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प्रदेश की लोक-संस्कृति, कला और परंपरा को सहेजने का मंच है रत्नावली महोत्सव : मुख्यमंत्री
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कुरुक्षेत्र। पद्मश्री संत लाल को सम्मानित करते मुख्यमंत्री नायब सैनी। संवाद
कुरुक्षेत्र। रत्नावली महोत्सव प्रदेश की लोक-संस्कृति, कला और परंपरा को सहेजने का विशेष मंच है। यह उत्सव गौरवशाली विरासत, हमारी माटी की महक और लोक जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। यह विद्यार्थियों को न केवल अपने व्यक्तित्व को निखारने का अवसर देता है बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने की भावना से भी ओतप्रोत करता है। केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि यह हमारी जड़ों और पहचान को पुनर्जीवित करने का माध्यम है।
ये विचार मुख्यमंत्री नायब सैनी ने व्यक्त किए। इससे पहले उन्होंने महोत्सव का शुभारंभ किया और उनके समक्ष छात्र-छात्राओं ने रसीया व लूर नृत्यों की प्रस्तुति भी दी। महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर ढोल नगाड़ों की धुनों से गूंज उठा। महोत्सव में 31 अक्तूबर तक छह मंचों पर 3500 कलाकार 34 विधाओं में जलवा बिखरेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति में सादगी, स्वाभिमान और देशभक्ति का भाव रचा-बसा है। रत्नावली महोत्सव इन्हीं मूल्यों का उत्सव है और इस मंच से निकलने वाले कलाकार न केवल प्रदेश बल्कि देश का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हैं।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें ज्ञान और कौशल देती है लेकिन संस्कृति हमें संस्कार और पहचान देती है। उन्होंने कहा कि वेशभूषा, नृत्य, लोकगीत, हरियाणवी सांग और रागनी, यहां बनाई गईं झोपड़ियां ये सब केवल प्रदर्शन मात्र नहीं हैं, ये हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि युवा अपनी संस्कृति व विरासत से भी जुड़े रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन हरियाणवी कला व संस्कृति को बचाने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकारों को हरियाणा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाता है।
वहीं हरियाणवी थियेटर को जीवंत करने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकार को व हरियाणवी नृत्य में हर वर्ष हरियाणा रत्न पुरस्कार दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान पद्मश्री संतराम देशवाल व कला एवं संस्कृति को समर्पित अनूप लाठर को सम्मानित किया। वहीं हरियाणवी बोली में प्रकाशित रत्नावली टाइम्स पत्रिका का भी विमोचन किया। इस दौरान कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने भी संबोधित किया।
34 विधाओं में 3500 कलाकार देंगे प्रस्तुति
विश्वविद्यालय में पिछले 38 वर्षों से रत्नावली महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव को हरियाणवी संस्कृति का महाकुंभ कहा जाता है। इसमें अहीर, बांगर, बागर, खादर, कोरवी, मेवाती जैसी विभिन्न बोलियों की 34 विधाओं में लगभग 3500 युवा कलाकार भाग ले रहे हैं।
महोत्सव में हर वर्ष नए-नए प्रयास कर युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले वर्षों में पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचवाओ, हरियाणा के रीति-रिवाजों को प्रतियोगिता का रूप दिया गया। सेल्फी विद हरियाणवी गत वर्ष का अनूठा प्रयास रहा है।
कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला में दे सकते हैं पर्यटन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का भी प्रयास है कि शिक्षा और संस्कृति के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करें। संस्कृति और पर्यटन एक-दूसरे के पूरक हैं। जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हैं तो हम दुनियाभर से पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला और अन्य कई ऐसे स्थान हैं, जहां हम सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं।
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ये विचार मुख्यमंत्री नायब सैनी ने व्यक्त किए। इससे पहले उन्होंने महोत्सव का शुभारंभ किया और उनके समक्ष छात्र-छात्राओं ने रसीया व लूर नृत्यों की प्रस्तुति भी दी। महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर ढोल नगाड़ों की धुनों से गूंज उठा। महोत्सव में 31 अक्तूबर तक छह मंचों पर 3500 कलाकार 34 विधाओं में जलवा बिखरेंगे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति में सादगी, स्वाभिमान और देशभक्ति का भाव रचा-बसा है। रत्नावली महोत्सव इन्हीं मूल्यों का उत्सव है और इस मंच से निकलने वाले कलाकार न केवल प्रदेश बल्कि देश का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हैं।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें ज्ञान और कौशल देती है लेकिन संस्कृति हमें संस्कार और पहचान देती है। उन्होंने कहा कि वेशभूषा, नृत्य, लोकगीत, हरियाणवी सांग और रागनी, यहां बनाई गईं झोपड़ियां ये सब केवल प्रदर्शन मात्र नहीं हैं, ये हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि युवा अपनी संस्कृति व विरासत से भी जुड़े रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन हरियाणवी कला व संस्कृति को बचाने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकारों को हरियाणा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाता है।
वहीं हरियाणवी थियेटर को जीवंत करने में आजीवन योगदान करने वाले कलाकार को व हरियाणवी नृत्य में हर वर्ष हरियाणा रत्न पुरस्कार दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान पद्मश्री संतराम देशवाल व कला एवं संस्कृति को समर्पित अनूप लाठर को सम्मानित किया। वहीं हरियाणवी बोली में प्रकाशित रत्नावली टाइम्स पत्रिका का भी विमोचन किया। इस दौरान कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने भी संबोधित किया।
34 विधाओं में 3500 कलाकार देंगे प्रस्तुति
विश्वविद्यालय में पिछले 38 वर्षों से रत्नावली महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव को हरियाणवी संस्कृति का महाकुंभ कहा जाता है। इसमें अहीर, बांगर, बागर, खादर, कोरवी, मेवाती जैसी विभिन्न बोलियों की 34 विधाओं में लगभग 3500 युवा कलाकार भाग ले रहे हैं।
महोत्सव में हर वर्ष नए-नए प्रयास कर युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले वर्षों में पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचवाओ, हरियाणा के रीति-रिवाजों को प्रतियोगिता का रूप दिया गया। सेल्फी विद हरियाणवी गत वर्ष का अनूठा प्रयास रहा है।
कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला में दे सकते हैं पर्यटन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का भी प्रयास है कि शिक्षा और संस्कृति के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करें। संस्कृति और पर्यटन एक-दूसरे के पूरक हैं। जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हैं तो हम दुनियाभर से पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला और अन्य कई ऐसे स्थान हैं, जहां हम सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं।

कुरुक्षेत्र। पद्मश्री संत लाल को सम्मानित करते मुख्यमंत्री नायब सैनी। संवाद