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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Protecting groundwater movement itself: Uma Bharti

जनांदोलन ही बचाएगा भूजल : उमा भारती

Sat, 22 Aug 2015 12:02 AM IST
Updated Sat, 22 Aug 2015 12:02 AM IST
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जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि पानी को बचाने और पानी को व्यर्थ बहने से रोकने के लिए जनांदोलन का स्वरूप देना अनिवार्य है।
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इसके लिए केंद्र सरकार ने योजना तैयार कर ली है। इसके तहत देश के हर जिले के दो गांवों को योजना में शामिल कर लोगों को जागरूक किया जाएगा और पानी बचाने के लिए, पानी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए तथा बरसात के पानी से भूमि को फिर से रिचार्ज करने के लिए एक जनांदोलन का रूप दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि अभी तक गंगा नदी विश्व की 10 सबसे गंदी नदियों में शामिल हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना के तहत गंगा नदी को आगामी तीन से 7 वर्ष के भीतर दुनिया की सबसे अच्छी 10 नदियों में शामिल करने का संकल्प लिया है।
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केंद्रीय मंत्री उमा भारती शुक्रवार की शाम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में भारत सरकार जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा आयोजित भू-जल मंथन कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि भू-जल मंथन कार्यक्रम में 4 सत्रों में जो भी विचार-विमर्श हुआ है, उस विचार-विमर्श को जलनीति में शामिल किया जाएगा। इससे देश में पानी को बचाने और व्यर्थ बहने से रोका जा सकेगा।

लोकसभा चुनाव 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विकास के मुद्दे पर ही बनीं। इससे यह साफ हो गया कि जब तक किसी मुद्दे को जनांदोलन के रूप में परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक कोई भी बात या मुद्दा अपने मुकाम पर नहीं पहुंच  सकता।

गंगा नदी के साथ-साथ यमुना नदी को असली स्वरूप देने के लिए हरियाणा, उत्तर  प्रदेश और दिल्ली राज्यों से मिलकर केंद्र सरकार का सहयोग करने की अपील की है। ये तीनों राज्य मिलकर अपने-अपने प्रदेशों में पानी बचाने और कृषि की नवीनतम तकनीकी को अपनाकर पानी की बचत कर पानी को यमुना नदी में प्रवाह करें तो यमुना नदी फिर से प्रयाग तक बहने लगेगी।

इसके साथ ही केंद्र  सरकार ने वर्ष 2018 तक नदियों को बचाने और पानी को व्यर्थ बहने से रोकने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

भू-जल मंथन पर गंभीरता से काम शुरू
हरियाणा के कृषि एवं सिंचाई मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि प्रदेश में पहले से ही भू-जल मंथन पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है।

इसके लिए सिंचाई विभाग की तरफ से करनाल में चिंतन और मंथन सेमिनार का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश में भू-जल को एक बैंक खाते की तरह देखा जा रहा है। प्रदेश का भू-जल एक करोड़ एकड़ का है और भूमि से जल दोहन  60 लाख फिट किया जा रहा है।

इसमें 40 लाख फिट का गैप हो गया है। इसलिए जल को बचाना एक बहुत बड़ी चुनौती सबके सामने है। प्रदेश के महेंद्रगढ़, फतेहाबाद, गुड़गांव, कैथल, कुरुक्षेत्र रेवाड़ी, करनाल आदि जिलों में भू-जल  स्तर की स्थिति काफी चिंताजनक है।

हरियाणा में पानी की स्थिति विकट
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि हरियाणा में 116 ब्लॉकों में से 71 ब्लॉकों में जरूरत से ज्यादा पानी का दोहन हो चुका है। 15 ब्लॉक क्रिटिकल हैं और 7 ब्लॉक सेमी-क्रिटिकल स्थिति में पहुंच चुके हैं। केवल 23 ब्लॉक ही अब सुरक्षित बचे हैं।

