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अंतिम संस्कार में भी नहीं आई बेटी और पत्नी
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जिंदगी में कितनी भी कड़वाहट हो लेकिन मौत के बाद दुश्मन भी ऐसा बर्ताव नहीं करता, जैसा बुजुर्ग व्यापारी प्रेमचंद्र के साथ हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव के अंतिम संस्कार के लिए पुलिस के फोन के बाद भी जब कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा तो करनाल की एक समाजसेवी संस्था को उनका शव सौंप दिया गया। इसी संस्था ने उनका अंतिम संस्कार किया। अन्य रिश्तेदारों की बात कौन करें, उनकी पत्नी व बेटी भी न तो शव लेने पहुंची और न अंतिम संस्कार में ही शामिल हुई।
मालूम हो कि रविवार सेक्टर तीन से आई किसी कॉलोनीवासी की फोन कॉल के बाद पुलिस ने एक मकान से प्रेमचंद्र (70) का शव बरामद किया था। टेंट कारोबारी प्रेमचंद्र मूल रूप से कैथल के रहने वाले थे और पिछले तीन साल से सेक्टर तीन में किराए के मकान में अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। कारोबार में मंदी के चलते उनकी आर्थिक स्थिति फिलहाल गड़बड़ा गई थी। जिसकी वजह से वह मुफलिसी में दिन गुजार रहे थे। इस वजह से तमाम रिश्तेदारों ने तो पहले ही उनसे मुंह मोड़ लिया था। हां, कुछ माह पहले जरूर बीमारियों ने उनसे नाता जोड़ लिया था। जिंदगी की जद्दोजहद में प्रेमचंद बीमार हो गए तो उनकी पत्नी और बेटी भी मानसिक तौर पर कमजोर हो गई। ऐसे समय अंधविश्वास ने दोनों को सम्मोहित किया। परिणामस्वरूप चार दिन पूर्व जब प्रेमचंद्र की मौत हो गई तो दोनों ने किसी को सूचना नहीं दी। घर में ही तीन दिन तक दोनों ने उनके शव को छिपाए रखा। शव की दुर्गंध से जब पड़ोसियों का जीना मुहाल हुआ तो किसी ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद शव को बरामद किया जा सका। हालांकि उस दौरान भी पत्नी व बेटी ने शव पुलिस को सौंपने से इंकार करते हुए आत्मा के शरीर में वापस आने के करिश्मे की बात दोहराई।
बहरहाल, उस दौरान कई दिन पुराने शव को पुलिस ने रोहतक पीजीआई पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार को रोहतक में पोस्टमार्टम होने के बाद जब पुलिस ने प्रेमचंद्र की बेटी व पत्नी की सुपुर्दगी में शव देने की बात कही तो दोनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने करनाल की समाज सेवा संस्था जनसेवा सदन को अंतिम संस्कार के लिए शव सौंप दिया। संस्था ने सोमवार की शाम को उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान भी प्रेमचंद्र का कोई रिश्तेदार मौजूद नहीं रहा।
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मालूम हो कि रविवार सेक्टर तीन से आई किसी कॉलोनीवासी की फोन कॉल के बाद पुलिस ने एक मकान से प्रेमचंद्र (70) का शव बरामद किया था। टेंट कारोबारी प्रेमचंद्र मूल रूप से कैथल के रहने वाले थे और पिछले तीन साल से सेक्टर तीन में किराए के मकान में अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। कारोबार में मंदी के चलते उनकी आर्थिक स्थिति फिलहाल गड़बड़ा गई थी। जिसकी वजह से वह मुफलिसी में दिन गुजार रहे थे। इस वजह से तमाम रिश्तेदारों ने तो पहले ही उनसे मुंह मोड़ लिया था। हां, कुछ माह पहले जरूर बीमारियों ने उनसे नाता जोड़ लिया था। जिंदगी की जद्दोजहद में प्रेमचंद बीमार हो गए तो उनकी पत्नी और बेटी भी मानसिक तौर पर कमजोर हो गई। ऐसे समय अंधविश्वास ने दोनों को सम्मोहित किया। परिणामस्वरूप चार दिन पूर्व जब प्रेमचंद्र की मौत हो गई तो दोनों ने किसी को सूचना नहीं दी। घर में ही तीन दिन तक दोनों ने उनके शव को छिपाए रखा। शव की दुर्गंध से जब पड़ोसियों का जीना मुहाल हुआ तो किसी ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद शव को बरामद किया जा सका। हालांकि उस दौरान भी पत्नी व बेटी ने शव पुलिस को सौंपने से इंकार करते हुए आत्मा के शरीर में वापस आने के करिश्मे की बात दोहराई।
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बहरहाल, उस दौरान कई दिन पुराने शव को पुलिस ने रोहतक पीजीआई पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार को रोहतक में पोस्टमार्टम होने के बाद जब पुलिस ने प्रेमचंद्र की बेटी व पत्नी की सुपुर्दगी में शव देने की बात कही तो दोनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने करनाल की समाज सेवा संस्था जनसेवा सदन को अंतिम संस्कार के लिए शव सौंप दिया। संस्था ने सोमवार की शाम को उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान भी प्रेमचंद्र का कोई रिश्तेदार मौजूद नहीं रहा।
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