{"_id":"5f035cd08ebc3e42b76cd89e","slug":"people-prayer-loard-shiv-kurukshetra-kurukshetra-news-knl36495742","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल के बीच महाकाल का जलाभिषेक करने के लिए सुबह ही शिवालय पहुंचे श्रद्घालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल के बीच महाकाल का जलाभिषेक करने के लिए सुबह ही शिवालय पहुंचे श्रद्घालु
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना काल के बीच श्रावण माह के पहले सोमवार को श्रद्धालु महाकाल भगवान शिव का जलाभिषेक करने मंदिरों पहुंचे। सुबह चार बजे से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगना आरंभ हो गया था। दु:खभजन मंदिर, स्थाणीश्वर महादेव, कालेश्वर महादेव, संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय, पिहोवा के पशुपतिनाथ महादेव मंदिर, पृथ्वेश्वर महादेव (बड़ा शिवालय), आशुतोष महादेव मंदिर सहित जिले के तमाम शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने ओम नम: शिवाय, बम-बम भोले व हर-हर महादेव के जयकारे के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस दौरान सामाजिक दूरी का पूरा ख्याल रखा गया।
हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए पिछले साल की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही उनको मंदिर में प्रवेश कराया गया। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, शक्कर, घी, बिल्व पत्र, फल, फूल, शहद, गन्ने का रस व धतूरे से भगवान शिव का पूजन किया। संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय के महंत विश्वनाथ गिरि ने बताया कि समाज कल्याण व पर्यावरण की शुद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसमें विभिन्न विधियों से शिवार्चन, अघोर मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, गायत्री मंत्र, रूद्राभिषेक आदि अनेक अनुष्ठान संपन्न होंगे। मंदिर में प्रतिदिन दीमक की बांबी से लाई गई मिट्टी से निर्मित से पार्थेश्वर महादेव की पूजना अर्चना की जाएगी। तत्पश्वात पार्थेश्वर शिवलिंग को जल में विसर्जित किया जाएगा। पार्थेश्वर शिवलिंग की स्थापना सबसे पहले भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले की थी। पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद ही उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने बताया कि भगवान शिव मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते है। श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह का प्रत्येक दिन खास होता है।
श्रावण माह में भगवान शिव की अराधना करने से सभी दोष व क्लेश से छुटकारा मिलता है। श्रावण माह के प्रतिदिन संगमेश्वर महादेव का गंगा जल, दूूध, दही, घी, गन्ने के रस से अखंड रुद्राभिषेक किया जाएगा तथा प्रतिदिन शाम को फल, सब्जी रंग, अनाज, ड्राई फ्रूट, फूल, मिठाई से भव्य शृंगार किया जाएगा। सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि श्रावण मास में व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए सेवादल के सेवकों को ड्यूटी लगाई गई है। मंदिर परिसर में पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है तथा विशेष पंखों की मदद सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। मुख्य द्वार के नजदीक पहुंचने पर श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज किया जा रहा है। बगैर मास्क आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क भी दिए जा रहे है। इस बार श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए जलपात्र की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। मंदिर की ओर से उन्हें कोई जल पात्र उपलब्ध नहीं करवाया गया। मंदिर प्रबंधन की ओर से कोरोना महामारी को लेकर हर तरह की सावधानी बरती जा रही है।
विज्ञापन
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के निर्देशानुसार सर्वकल्याण की भावना से किया अभिषेक
जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने भगवान शिव का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ अपने प्रिय भक्तों को कभी निराश नहीं करते हैं। वह स्वयं भी भगवान भोलेनाथ के प्रिय स्थान गंगा के तट पर निरंतर मानव समाज की कोरोना से मुक्ति की कामना से निरंतर जयराम आश्रम हरिद्वार में अभिषेक कर रहे हैं। जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला ने बताया कि जयराम संस्थाओं के अंतर्गत के कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, ऋषिकेश, वृंदावन, बेरी (रोहतक), दिल्ली, नरवाना इत्यादि सहित सभी आश्रमों में पूरे श्रावण पूजन चलेंगी। कुरुक्षेत्र जयराम विद्यापीठ में स्थित श्री रामेश्वर महादेव मंदिर में रोहित कौशिक एवं आचार्य प. राजेश प्रसाद लेखवार शास्त्री ने यजमान रामनिवास गोयल तथा उनके परिवार के सदस्यों को पूजन व अभिषेक करवाया। इस अवसर श्रवण गुप्ता, के के कौशिक, राजेंद्र सिंघल, केके गर्ग, खरैती लाल सिंगला, एसएन गुप्ता, टेक सिंह लौहार माजरा, सुरेंद्र गुप्ता, ईश्वर गुप्ता मौजूद रहे।
कोरोना से बचाव को लेकर लिया सही निर्णय
