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भीतर जाके मां ने बता दे, दिखे बटेउ आवेगा...

Fri, 30 Oct 2015 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Fri, 30 Oct 2015 12:27 AM IST
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आरके सदन में गुरुवार को युवा कलाकारों ने हरियाणा की लोक संस्कृति का बखान किया। कलाकारों ने हरियाणा के रीति-रिवाज, त्योहारों पर गाए जाने वाले गीत पेश किए।
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लोकगीतों के माध्यम से समाज में व्याप्त समस्याओं के आरे मेें बताया। यह प्रस्तुति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित रत्नावली महोत्सव के तीसरे दिन कलाकारों ने हरियाणवी समूह गायन विधा के तहत दी।
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इसमें कुल नौ टीमों ने भाग लिया। इसमें बीपीआर कॉलेज कुरुक्षेत्र, केएम गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना, सीआर किसान कॉलेज जींद, पीसीएलएस गवर्नमेंट कॉलेज करनाल, यूसीके कृुरुक्षेत्र, आर्य पीजी कॉलेज पानीपत, आरकेएसडी कैथल,  आईबीपीजी कॉलेज पानीपत की टीमें शामिल थीं।
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पहली प्रस्तुति बीपीआर कॉलेज ने मैं क्यूं करदी पर आई क्यूं देदी जुदाई की दी। दूसरी प्रस्तुति यूसीके कुरुक्षेत्र ने भीतर जाके मां ने बता  दे, दिखे बटेउ आवेगा दी की दी। इसके बाद आरकेएसडी कॉलेज कैथल ने हमारे बागां में बोले ननदी मोर पेश किया।

प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के सदस्य पंडित सुरेश गंदर्भ, ओमप्रकाश चहल आदि मौजूद थे।

रागिनी और हरियाणवी फैशन शो के बिखरे रंग
केयू के रत्नावली उत्सव-2015 का तीसरा दिन हरियाणवी आर्केस्ट्रा, हरियाणवी ग्रुप सांग, चौपाल, कविता पाठ  प्रतियोगिताओं के नाम रहा। ऑडिटोरियम हॉल में हरियाणवी आर्केस्ट्रा, चौपाल प्रतियोगिता में 25 से अधिक टीमों ने भाग लिया। आरके सदन में हरियाणवी ग्रुप सांग में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ओपन एयर थियेटर में रागिनी और वन एक्ट प्ले प्रतियोगिताएं भी हुईं।

सीनेट हॉल में हुई कविता पाठ प्रतियोगिता में प्रदेशभर से आए प्रतिभागियों ने रचनाएं पेश कीं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिलाओं  की सुरक्षा, कन्या भू्रण हत्या, मोबाईल का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार सहित  हरियाणवीं संस्कृति पर युवाओं ने अपने उद्गार प्रकट किए।

सबसे ज्यादा प्रतिभागियों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और महिला सुरक्षा पर प्रतिभागियों ने विचार व्यक्त किए। इस प्रतियोगिता में 30 से अधिक टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी कॉलेज कुरुक्षेत्र के छात्र मनदीप ने खो गई चौपाल, शाह सतनाम जी पीजी कॉलेज ब्बॉयज सिरसा के संजीत ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, हिंदू कन्या महाविद्यालय की छात्रा रेनू, सीआर किसान कॉलेज जींद के विशाल, आरकेएसडी कॉलेज कैथल की पायल और रिंकी, आईजी कॉलेज पानीपत की पूनम, यूनिवर्सिटी कॉलेज के संदीप, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के नरेंद्र और दीपक ने प्रस्तुति दी।

मन्नै मेरा हरयाणा दे दो रै भाण के फेरे हो जां गे..., के जीणा जाणा रह गया रै, अब तो मररणा मराणा रह गया रै..., दया धरम  का मान खो गया..., यूटीडी के प्रतिभागियों ने शहींदा तै माफी... जैसी कविताएं पेश कीं। निर्णायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार ओमकार चौधरी, डॉ. श्याम वशिष्ठ, डॉ. आर. वत्स ने भूमिका निभाई।

