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Kurukshetra News: गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आचार्य दक्षता वर्ग का किया आयोजन
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कुरुक्षेत्र। गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आचार्य दक्षता वर्ग का आयोजन किया गया। दक्षता वर्ग का आरंभ प्राचार्य सुमन बाला ने किया। इसके पश्चात आचार्य अनीता द्वारा प्रातः स्मरण, मंजू द्वारा एकात्मता मंत्र एवं आचार्य अंजू द्वारा एकात्मता स्तोत्र कराया गया।
आचार्य शीला ने विभिन्न योग आसन करवाए एवं रश्मि जी द्वारा पथ संचलन का अभ्यास कराया गया। दक्षता वर्ग का विषय राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की शिक्षा नीति में रूपरेखा और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क की भूमिका रहा। इसके विषय में आचार्य रश्मि ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यचर्या का उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल विकास करना, समावेशी शिक्षा प्रदान करना एवं पंचकोश विकास में सहायक होना है। इसके माध्यम से लचीली शिक्षा व्यवस्था तथा बालक केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
शिक्षण सत्र में गीता पाठ का अभ्यास कराया गया, जिसमें सभी आचार्य बहनों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। आचार्य सुधा ने समता करवाई एवं सभी आज्ञाओं का अभ्यास उत्तम ढंग से करवाया। प्राचार्य सुमन बाला द्वारा स्मरण शक्ति को प्रखर करने वाले विभिन्न खेल करवाए गए।
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आचार्य सुनीता ने प्रेरणादायक कथा के माध्यम से जीवन में शुभ कर्मों का महत्व बताया भले कर्म कभी भी निष्फल नहीं जाते इसलिए हम सभी को शुभ कर्मों को निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। दक्षता वर्ग का समापन शांति मंत्र के द्वारा किया गया।
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आचार्य शीला ने विभिन्न योग आसन करवाए एवं रश्मि जी द्वारा पथ संचलन का अभ्यास कराया गया। दक्षता वर्ग का विषय राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की शिक्षा नीति में रूपरेखा और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क की भूमिका रहा। इसके विषय में आचार्य रश्मि ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यचर्या का उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल विकास करना, समावेशी शिक्षा प्रदान करना एवं पंचकोश विकास में सहायक होना है। इसके माध्यम से लचीली शिक्षा व्यवस्था तथा बालक केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
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शिक्षण सत्र में गीता पाठ का अभ्यास कराया गया, जिसमें सभी आचार्य बहनों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। आचार्य सुधा ने समता करवाई एवं सभी आज्ञाओं का अभ्यास उत्तम ढंग से करवाया। प्राचार्य सुमन बाला द्वारा स्मरण शक्ति को प्रखर करने वाले विभिन्न खेल करवाए गए।
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आचार्य सुनीता ने प्रेरणादायक कथा के माध्यम से जीवन में शुभ कर्मों का महत्व बताया भले कर्म कभी भी निष्फल नहीं जाते इसलिए हम सभी को शुभ कर्मों को निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। दक्षता वर्ग का समापन शांति मंत्र के द्वारा किया गया।