पिहोवा से पार्षद योगेश शर्मा लक्की ने बताया कि वह पिछले 22 साल से अपने साथियों के साथ मिलकर थर्ड गेट पिहोवा-कुरुक्षेत्र मार्ग पर स्थित मां दुर्गा के मंदिर में कांविड़यों के लिए उनके ठहरने व खाने-पीने के लिए कांवड़ शिविर लगा रहे है। सदियों से कांवड़ लाने की परंपरा है, लेकिन इस साल कोरोना महामारी को देखते हुए कांवड़ यात्रा व कांवड़ शिविर पर बैन लगा दिया है। जनता की सुरक्षा के लिहाज से सरकार ने सही निर्णय लिया है लेकिन किसी भी तरह से यह परंपरा भंग न हो सरकार को इसके लिए प्रबंध करने चाहिए।
विज्ञापन
हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए पिछले साल की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही उनको मंदिर में प्रवेश कराया गया। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, शक्कर, घी, बिल्व पत्र, फल, फूल, शहद, गन्ने का रस व धतूरे से भगवान शिव का पूजन किया। संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय के महंत विश्वनाथ गिरि ने बताया कि समाज कल्याण व पर्यावरण की शुद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसमें विभिन्न विधियों से शिवार्चन, अघोर मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, गायत्री मंत्र, रूद्राभिषेक आदि अनेक अनुष्ठान संपन्न होंगे। मंदिर में प्रतिदिन दीमक की बांबी से लाई गई मिट्टी से निर्मित से पार्थेश्वर महादेव की पूजना अर्चना की जाएगी। तत्पश्वात पार्थेश्वर शिवलिंग को जल में विसर्जित किया जाएगा। पार्थेश्वर शिवलिंग की स्थापना सबसे पहले भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले की थी। पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद ही उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने बताया कि भगवान शिव मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते है। श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह का प्रत्येक दिन खास होता है।
विज्ञापन
श्रावण माह में भगवान शिव की अराधना करने से सभी दोष व क्लेश से छुटकारा मिलता है। श्रावण माह के प्रतिदिन संगमेश्वर महादेव का गंगा जल, दूूध, दही, घी, गन्ने के रस से अखंड रुद्राभिषेक किया जाएगा तथा प्रतिदिन शाम को फल, सब्जी रंग, अनाज, ड्राई फ्रूट, फूल, मिठाई से भव्य शृंगार किया जाएगा। सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि श्रावण मास में व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए सेवादल के सेवकों को ड्यूटी लगाई गई है। मंदिर परिसर में पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है तथा विशेष पंखों की मदद सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। मुख्य द्वार के नजदीक पहुंचने पर श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज किया जा रहा है। बगैर मास्क आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क भी दिए जा रहे है। इस बार श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए जलपात्र की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। मंदिर की ओर से उन्हें कोई जल पात्र उपलब्ध नहीं करवाया गया। मंदिर प्रबंधन की ओर से कोरोना महामारी को लेकर हर तरह की सावधानी बरती जा रही है।
विज्ञापन
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के निर्देशानुसार सर्वकल्याण की भावना से किया अभिषेक
जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने भगवान शिव का अभिषेक किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ अपने प्रिय भक्तों को कभी निराश नहीं करते हैं। वह स्वयं भी भगवान भोलेनाथ के प्रिय स्थान गंगा के तट पर निरंतर मानव समाज की कोरोना से मुक्ति की कामना से निरंतर जयराम आश्रम हरिद्वार में अभिषेक कर रहे हैं। जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला ने बताया कि जयराम संस्थाओं के अंतर्गत के कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, ऋषिकेश, वृंदावन, बेरी (रोहतक), दिल्ली, नरवाना इत्यादि सहित सभी आश्रमों में पूरे श्रावण पूजन चलेंगी। कुरुक्षेत्र जयराम विद्यापीठ में स्थित श्री रामेश्वर महादेव मंदिर में रोहित कौशिक एवं आचार्य प. राजेश प्रसाद लेखवार शास्त्री ने यजमान रामनिवास गोयल तथा उनके परिवार के सदस्यों को पूजन व अभिषेक करवाया। इस अवसर श्रवण गुप्ता, के के कौशिक, राजेंद्र सिंघल, केके गर्ग, खरैती लाल सिंगला, एसएन गुप्ता, टेक सिंह लौहार माजरा, सुरेंद्र गुप्ता, ईश्वर गुप्ता मौजूद रहे।
कोरोना से बचाव को लेकर लिया सही निर्णय
पिहोवा से पार्षद योगेश शर्मा लक्की ने बताया कि वह पिछले 22 साल से अपने साथियों के साथ मिलकर थर्ड गेट पिहोवा-कुरुक्षेत्र मार्ग पर स्थित मां दुर्गा के मंदिर में कांविड़यों के लिए उनके ठहरने व खाने-पीने के लिए कांवड़ शिविर लगा रहे है। सदियों से कांवड़ लाने की परंपरा है, लेकिन इस साल कोरोना महामारी को देखते हुए कांवड़ यात्रा व कांवड़ शिविर पर बैन लगा दिया है। जनता की सुरक्षा के लिहाज से सरकार ने सही निर्णय लिया है लेकिन किसी भी तरह से यह परंपरा भंग न हो सरकार को इसके लिए प्रबंध करने चाहिए।