रत्नावली में आज
रत्नावली महोत्सव के अंतिम दिन ऑडिटोरियम हॉल में प्रात: 10 बजे हरियाणवी ग्रुप डांस, ओपन एयर थियेटर में रागिनी कंपीटिशन होगा।

रोहतक के अहलावत का स्टॉल बना रत्नावली उत्सव में आकर्षण का केंद्र
पेड़ की सूखी जड़ों को लोगों के लिए बेकार होती हैं। लेकिन, रोहतक के भगवान सिंह अहलावत ने इन बेकार जड़ों में भी जान फूंक दी है। हालांकि, भगवान सिंह को अफसोस है कि वह चंडीगढ़ में बने रोक गार्डन की तर्ज पर हरियाणा में रूट गार्डन नहीं बना सके।

रत्नावली उत्सव में लगे क्राफ्ट मेले में आए भगवान सिंह अहलावत ने बताया कि वर्ष 1981 में रोहतक में एक पेंटिंग प्रदर्शनी के दौरान कलाकारों से हुए मतभेद ने आज उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। वहां विवाद के बाद उन्होंने पेड़ की बेजान जड़ों को नया रूप देने की ठान ली। प्रदेश और देश की कई प्रदर्शनियों में भगवान सिंह अपनी कलाकृतियां पेश कर चुके हैं।

उन्हें कई बार 15 अगस्त और 26 जनवरी पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वे हरियाणवी लेखन में भी रुचि रखते हैं। उन्हें हरियाणवी लेखन में खोजी जाट मेहर सिंह अवार्ड और ईफा संस्था ने कर्मयोगी सम्मान प्रदान किया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी भगवान सिंह ने बताया कि अब बीमारी की वजह से वह ज्यादा काम नहीं कर पाते। भगवान सिंह आर्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं।

फिजा में गूंजे हरियाणवी वाद्य यंत्रों की तान
ढोलक, डेरू, चिमटा, बांसुरी, बीन आदि हरियाणवी वाद्य यंत्रों से निकली धुनों ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की फिजा को मदमस्त कर दिया।

उनकी तान पर युवा कलाकारों ने जमकर डांस किया। इस दौरान कलाकारों ने युवा पीढ़ी को हरियाणा के वाद्य यंत्रों को सहेजकर रखने का संदेश भी दिया। रत्नावली के तीसरे दिन सातों मंचों पर हरियाणा की असली सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली।

रत्नावली युवा महोत्सव के तीसरे दिन मुख्य मंच पर हरियाणवी आर्केस्ट्रा की प्रस्तुति वीरवार सुबह के सत्र में शुरू हुई। इसके शुरू होते ही सभागार के बाहर चहलकदमी कर रहे लोग भी सभागार की तरफ आकर्षित हो गए।

डीएवी गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर, केएम गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना, भगवान परशुराम कॉलेज कुरुक्षेत्र, आर्य कॉलेज पानीपत, एसडी कॉलेज, यूटीडी, आरकेएसडी कॉलेज और  मटकमाजरी कॉलेज के कलाकार प्रस्तुति देने पहुंचे। प्रत्येक टीम ने हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े वाद्य यंत्रों की शानदार प्रस्तुति दी।


इसी मंच पर हरियाणवी चौपाल, हरियाणवी फोक कोस्ट्यूम और हरियाणवी फैशन शो में भी युवा कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। आरके सदन मंच पर हरियाणवी ग्रुप सॉन्ग, ओपन एयर थियेटर में रागिनी और वन एक्ट प्ले, सीनेट हॉल में कविता पाठ और हरियाणवी क्विज की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। खुले मंच पर सांग कंपीटिशन,  क्रश हॉल में ऑन द स्पॉट पेंटिंग और प्रदर्शनी, धरोहर में हरियाणवी सिंगर ने प्रस्तुति दी।
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