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फार्म नंबर छह में दर्शायी फीस ही लेने के हकदार होंगे निजी स्कूल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 01:55 AM IST
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Private schools will be entitled to take only the fees shown in form number six
कुरुक्षेत्र। पेरेंट्स एसोसिएशन कुरुक्षेत्र और निजी स्कूलों के बीच पिछले 11 महीने से चल रहे फीस को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। मामले में हाईकोर्ट ने कुरुक्षेत्र के सभी निजी स्कूलों को फार्म नंबर छह में दर्शायी गई फीस लेने के आदेश दिए हैं। इसके तहत अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा की गई अवैध वसूली को वापस लेने के हकदार होंगे। इससे पहले पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से निजी स्कूलों में वसूली गई मनमानी फीस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी मयंक बजाज ने बताया कि सत्र 2020-21 में कोविड-19 महामारी के चलते लॉकडाउन लगा, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई। बिजनेस ठप हो गए और सेविंग्स घर खर्च और महामारी में लग गई, जिससे अभिभावकों को भारी वित्तीय संकट झेलना पड़ा। सरकार ने इस दौरान अभिभावकों को राहत देते हुए निजी स्कूलों को सत्र 2020-21 के दौरान केवल ट्यूशन फीस लेने के निर्देश जारी किए थे। सत्र 2021-22 में परिस्थितियां और खराब हुईं, कोविड-19 महामारी के चलते पुन: लॉकडाउन लगा, जिसके परिणामस्वरूप अभिभावकों की हालत और ज्यादा खराब हो गई। उधर निजी स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों पर वार्षिक चार्जेज के लिए दबाव बढ़ाया गया। इस पर अभिभावकों ने जिला प्रशासन, सरकार एवं एफएफआरसी, अंबाला मंडल के स्तर पर अपने फीस फंड संबंधी मुद्दे को उठाया। एक लंबे इंतजार के बाद भी जब अभिभावकों की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला तो पेरेंट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 30 सितंबर 2021 को हाईकोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया था। मामले में 22 फरवरी को पेरेंट्स एसोसिएशन कुरुक्षेत्र के पक्ष में आदेश जारी किए गए। इसके अनुसार कुरुक्षेत्र के निजी स्कूलों को फार्म नंबर छह के अनुसार फीस लेनी होगी, जिस पर हाईकोर्ट ने 23 फरवरी को केस की सुनवाई के बाद अपनी मुहर लगा दी। अदालत के इस फैसले से अभिभावकों में खुशी का माहौल है।
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एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इन आदेशों के परिणाम स्वरूप निजी स्कूलों द्वारा बिल्डिंग फंड, वार्षिक व अन्य चार्ज के नाम पर की जाने वाली अवैध वसूली पर रोक लगेगी। निजी स्कूल अब फीस में मनमानी वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा की गई अवैध वसूली को वापस लेने के हकदार होंगे।
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