{"_id":"67a66bf15b5fc608ec045bc4","slug":"relatives-consoling-the-families-of-deported-youth-kurukshetra-news-c-45-1-kur1001-131120-2025-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: डिपोर्ट हुए युवाओं के परिवारों को ढांढस बंधा रहे रिश्तेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: डिपोर्ट हुए युवाओं के परिवारों को ढांढस बंधा रहे रिश्तेदार
विज्ञापन
इस्माईलाबाद। अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे रॉबिन सिंह व खुशप्रीत सिंह के घर सांत्वना देने के लिए शुक्रवार को भी रिश्तेदारों सहित शहर व क्षेत्र के लोगों का तांता लगा रहा। हर कोई पीड़ित परिवार को ढांढस बांधता दिखाई दिया।
पीड़ित परिवारों द्वारा फिलहाल संबंधित एजेंटों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई लेकिन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने पीड़ित परिवारों से मिलकर शिकायत देने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
बता दें कि शहरवासी रॉबिन सिंह व चम्मूकलां का खुशप्रीत सिंह करीब आठ महीने पहले सपने संजोकर बेहतर भविष्य के लिए 45 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका के लिए रवाना हुए थे।
विज्ञापन
एजेंट ने उन्हें एक माह के भीतर अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था पर लेकिन उन्हें फ्लाइट से गुआना उतार दिया और वहां से उन्हें माफिया द्वारा कभी पैदल तो कभी जंगल के रास्ते, समुद्र के रास्ते से करीब छह महीने बाद अमेरिका में दाखिल करवाया। इस दौरान उन्हें विभिन्न यातनाएं झेलनी पड़ी और अमेरिका में दाखिल होते ही आर्मी उन्हें पकड़कर कैंप में ले गई और वहां भी उन्हें काफी यातनाएं झेलनी पड़ी और उन्हें बिना बताए हथकड़ियां व चेनों से बांधकर आर्मी के विमान से भारत डिपोर्ट कर दिया।
विज्ञापन
पीड़ित परिवारों द्वारा फिलहाल संबंधित एजेंटों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई लेकिन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने पीड़ित परिवारों से मिलकर शिकायत देने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
बता दें कि शहरवासी रॉबिन सिंह व चम्मूकलां का खुशप्रीत सिंह करीब आठ महीने पहले सपने संजोकर बेहतर भविष्य के लिए 45 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका के लिए रवाना हुए थे।
विज्ञापन
एजेंट ने उन्हें एक माह के भीतर अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था पर लेकिन उन्हें फ्लाइट से गुआना उतार दिया और वहां से उन्हें माफिया द्वारा कभी पैदल तो कभी जंगल के रास्ते, समुद्र के रास्ते से करीब छह महीने बाद अमेरिका में दाखिल करवाया। इस दौरान उन्हें विभिन्न यातनाएं झेलनी पड़ी और अमेरिका में दाखिल होते ही आर्मी उन्हें पकड़कर कैंप में ले गई और वहां भी उन्हें काफी यातनाएं झेलनी पड़ी और उन्हें बिना बताए हथकड़ियां व चेनों से बांधकर आर्मी के विमान से भारत डिपोर्ट कर दिया।