूमर और भव्यी लोक नृत्य पेश किया।
कलाकारों ने अपने पांव पर तेरहां टल्लियां बांधकर, चूड़ा पहन कर और सिर पर छोटी-छोटी तीन हांडियां सजाकर नृत्य किया। इन कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण और राम की आराधना के होने वाली आरती भी पेश की। इसके बाद कश्मीर के इन लोक कलाकारों ने गीतड़ू लोक नृत्य के माध्यम से दर्शकों को बताने का प्रयास किया कि पुराने समय में जब लोगों के पास संदेश पहुंचाने का कोई साधन नहीं होता था, तो वे किस प्राकर कबूतरों के माध्यम से अपना संदेश पहुंचाते थे।
इस लोक नृत्य में कश्मीर का ग्रामीण जीवन स्तर भी दर्शाने का प्रयास किया गया। मंच पर हिमाचल के चंबा जिले से गद्दी और पंजाब का भांगड़ा और उत्तराखंड का छबेली नृत्य भी पेश किया गया। इस कार्यक्रम के मंच का संचालन चन्नी ने किया। एनजेडसीसी के अधिकारी राजेश बस्सी ने बताया कि सोमवार को नए कलाकारों के ग्रुप ने प्रस्तुति दी है।
गीता जयंती समारोह क्राफ्ट मेले के चौथे दिन सोमवार को ब्रह्मसरोवर के महिला घाट पर दोपहर में पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। सबसे पहले राजस्थान के लोक कलाकारों के नए ग्रुप ने विशेष तौर पर तेरहां ताली, घूमर और भव्यी लोक नृत्य पेश किया।
कलाकारों ने अपने पांव पर तेरहां टल्लियां बांधकर, चूड़ा पहन कर और सिर पर छोटी-छोटी तीन हांडियां सजाकर नृत्य किया। इन कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण और राम की आराधना के होने वाली आरती भी पेश की। इसके बाद कश्मीर के इन लोक कलाकारों ने गीतड़ू लोक नृत्य के माध्यम से दर्शकों को बताने का प्रयास किया कि पुराने समय में जब लोगों के पास संदेश पहुंचाने का कोई साधन नहीं होता था, तो वे किस प्राकर कबूतरों के माध्यम से अपना संदेश पहुंचाते थे।
इस लोक नृत्य में कश्मीर का ग्रामीण जीवन स्तर भी दर्शाने का प्रयास किया गया। मंच पर हिमाचल के चंबा जिले से गद्दी और पंजाब का भांगड़ा और उत्तराखंड का छबेली नृत्य भी पेश किया गया। इस कार्यक्रम के मंच का संचालन चन्नी ने किया। एनजेडसीसी के अधिकारी राजेश बस्सी ने बताया कि सोमवार को नए कलाकारों के ग्रुप ने प्रस्तुति दी है।