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खरीद शुरू होने पर बांटे लड्डू, पहले दिन दो एजेंसियों ने 401 किसानों से खरीदा 30440 क्विंटल धान
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किसानों के कड़े संघर्ष के बाद रविवार को मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू हुई। खरीद शुरू होने से पहले मंडी में लड्डू बांटे गए। जिले की 18 मंडियों में से खाद्य आपूर्ति विभाग और हैफेड एजेंसी ने 401 किसानों से कुल 30 हजार 440 क्विंटल धान खरीदा। पहले दिन सबसे ज्यादा खरीद खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 21 हजार 440 क्विंटल की गई। वहीं हैफेड ने 9 हजार क्विंटल खरीद की। उधर नई खरीद पॉलिसी को लेकर राइस मिलर्स खरीद से दूरी बनाए हुए हैं। मिलर्स का कहना है कि जब तक पुरानी पॉलिसी से खरीद नहीं की जाएगी वें मंडी में नहीं आएंगे।
खाद्य आपूर्ति विभाग की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य आपूर्ति विभाग ने गुमथला गढू अनाज मंडी से 1300 क्विंटल, इस्माईलाबाद मंडी से 180 क्विंटल, झांसा से 350, कुरुक्षेत्र से 4 हजार 310, लाडवा से 9 हजार 190, पिपली से 1 हजार 161, पिहोवा से 670 और शाहाबाद अनाज मंडी से 3 हजार 830 क्विंटल धान की खरीद की। वहीं हैफेड ने इस्माईलाबाद मंडी से 320 क्विंटल, कुरुक्षेत्र से 92, लाडवा से 5 हजार 700, पिहोवा से 1 हजार 10, शाहाबाद से 780 और ठोल मंडी से 270 क्विंटल धान की खरीदी। डीएफएससी केके गोयल ने बताया कि खरीद सुचारू रूप से चली।
उधर पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा खरीद की जमीनी हकीकत जानने के लिए खुद कई अनाज मंडियों का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने लाडवा, पिपली और थानेसर की अनाज मंडियों में पहुंचकर किसानों, आढ़तियों और मजदूरों से बात की। मंडियों में हालात का जायजा लेने के बाद हुड्डा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। हालात ऐसे हैं कि मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं है। ऊपर से किसानों को लगातार बारिश का डर सता रहा है। सरकारी खरीद में देरी की वजह से किसान प्राइवेट एजेंसियों को एमएसपी से कम पर फसल बेचने को मजबूर है। हुड्डा ने कांग्रेस कार्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वो खुद मुख्यमंत्री थे तो किसानों को धान खरीद से एक हफ्ते पहले पता होता था कि कौन-सी एजेंसी खरीद करेगी और उसका धान किस सेलर में जाएगा। इतना ही नहीं उस दौरान किसानों को पोर्टल और रजिस्ट्रेशन के नाम पर परेशान नहीं किया जाता था। हाथों-हाथ खरीद और साथ की साथ पेमेंट की जाती थी। लेकिन आज पोर्टल, रजिस्ट्रेशन और नमी के बहाने बनाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। भविष्य में जैसी ही हमारी सरकार बनेगी पोर्टल और रजिस्ट्रेशन के झंझट को खत्म करके हर किसान के दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान व बाजरा के साथ ही आलू उत्पादक किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आलू की बुवाई में किसानों को खाद की आवश्यकता होती है। लेकिन, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र समेत तमाम जिलों में सरकार किसानों को खाद उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। हुड्डा ने मंडी मजदूरों के मेहनताने में कटौती को मजदूरों के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में शायद पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने मजदूरी बढ़ाने की बजाए घटाने का काम किया है।
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खाद्य आपूर्ति विभाग की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य आपूर्ति विभाग ने गुमथला गढू अनाज मंडी से 1300 क्विंटल, इस्माईलाबाद मंडी से 180 क्विंटल, झांसा से 350, कुरुक्षेत्र से 4 हजार 310, लाडवा से 9 हजार 190, पिपली से 1 हजार 161, पिहोवा से 670 और शाहाबाद अनाज मंडी से 3 हजार 830 क्विंटल धान की खरीद की। वहीं हैफेड ने इस्माईलाबाद मंडी से 320 क्विंटल, कुरुक्षेत्र से 92, लाडवा से 5 हजार 700, पिहोवा से 1 हजार 10, शाहाबाद से 780 और ठोल मंडी से 270 क्विंटल धान की खरीदी। डीएफएससी केके गोयल ने बताया कि खरीद सुचारू रूप से चली।
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उधर पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा खरीद की जमीनी हकीकत जानने के लिए खुद कई अनाज मंडियों का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने लाडवा, पिपली और थानेसर की अनाज मंडियों में पहुंचकर किसानों, आढ़तियों और मजदूरों से बात की। मंडियों में हालात का जायजा लेने के बाद हुड्डा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। हालात ऐसे हैं कि मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं है। ऊपर से किसानों को लगातार बारिश का डर सता रहा है। सरकारी खरीद में देरी की वजह से किसान प्राइवेट एजेंसियों को एमएसपी से कम पर फसल बेचने को मजबूर है। हुड्डा ने कांग्रेस कार्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वो खुद मुख्यमंत्री थे तो किसानों को धान खरीद से एक हफ्ते पहले पता होता था कि कौन-सी एजेंसी खरीद करेगी और उसका धान किस सेलर में जाएगा। इतना ही नहीं उस दौरान किसानों को पोर्टल और रजिस्ट्रेशन के नाम पर परेशान नहीं किया जाता था। हाथों-हाथ खरीद और साथ की साथ पेमेंट की जाती थी। लेकिन आज पोर्टल, रजिस्ट्रेशन और नमी के बहाने बनाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। भविष्य में जैसी ही हमारी सरकार बनेगी पोर्टल और रजिस्ट्रेशन के झंझट को खत्म करके हर किसान के दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान व बाजरा के साथ ही आलू उत्पादक किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आलू की बुवाई में किसानों को खाद की आवश्यकता होती है। लेकिन, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र समेत तमाम जिलों में सरकार किसानों को खाद उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। हुड्डा ने मंडी मजदूरों के मेहनताने में कटौती को मजदूरों के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में शायद पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने मजदूरी बढ़ाने की बजाए घटाने का काम किया है।
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