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मंडी में लगातार पहुंच रहा धान, लेकिन खरीद शुरू नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 11:36 PM IST
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Paddy continues to reach Mandi, but purchase not started
अनाजमंडी में बरसात के दौरान ढांपी गई धान। - फोटो : Kurukshetra
बुधवार सुबह और दोपहर के समय हुई हल्की बारिश से मंडी में बिकावली के लिए आया धान भीग जाने से किसनों को सांसे फूल गई। इस दौरान बारिश से बचाने के लिए अफरा-तफरी में धान की तिरपालों से ढका गया। दोपहर बाद मौसम साफ होने से किसानों को कुछ राहत पहुंची। लेकिन मौसम विभाग ने अगले दो दिन बारिश होने की संभावना जताई, जिससे किसानों चिंता लगातार बनी हुई है। किसानों का कहना है कि जिला में 50 प्रतिशत फसल पक कर तैयार हो चुकी है और उसमें से कई क्विंटल धान बिकावली के लिए मंडियों में भी पहुंच चुका है। लेकिन सरकारी खरीद कब शुरू होगी अभी कुछ पता नहीं है, ऐसे में उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है और ऊपर से बिगड़ते मौसम ने उनकी चिंताओं को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
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किसान गौरव शर्मा, रामरत्न, विष्णुदत्त, अनिल और तरसेम आदि ने बताया कि उनकी धान की फसल पक कर तैयार थी। मौसम खराब होने के कारण वे धान को कटवा कर मंडी में बिकवाली के लिए लेकर आए है, लेकिन कोई भी खरीदार न होने से वे सारा दिन धान की बिकवाली का इंतजार करते रहते है। किसानों ने कहा कि बिगड़ते मौसम के चलते किसानों के लिए दोहरी समस्या बनी हुई है अगर वे धान को खेत में रखते हैं तो बरसात होने से धान खेतों में बिछ जाएगी और उसकी बालियों से दाना टूट कर जमीन में गिर जाएगा, जिससे निकासी पर खासा असर पड़ेगा और दूसरा यदि वे धान को कटवा कर मंडी में लेकर आते है तो वहां भी खरीद न होने से उन्हें अपना धान खुले आसमान के नीचे रखना पड़ता है। किसानों ने कहा कि उनके पीले सोने की इतनी बेकदरी पहले कभी नहीं हुई।
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किसान अमर सिंह, लाभ सिंह सोंटी, रविंदर खेड़ी, रामकुमार जैनपुर, बलकार, सुरेश पाल गोविंदगढ़ और सूरजभान आदि ने बताया कि चार-पांच दिन से मंडी में जीरी की फसल लेकर आए थे, लेकिन बारिक धान के रेट न होने के कारण तथा पीआर 26 और 777 की सरकारी बोली न होने के कारण अनाज मंडी में ही अपनी फसल के साथ डेरा जमाए बैठे हैं। पूरा दिन धूप में धान को सिखाया बडता है और फिर शाम को बोरियों में भरकर या ढेरी लगाकर तिरपाल से ढक कर रखा जाता है इसके बावजूद रात को अनाज मंडी में घूमने वाले आवारा पशु धान को खा जाते हैं या फिर मल मूत्र कर धान को खराब कर देते हैं। दिन रात अपनी जीरी की फसल का पहरा देना पड़ रहा है।
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रेट न मिलने से किसान मायूस
1509 की किस्म की खरीद शुरू तो हो गई है, लेकिन सरकारी रेट न मिलने से किसानों को मायूसी ही हाथ लग रही है। पिछले साल 1509 किस्म की धान का रेट 2200 से 3000 रुपये तक था, जबकि अब की बार 1500 से 2000 रुपये के बीच रेट मिल रहा है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार से 20 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी छह महीने की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि जल्द से जल्द सरकारी खरीद शुरू की जाए ताकि सब का पेट भरने वाला अन्नदाता अपने बच्चों का पेट भर सके।
लाडवा मंडी में पहुुंचा 62 हजार क्विंटल धान : जसबीर
लाडवा मंडी के मार्केट सचिव जसबीर सिंह ने बताया कि अभी उनके पास खरीद शुरू होने को लेकर कोई लेटर नहीं आया है। वहीं अब तक मंडी में करीब 63 हजार क्विंटल धान पहुंच चुका है, जिसमें 1509 किस्म का 56 हजार और पीआर 26 और 777 छह हजार क्विंटल है।

थानेसर मंडी में हुई 20 हजार क्विंटल धान की आवक : सचिव
थानेसर मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह ने कहा कि मंडी में अब तक 20 हजार क्विंटल धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से बुधवार को 1509 किस्म का 21 क्विंटल धान बिका। सरकार द्वारा खरीद शुरू करने के लिए अभी कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।
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