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Kurukshetra News: फसलों के नुकसान पर विभागों में रार
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। पिछले सप्ताह हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसलों में हुई मार पर रार छिड़ गई है। किसान दो विभागों के बीच फंस गए हैं, जिसके चलते वे अपने नुकसान की शिकायत भी पोर्टल पर नहीं कर पा रहे हैं। अब दोबारा सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट भी मैदान में उतर आया है, जिसने जिला उपायुक्त को पत्र लिखकर पोर्टल खोले जाने व नुकसान की भरपाई कराए जाने की मांग की है।
बता दें कि पिछले सप्ताह में बारिश व ओलावृष्टि हुई थी, जिसका सबसे ज्यादा असर बाबैन, शाहाबाद एरिया में दिखाई पड़ा था। इस पर कृषि विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए सर्वेक्षण कराया, जिसमें 45 हजार एकड़ फसल में नुकसान की आशंका जताई गई।
इसमें सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल में माना गया, जिसका रकबा 28 हजार 500 एकड़ है। वहीं 10 हजार एकड़ सूरजमुखी व 6500 एकड़ सरसों की फसल में भी नुकसान की आशंका जताई गई। यहां तक कि जिला उपायुक्त के मार्फत कृषि विभाग ने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी भेज दी। वहीं राजस्व विभाग की ओर से तहसील स्तर पर करवाए गए सर्वेक्षण में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान की आशंका नहीं जताई गई। तय मापदंड 25 फीसदी से भी नीचे नुकसान की संभावना रही।
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ऐसे में सरकार ने इसमें नुकसान नहीं माना तो क्षतिपूर्ति पोर्टल भी नहीं खोला गया। बुधवार को जिला उपायुक्त ने दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की तो पूरे विस्तार से चर्चा भी की। वहीं दोबारा सर्वेक्षण कराए जाने का भी फैसला लिया गया।
जल्द खोला जाए क्षतिपूर्ति पोर्टल : भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रवक्ता राकेश बैंस ने उपायुक्त को पत्र लिखकर ई–क्षतिपूर्ति पोर्टल जल्द खोले जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि 28 फरवरी और एक मार्च को हुई वर्षा व ओलावृष्टि के कारण जिला अंबाला की सीमा के साथ लगते तहसील शाहाबाद के गांव दाऊ माजरा, सम्बलखी, लंडी, कल्याणा, रामनगर, पट्टी काकड़ा व पट्टी तगड़ा में फसलों में भारी नुकसान हुआ है। इसलिए इन गांवों में स्पेशल गिरदावरी कराई जाए व खराब हुई फसलों का मुआवजा दिलाया जाए।
राकेश ने कहा कि पोर्टल न खोले जाने के पीछे तहसील स्तर पर नुकसान न होने की रिपोर्ट दिया जाना ही मुख्य कारण माना जा रहा है जबकि उक्त गांवों के किसानों को फसलों में भारी नुकसान हुआ है और किसान अपनी शिकायत भी दर्ज नहीं करवा पा रहे। जबकि सरकार द्वारा पोर्टल पर खराबा दर्ज करवाने की अंतिम तारीख 10 मार्च की घोषणा की हुई है।
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। पिछले सप्ताह हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसलों में हुई मार पर रार छिड़ गई है। किसान दो विभागों के बीच फंस गए हैं, जिसके चलते वे अपने नुकसान की शिकायत भी पोर्टल पर नहीं कर पा रहे हैं। अब दोबारा सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट भी मैदान में उतर आया है, जिसने जिला उपायुक्त को पत्र लिखकर पोर्टल खोले जाने व नुकसान की भरपाई कराए जाने की मांग की है।
बता दें कि पिछले सप्ताह में बारिश व ओलावृष्टि हुई थी, जिसका सबसे ज्यादा असर बाबैन, शाहाबाद एरिया में दिखाई पड़ा था। इस पर कृषि विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए सर्वेक्षण कराया, जिसमें 45 हजार एकड़ फसल में नुकसान की आशंका जताई गई।
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इसमें सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल में माना गया, जिसका रकबा 28 हजार 500 एकड़ है। वहीं 10 हजार एकड़ सूरजमुखी व 6500 एकड़ सरसों की फसल में भी नुकसान की आशंका जताई गई। यहां तक कि जिला उपायुक्त के मार्फत कृषि विभाग ने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी भेज दी। वहीं राजस्व विभाग की ओर से तहसील स्तर पर करवाए गए सर्वेक्षण में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान की आशंका नहीं जताई गई। तय मापदंड 25 फीसदी से भी नीचे नुकसान की संभावना रही।
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ऐसे में सरकार ने इसमें नुकसान नहीं माना तो क्षतिपूर्ति पोर्टल भी नहीं खोला गया। बुधवार को जिला उपायुक्त ने दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की तो पूरे विस्तार से चर्चा भी की। वहीं दोबारा सर्वेक्षण कराए जाने का भी फैसला लिया गया।
जल्द खोला जाए क्षतिपूर्ति पोर्टल : भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रवक्ता राकेश बैंस ने उपायुक्त को पत्र लिखकर ई–क्षतिपूर्ति पोर्टल जल्द खोले जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि 28 फरवरी और एक मार्च को हुई वर्षा व ओलावृष्टि के कारण जिला अंबाला की सीमा के साथ लगते तहसील शाहाबाद के गांव दाऊ माजरा, सम्बलखी, लंडी, कल्याणा, रामनगर, पट्टी काकड़ा व पट्टी तगड़ा में फसलों में भारी नुकसान हुआ है। इसलिए इन गांवों में स्पेशल गिरदावरी कराई जाए व खराब हुई फसलों का मुआवजा दिलाया जाए।
राकेश ने कहा कि पोर्टल न खोले जाने के पीछे तहसील स्तर पर नुकसान न होने की रिपोर्ट दिया जाना ही मुख्य कारण माना जा रहा है जबकि उक्त गांवों के किसानों को फसलों में भारी नुकसान हुआ है और किसान अपनी शिकायत भी दर्ज नहीं करवा पा रहे। जबकि सरकार द्वारा पोर्टल पर खराबा दर्ज करवाने की अंतिम तारीख 10 मार्च की घोषणा की हुई है।