हरियाणा के साथ लगते पंजाब राज्य में स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में सिंचन और चिंतन योजना पर कार्य शुरू किया है। यह योजना केंद्र में भी मार्गदर्शक का काम कर सकती हैं। इससे पहले राज्य सरकार को 71 ब्लॉकों में पानी को बचाने के लिए ऐसे पेड़   लगाने होंगे, जो पानी को बचाने का काम करेंगे और ऐसी फसलों को अपनाना होगा।

इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर ही भूमि से पानी निकाला जाए। इस नीति पर काम करके ही 71 ब्लॉकों की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। लेकिन इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा शिकार गरीब लोग ही होते हैं। सरकार को यह नीति लागू करने के लिए सबके लिए एक बराबर कानून पर काम करना होगा।

पानी को करना होगा वर्गीकृत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को पानी का प्रयोग करने के लिए पानी को वर्गीकृत करना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में देश में नदियों पर बांध बनाने से पहले सोचना होगा और नदियों पर बांध केवल मात्र सिंचाई और पावर के उद्देश्य से ही बनाने होंगे।

जिन नदियों पर बांध बनाए जाएंगे, उन नदियों को जिंदा रखने के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुसार पानी को रखना होगा। उन्होंने कहा कि गंगा में  उपचारित पानी को रोका जाएगा। गंगा अब दुनिया की 10 प्रदूषित नदियों में शामिल हो चुकी है।

सरकार ने आगामी 3 से 7 वर्षों में इसे दुनिया की 10 साफ नदियों में शामिल किया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना के तहत एक हाई लेवल कमेटी और टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इतना ही नहीं, जिलास्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का  गठन किया जाएगा। इस  नीति पर काम करके भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बनेगा, जहां गंगा ई-फ्लो का रूप धारण करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना का फोकस यमुना नदी पर भी रहेगा।

अब यमुना नदी हथनीकुंड पर आकर ही समाप्त हो जाती है।  इससे आगे  यमुना गंदे नाले का रूप ले रही है। सरकार का प्रयास है कि  हरियाणा,  उत्तरप्रदेश व दिल्ली राज्यों से मिलकर बात करें और व्यर्थ बह रहे  पानी को  बचाकर, कृषि के लिए नई तकनीकी अपनाकर और यहां से भी पानी बचाकर और बचे  हुए पानी को यमुना में बहाने का काम करें ताकि यह नदी मथुरा से होती हुई प्रयाग तक अपने असली स्वरूप में आ सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि  केंद्र  सरकार गंगा व यमुना का जीर्णोद्धार करने के अलावा पानी का सदुपयोग करने और  खेती के नये तरीकों को अपनाने के लिए मंत्रालय की एक टीम इजरायल में  भेजने जा रही है। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आमजन का सहयोग लेगी और वर्ष 2018 तक अपने लक्ष्य को पूरा करने का काम करेगी।

दीप जलाकर किया कार्यक्रम का शुभारंभ
इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, हरियाणा के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, अतिरिक्त सचिव अमरजीत सिंह, केंद्रीय जलबोर्ड के चेयरमैन केबी बिस्वास, विधायक डॉ. पवन सैनी, पिहोवा से विधायक जसविंद्र सिंह संधु व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति हरदीप कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर भू-जल मंथन कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने मेहमानों के स्वागत में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके उपरांत केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने हरियाणा जलचित्र, भूजल मंथन के साथ-साथ केंद्रीय भूमिजल बोर्ड के लिटरेचर का विमोचन भी किया।


इस मौके पर उपायुक्त सीजी रजिनिकांतन, एसपी सिमरदीप सिंह, भू-जल विभाग के  अधिकारी तेजदीप सिंह, दीपांकर शाह, भाजपा नेता रविंद्र सांगवान, युधिष्ठिर  बहल, धर्मवीर मिर्जापुर, रमेश सुधा, बंता राम बाल्मिकी, जीतेंद्र अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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