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साइकिल से नेपाल, उत्तराखंड में पर्यावरण बचाने का संदेश देकर कुरुक्षेत्र पहुंचे रामप्रसाद
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रामप्रसाद नस्कर साइकिल चलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे है और देश भर में साइकिल से यात्रा कर रहे हैं। वे अब तक 25 हजार किलोमीटर से ज्यादा साइकिल चला चुके है। इसके अलावा पर्यावरण को बचाने के लिए वे भारत के साथ बांग्लादेश और नेपाल की भी साइकिल से यात्रा कर वहां के लोगों को जागरूक कर चुके हैं।
वे साल 2016 में अपनी शादी में भी दुल्हन को लेने 35 किलोमीटर साइकिल चलाकर पहुंचे थे, जबकि उनकी बारात गाड़ियों में गई थी। साइकिल पर ही वह अपनी दुल्हन को लेकर घर आए थे। मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले रामप्रसाद पेशे से अध्यापक है तथा श्रीपुर शिक्षा सदन हाई स्कूल में ज्योलॉजी पढ़ाते हैं। सोमवार को रामप्रसाद नेपाल में साइकिल चलाने, पर्यावरण व जीव जंतुओं बचाने का संदेश देकर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि वह साल 2010 से साइकिल चला रहे है। कहीं भी आना-जाना हो वह साइकिल से ही आते-जाते है। साइकिल चलाने के अपने इसी शौक को उन्होंने पर्यावरण को बचाने में बदल लिया। हाल ही में वे नेपाल से लौटे कुरुक्षेत्र आए है। 30 सितंबर को वह कोलकाता से नेपाल के लिए चले थे। नेपाल में उन्होंने जनकपुर, चढौली, हथौरा, काठमांडू, बुटवल, कपिलवस्तु में प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने, वन को बचाने व पर्यावरण को बचाने के लिए पौधे लगाने व साइकिल चलाने का संदेश दिया। नेपाल से वह हरिद्वार और सहारनपुर होते हुए कुरुक्षेत्र आए है। वे यात्रा के दौरान स्कूल और कॉलेज में जनजागरण अभियान चलाकर छात्रों को जागरूक कर रहे है। इससे पहले उन्होंने साल 2013-2014 में पूरे भारत में पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल चलाने के प्रति जागरूक किया था। इसमें यात्रा में उनको छह महीने से ज्यादा का समय लगा था। उन्होंने बताया कि 2019 में गंगा सागर से गंगोत्री की यात्रा भी साइकिल से की थी। अब उनकी पत्नी सुषमा मंडल भी साइकिल चलाना सीख रही है। अगली बार वह अपनी पत्नी के साथ साइकिल पर यात्रा करेंगे।
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साइकिल में रखते हैं ड्राई फ्रूट्स
रामप्रसाद ने बताया कि वह स्कूल से छुट्टी लेकर संदेश देते है। उस दौरान उनको वेतन नहीं मिलता है और वह पिछले बचत पर ही यात्रा का खर्च निकालते है। यात्रा के वक्त उनके पास ड्राई फ्रूट्स होते है, जिनसे उनको एनर्जी मिलती है।
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ऐसे सफर शुरू हुआ
------------------------
- 2010 में साइकिल के शौक को पर्यावरण बचाने का बनाया लक्ष्य
- 2011 में वेस्ट बंगाल में किया प्रचार
- 2013-14 में पूरे भारत की यात्रा कर दिया संदेश
- 2017 में बांग्लादेश पर्यावरण बचाने के लिए किया जागरूक
- 2019 में गंगा सागर से गंगोत्री
- 30 सितंबर से 1 नवंबर कोलकाता से नेपाल, उत्तराखंड और हरियाणा
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वे साल 2016 में अपनी शादी में भी दुल्हन को लेने 35 किलोमीटर साइकिल चलाकर पहुंचे थे, जबकि उनकी बारात गाड़ियों में गई थी। साइकिल पर ही वह अपनी दुल्हन को लेकर घर आए थे। मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले रामप्रसाद पेशे से अध्यापक है तथा श्रीपुर शिक्षा सदन हाई स्कूल में ज्योलॉजी पढ़ाते हैं। सोमवार को रामप्रसाद नेपाल में साइकिल चलाने, पर्यावरण व जीव जंतुओं बचाने का संदेश देकर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र पहुंचे थे।
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उन्होंने बताया कि वह साल 2010 से साइकिल चला रहे है। कहीं भी आना-जाना हो वह साइकिल से ही आते-जाते है। साइकिल चलाने के अपने इसी शौक को उन्होंने पर्यावरण को बचाने में बदल लिया। हाल ही में वे नेपाल से लौटे कुरुक्षेत्र आए है। 30 सितंबर को वह कोलकाता से नेपाल के लिए चले थे। नेपाल में उन्होंने जनकपुर, चढौली, हथौरा, काठमांडू, बुटवल, कपिलवस्तु में प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने, वन को बचाने व पर्यावरण को बचाने के लिए पौधे लगाने व साइकिल चलाने का संदेश दिया। नेपाल से वह हरिद्वार और सहारनपुर होते हुए कुरुक्षेत्र आए है। वे यात्रा के दौरान स्कूल और कॉलेज में जनजागरण अभियान चलाकर छात्रों को जागरूक कर रहे है। इससे पहले उन्होंने साल 2013-2014 में पूरे भारत में पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल चलाने के प्रति जागरूक किया था। इसमें यात्रा में उनको छह महीने से ज्यादा का समय लगा था। उन्होंने बताया कि 2019 में गंगा सागर से गंगोत्री की यात्रा भी साइकिल से की थी। अब उनकी पत्नी सुषमा मंडल भी साइकिल चलाना सीख रही है। अगली बार वह अपनी पत्नी के साथ साइकिल पर यात्रा करेंगे।
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साइकिल में रखते हैं ड्राई फ्रूट्स
रामप्रसाद ने बताया कि वह स्कूल से छुट्टी लेकर संदेश देते है। उस दौरान उनको वेतन नहीं मिलता है और वह पिछले बचत पर ही यात्रा का खर्च निकालते है। यात्रा के वक्त उनके पास ड्राई फ्रूट्स होते है, जिनसे उनको एनर्जी मिलती है।
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ऐसे सफर शुरू हुआ
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- 2010 में साइकिल के शौक को पर्यावरण बचाने का बनाया लक्ष्य
- 2011 में वेस्ट बंगाल में किया प्रचार
- 2013-14 में पूरे भारत की यात्रा कर दिया संदेश
- 2017 में बांग्लादेश पर्यावरण बचाने के लिए किया जागरूक
- 2019 में गंगा सागर से गंगोत्री
- 30 सितंबर से 1 नवंबर कोलकाता से नेपाल, उत्तराखंड और हरियाणा