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गरीब बच्चों को मुफ्त में सिखाती हैं रंजना कत्थक
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Tue, 31 May 2016 07:00 PM IST
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रंजना
- फोटो : amar ujala
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स्कूलों में पढने वाले गरीब बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास पैदा करने के लिए उन्हें कत्थक नृत्य की मदद दी जा रही है। यह काम सेक्टर 2 में रहने वाले कत्थक नृत्यांगना रंजना मुफ्त में कर रही है। रंजना लंबे वक्त से इन गरीब बच्चों को कत्थक नृत्य की टे्रनिंग दे रही है। उनका मानना है कि नृत्य से बच्चों में गजब का आत्मविश्वास पैदा हो सकता है। जो उनके भविष्य में काम आएगा।
सेक्टर 2 निवासी कत्थक नृत्यांगना रंजना ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से कत्थक में पीजी किया इसके बाद इसे प्रोफेशनल तौर पर अपनाया भी। वह कहती है कत्थक सीखने में मेहनत के साथ वक्त और पैसा भी खर्च करना पड़ता है। ऐसे ही एक दिन किसी सरकारी स्कूल में जाना हुआ वहां की बच्चियों को देखकर लगा कि इन्हें अभी से बैसिक सिखाए जा सकते हैं। ताकि इनके भविष्य में काम आ सके।
बस यही से इन बच्चों को कत्थक सिखाने की ठानी। वह बताती हैं कि मैं एक निजी स्कूल में कत्थक टीचर भी रही हूं। कई निजी स्कूलों में इसके लिए अलग से फीस भी ली जाती है।
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ऐसे में सरकारी स्कूल में पढने वाले बच्चों के लिए यह एक बस सपने की तरह ही है। इन बच्चों के पास न ही प्रतिभा की कमी है, न ही लगन की। ऐसे में यह काम और आसान हो गया। रंजना ने बताया कि दो दिन पहले ही गांव पलवल के राजकीय हाई स्कूल में दो दिवसीय कार्यशाला लगाई। जिसमें कई छात्राएं शामिल हुई। स्कूल की शिक्षिका गीता रानी ने भी बच्चों को प्रोत्साहित किया। जिसके परिणाम स्वरूप दस बच्चियों को कत्थक का बैसिक सिखाया।
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सेक्टर 2 निवासी कत्थक नृत्यांगना रंजना ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से कत्थक में पीजी किया इसके बाद इसे प्रोफेशनल तौर पर अपनाया भी। वह कहती है कत्थक सीखने में मेहनत के साथ वक्त और पैसा भी खर्च करना पड़ता है। ऐसे ही एक दिन किसी सरकारी स्कूल में जाना हुआ वहां की बच्चियों को देखकर लगा कि इन्हें अभी से बैसिक सिखाए जा सकते हैं। ताकि इनके भविष्य में काम आ सके।
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बस यही से इन बच्चों को कत्थक सिखाने की ठानी। वह बताती हैं कि मैं एक निजी स्कूल में कत्थक टीचर भी रही हूं। कई निजी स्कूलों में इसके लिए अलग से फीस भी ली जाती है।
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ऐसे में सरकारी स्कूल में पढने वाले बच्चों के लिए यह एक बस सपने की तरह ही है। इन बच्चों के पास न ही प्रतिभा की कमी है, न ही लगन की। ऐसे में यह काम और आसान हो गया। रंजना ने बताया कि दो दिन पहले ही गांव पलवल के राजकीय हाई स्कूल में दो दिवसीय कार्यशाला लगाई। जिसमें कई छात्राएं शामिल हुई। स्कूल की शिक्षिका गीता रानी ने भी बच्चों को प्रोत्साहित किया। जिसके परिणाम स्वरूप दस बच्चियों को कत्थक का बैसिक सिखाया।