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Kurukshetra News: राजबीर व सुलोचना हर साल लेकर जाते थे श्रद्धालुओं का जत्था

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 06:57 AM IST
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Rajbir and Sulochana used to take a group of devotees every year.
कुरुक्षेत्र/बाबैन। सरपंच के चचेरे भाई कुलदीप 56 का शव गांव में पहुंचा तो सबकी आंखें नम हो गईं। अभी गांव के लोग कुलदीप के संस्कार से वापस आ ही रहे थे कि दोपहर करीब तीन बजे महिला सुलोचना देवी का शव भी गांव पहुंच गया। एंबुलेंस को देखते ही परिजन और रिश्तेदार बिलख पड़े। उधर, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हादसे में मृत लोगों के आश्रित परिजनों को सरकार की तरफ से पांच-पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता और जख्मी लोगों का निशुल्क उपचार देने के लिए अपने ट्विटर से ऐलान किया। कुलदीप और सुलोचना देवी के अंतिम संस्कार में राज्यमंत्री सुभाष सुधा, लाडवा विधायक मेवा सिंह, भाजपा नेता डॉ. पवन सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील राणा समेत अन्य दल के नेताओं ने परिजनों के साथ दुख साझा किया।
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दरअसल, राजबीर और सुलोचना प्रत्येक साल श्रद्धालुओं का जत्था मचरेहड़ी गांव से बागड़ में गोगामेड़ी के दर्शनों के लिए लेकर जाते थे। इसमें आसपास के गांव के ही बल्कि अन्य जिलों के लोग भी उनके साथ जाते थे। सोमवार रात को गोगामेड़ी के भक्त टैंपो चालक राजबीर 60 निवासी सुनारियां और महिला सुलोचना 48 की अगुवाई में मचरेहड़ी से कुलदीप 56, गुलजार सिंह 40 निवासी रामपुरा, जयपाल 57, तेजपाल निवासी मचरेहड़ा माजरी, ईशरो उर्फ गुड्डी निवासी निवासी रणढोला जिला करनाल, 15 वर्षीय लवली उर्फ सुखदेव निवासी गांधी नगर कुरुक्षेत्र समेत कुल 19 लोग बागड़ के लिए रवाना हुए थे। इसमें लवली अपनी मां सुनीता के साथ मचरेहड़ी आया हुआ था। दोनों शाम करीब चार बजे गांव पहुंच गए थे। इसके अलावा गुड्डी अपनी बहन सुनहरी देवी के पास आई थी। जत्था पांच दिन तक बागड़ में ही रुकने वाला था, जिसके लिए सभी अपनी पूरी तैयारी करके गांव से रवाना हुए थे। वह लोग अपने साथ भंडारे का सामान भी साथ लेकर चले थे।
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मृतकों की आर्थिक स्थिति नहीं मजबूत
-कुलदीप खेती बाड़ी का करता था। उसके पास करीब साढ़े चार एकड़ जमीन है। कुलदीप का बेटा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा है, जबकि बेटी की शादी हो चुकी है।
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-गुलजार सिंह मेहनत-मजदूरी करता था। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। बेटी मानसिक रूप से बीमार है।
-सुलोचना देवी का बेटा सौरभ उम्र 24 साल दिहाड़ी मजदूरी करता है। उसके पति की करीब 10 साल पहले मौत चुकी है। बेटे के सहारे परिवार का गुजारा चल रहा है।
- लवली ने नौवीं के बाद स्कूल छोड़ दिया था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। उसका पिता बबलू दिहाड़ी करता है।
- जयपाल खेतीबाड़ी करता था। उसके पास गांव में करीब डेढ़ एकड़ जमीन है। दोनों बेटे प्राइवेट नौकरी करते हैं।
- ईशरो उर्फ गुड्डी के पास एक बेटा लविश है। वह अपनी छह बेटियों की शादी कर चुकी थी। उसकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है।
- चालक राजबीर के पास अपना टैंपो था। उसके जरिये ही वह अपना गुजारा कर रहा था। उसका बेटा एचकेआरएन के तहत ट्यूबवेल ऑपरेटर लगा हुआ है, जबकि दूसरा बेटा बिजली का कार्य करता है।
- तेजपाल सैनी खेतीबाड़ी का कार्य करता था। उसका एक बेटा अमेरिका में है, जबकि बेटी शादीशुदा है। उसके पास करीब तीन एकड़ जमीन थी।
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