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पुलिस की लापरवाही उजागर : एनडीपीएस मामले में दो आरोपी बरी, जांच की खामियां आईं सामने
Tue, 04 Nov 2025 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 04 Nov 2025 12:51 AM IST
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कुरुक्षेत्र। पुलिस की जांच में गंभीर खामियां और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी के चलते विशेष एनडीपीएस अदालत ने दो आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करते हुए फैसला सुनाया। इसमें एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 और 50 का अनुपालन नहीं मिला। यह मामला पुलिस की गुप्त सूचना, तलाशी और बरामदगी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
5 अक्तूबर 2021 को थाना झांसा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर सलपानी कलां निवासी बिट्टू को गांव की मस्जिद के पास से कथित तौर पर 480 अल्प्राजोलम गोलियों के साथ पकड़ा था। बिट्टू के बयान पर अजरानी गांव के रवि कुमार, जो धुराला में सैनी मेडिकल स्टोर चलाते हैं, उनके स्टोर से 1200 एटिफ्रेश और 1000 प्रोडोल गोलियां बरामद करने का दावा किया गया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और चालान पेश किया गया लेकिन अदालत ने पुलिस की इस पूरी जांच को खारिज कर दिया।
अदालत ने सबसे पहले रवि कुमार से बरामद दवाओं की प्रकृति पर पुलिस के दावों को गलत ठहराया। ड्रग कंट्रोल ऑफिसर विजय राजे की रिपोर्ट और वरिष्ठ ड्रग कंंट्रोल अधिकारियों रिपन मेहता और रितु मेहला की गवाही से साबित हुआ कि एटिफ्रेश और प्रोडोल में कोई प्रतिबंधित साल्ट नहीं है, इसलिए ये एनडीपीएस शेड्यूल में नहीं आती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला मात्र ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत बिना लाइसेंस रखने का उल्लंघन हो सकता है, न कि एनडीपीएस का। पुलिस की यह मूलभूत गलती जांच की आधारहीनता को दर्शाती है।
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बिट्टू के मामले में पुलिस की खामियां और भी गंभीर सामने आईं। अदालत ने पाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गुप्त सूचना को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जो धारा 42 का स्पष्ट उल्लंघन है। धारा 50 के अनुपालन में तलाशी के दौरान गजेटेड ऑफिसर या मजिस्ट्रेट का विकल्प स्पष्ट नहीं दिया गया और सहमति उसी कागज पर ली गई। अदालत ने इन प्रावधानों को अनिवार्य सुरक्षा उपाय बताते हुए कहा कि इनकी अवहेलना साक्ष्य को पूरी तरह अविश्वसनीय बना देती है। अभियोजन आरोप साबित करने में असफल रहा, क्योंकि पुलिस की जांच शुरू से ही दोषपूर्ण थी।
अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करते हुए उनके जमानत बाॅन्ड रद्द करने और बरामद गोलियों को ऊपरी अदालत में अपील अवधि के बाद नष्ट करने के आदेश दिए। वहीं इस फैसले पर पुलिस की प्रतिक्रिया जानने के लिए आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई थी लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
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5 अक्तूबर 2021 को थाना झांसा पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर सलपानी कलां निवासी बिट्टू को गांव की मस्जिद के पास से कथित तौर पर 480 अल्प्राजोलम गोलियों के साथ पकड़ा था। बिट्टू के बयान पर अजरानी गांव के रवि कुमार, जो धुराला में सैनी मेडिकल स्टोर चलाते हैं, उनके स्टोर से 1200 एटिफ्रेश और 1000 प्रोडोल गोलियां बरामद करने का दावा किया गया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और चालान पेश किया गया लेकिन अदालत ने पुलिस की इस पूरी जांच को खारिज कर दिया।
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अदालत ने सबसे पहले रवि कुमार से बरामद दवाओं की प्रकृति पर पुलिस के दावों को गलत ठहराया। ड्रग कंट्रोल ऑफिसर विजय राजे की रिपोर्ट और वरिष्ठ ड्रग कंंट्रोल अधिकारियों रिपन मेहता और रितु मेहला की गवाही से साबित हुआ कि एटिफ्रेश और प्रोडोल में कोई प्रतिबंधित साल्ट नहीं है, इसलिए ये एनडीपीएस शेड्यूल में नहीं आती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला मात्र ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत बिना लाइसेंस रखने का उल्लंघन हो सकता है, न कि एनडीपीएस का। पुलिस की यह मूलभूत गलती जांच की आधारहीनता को दर्शाती है।
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बिट्टू के मामले में पुलिस की खामियां और भी गंभीर सामने आईं। अदालत ने पाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गुप्त सूचना को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जो धारा 42 का स्पष्ट उल्लंघन है। धारा 50 के अनुपालन में तलाशी के दौरान गजेटेड ऑफिसर या मजिस्ट्रेट का विकल्प स्पष्ट नहीं दिया गया और सहमति उसी कागज पर ली गई। अदालत ने इन प्रावधानों को अनिवार्य सुरक्षा उपाय बताते हुए कहा कि इनकी अवहेलना साक्ष्य को पूरी तरह अविश्वसनीय बना देती है। अभियोजन आरोप साबित करने में असफल रहा, क्योंकि पुलिस की जांच शुरू से ही दोषपूर्ण थी।
अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करते हुए उनके जमानत बाॅन्ड रद्द करने और बरामद गोलियों को ऊपरी अदालत में अपील अवधि के बाद नष्ट करने के आदेश दिए। वहीं इस फैसले पर पुलिस की प्रतिक्रिया जानने के लिए आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई थी लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।