फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   problems in LNJP Hospital kurukshetra

39 करोड़ खर्चने के बाद भी नहीं सुधरे हालात, जिला अस्पताल की नई ईमारत में बने 21 प्राईवेट वार्डों में शिफ्ट की ओपीडी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2020 11:48 PM IST
विज्ञापन
problems in LNJP Hospital kurukshetra
लंबे इंतजार के बाद 39 करोड़ की लागत से तैयार हुई एलएनजेपी अस्पताल की वातानुकूलित इमारत भी मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सुविधा में सुधार न ला सकी। हालात इस कदर खराब हैं कि नई इमारत में बेड की कमी के चलते एक बेड पर दो से तीन मरीज हैं। वहीं, अस्पताल की चौथी मंजिल पर बने करीब 21 प्राइवेट वार्डों में ओपीडी सहित अन्य कार्यालय शिफ्ट कर दिए हैं, जिसकी वजह मरीजों को ही नहीं परेशानी हो रही, बल्कि रोजाना सरकार को पांच हजार से अधिक का घाटा हो रहा है। हालांकि चिकित्सा अधीक्षक द्वारा शीघ्र ही व्यवस्था बनाए जाने का दावा किया गया है।
विज्ञापन

कोविड-19 महामारी के बीच यह अडजेस्टमेंट कब किस के लिए जानलेवा साबित भी हो सकती है, यह किसी को मालूम नहीं। अस्पताल की नई चार मंजिला इमारत में पांच लिफ्ट, सेंट्रल एसी, वाटर गीजर, आपातकालीन सेवाएं, गायनी, ऑपरेशन थियेटर, एक्सरे एवं ऑर्थो, सर्जिकल, पुरुष और महिला वार्ड के अलावा अस्पताल के चौथे मंजिल पर करीब 22 प्राइवेट वार्ड बनाए हैं, ताकि कोई भी मरीज अपनी सुविधा अनुसार प्राईवेट वार्ड ले सके, लेकिन इन वार्डों पर चिकित्सकों और अकाउंटेंट विभाग ने कब्जा किया हुआ है। वार्ड के नेम प्लेट उतार डॉक्टरों एवं अकाउंटेंट विभाग के अधिकारियों ने अपनी-अपनी नेम प्लेट लगा ली हैं।
विज्ञापन

सरकारी अस्पताल में प्राइवेट वार्ड से ही होती है इनकम
एलएनजेपी अस्पताल में मरीजों को सरकार द्वारा हर प्रकार की सुविधा नि:शुल्क प्रदान की जाती है। बड़े ऑप्रेशन से लेकर महंगी दवाइयां और टेस्ट भी बिल्कुल फ्री होते हैं, लेकिन अगर कोई मरीज अस्पताल में प्राइवेट वार्ड लेता था तो उससे प्रतिदिन के हिसाब से 250 वसूल किये जाते थे, जिससे अस्पताल की इनकम भी होती है, लेकिन प्राइवेट वार्ड पर कब्जे होने से अब यह भी बंद हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

100 बेड की नई इमारत से भी राहत की थी उम्मीद
100 बेड का नया अस्पताल से मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी भी हालात ज्यों की त्यों हैं। इस समय वर्ष 1976 में निर्मित 50 बेड की क्षमता के अस्पताल को मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसे बढ़ाकर 100 बेड का अस्पताल किया गया था। गत 43 वर्षों से अब एलएनजेपी अस्पताल की ओपीडी करीब 10 गुणा बढ़ चुकी है, जिसके कारण मरीजों को दाखिल करने में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

मरीजों की परेशानी को देखते हुए बनाई जा रही है व्यवस्था : डॉ. शैली
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नेत्र रोग विभाग, हड्डी रोग विभाग एवं सर्जरी विभाग सहित अन्य कार्यालयों को प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया था, लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए वे व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि सुचारू रूप से ओपीडी भी चलती रहे और मरीजों को भी परेशानी न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed