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शहर की सड़कों पर पशुओं की ‘पंचायत’

Tue, 19 Jul 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र Updated Tue, 19 Jul 2016 11:44 PM IST
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punchayat of animals on road, kurukshetra
डिवाइडर पर बैठे पशु - फोटो : amarujala
शहर की सड़कों पर पशुओं का राज चल रहा है। लोग इससे परेशान हैं और प्रशासन 
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कुछ नहीं कर रहा है। गाय, बैल, सांड के अलावा घोड़ों के समूह भी वाहन चालकों के लिए जोखिम का सबब बन रहे हैं। पैदल चलने वालों तक के लिए खतरा बना हुआ है। कई दुपहिया वाहनों के चालक इनका शिकार भी हो चुके हैं।  
हाइवे से शहर में प्रवेश करके जैसे ही पीपली पहुंचते हैं, सड़कों पर लावारिस पशुओं का मजमा नजर आना आम बात है। इसके बाद जैसे-जैसे शहर में अंदर बढ़ते जाते हैं, लगभग हर चौराहे पर इन पशुओं को बीच सड़क पर देखा जा सकता है। रेलवे रोड से यूनिवर्सिटी की तरफ जाते वक्त भी यह नजारा आसानी से देखा जा सकता है। रेलवे रोड, गुरुद्वारा चौराहा, पैनोरोमा के सामने, सिविल अस्पताल के सामने, केयू गेट दो और तीन तक खासी तादाद में पशु खड़े मिल जाएंगे। बिरला मंदिर के पास महाराणा प्रताप चौक पर तो घोड़े और खच्चर तक सड़कों पर कब्जा जमाए नजर आ जाते हैं। 
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वाहन चालकों को हादसे का डर 
शहर के इन हिस्सों में हर दिन भारी यातायात रहता है। सुबह से शाम तक हजारों वाहनों का आवागमन होता है। मंदिरों में आने जाने वाले लोग शाम को मोटरसाइकिलों से भी निकलते हैं। ऐसे में इन लावारिस पशुओं से कई बार कई लोगों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। वाहन चालकों को हर पल हादसे का डर सताता रहा है। इन पशुओं के कारण शहर के कई चौराहों पर जाम तक की स्थिति बन जाती है। 
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कई युवक हो चुके घायल 
शांति नगर निवासी संदीप ने बताया कि वह रविवार को किसी काम से स्कूटी से जा रहा था। सिविल अस्पताल के सामने पशु अचानक सड़क पर दौड़ पड़ा। इससे उसने नियंत्रण खो बैठा और स्कूटी फिसल गई। उसके हाथ में खरोंच भी आई, लेकिन इसकी शिकायत कहां करें? इसी तरह दुखभंजन कॉलोनी निवासी छात्र हिमांशु ने बताया कि वह कोचिंग के लिए जा रहा था। जैसे ही वह गुरुद्वारा चौक के पास पहुंचा, गाय का बछड़ा सामने आ गया। यदि वक्त पर ब्रेक नहीं लगता हो बड़ा हादसा हो सकता था। इसी तरह शहर में अलग-अलग हिस्सों में कई युवक घायल हो चुके हैं। 

प्रशासन खामोश
प्रशासन के संज्ञान में यह मामला होने के बाद भी खामोशी है। शहर में कई धार्मिक आयोजन होते ही रहते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ भी सड़कों पर भी होती है। लेकिन प्रशासन इन लावारिस पशुओं पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। ऐसे में कभी भी कोई इनकी वजह से हादसे का शिकार हो सकता है। 

दस से ज्यादा गौशाला, लेकिन फायदा नहीं 
शहर और आसपास के क्षेत्र में लगभग दस से ज्यादा गौशालाएं हैं। इसके बाद भी सड़कों पर पशु भटक रहे हैं। इनके लिए खाने पीने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पॉलिथीन के ढेरों में यह बेजुबान मुंह मार लेते हैं। इससे इनकी जान को भी खतरा बना रहता है। बताया जाता है कि पहले गौशाला संचालकों को प्रति पशु के हिसाब से सरकार की तरफ से इमदाद भी मिलती थी। लेकिन अब यह भी बंद हो गई है। ऐसे में गोशाला संचालक भी ज्यादा पशु रखने की स्थिति में नहीं रहते हैं। कुछ माह पहले डीसी के निर्देश के बाद इन गौशालाओं में पशुओं को भेजा गया था, लेकिन अब फिर से पशुओं का डेरा सड़कों पर जमने लगा है। 


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गौशाला संचालकों ने भी अब पशुओं को लेने से इनकार कर दिया है। खास कर सांडों को गौशाला में नहीं लिया जा रहा है। अन्य पशुओं को भी रखने के लिए अब कहीं जगह नहीं हैं। ऐसे में इन्हें ले जाकर रखें कहां? कहीं छोड़ भी दिया तो वहां इनके चारा पानी का इंतजाम कौन करेगा। यह भी बड़ा सवाल है।
- करमचंद, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद
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