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Kurukshetra News: एससी आरक्षित सीट पर जीता ओबीसी उम्मीदवार, प्रशासन ने एससी उम्मीदवार को किया विजय घोषित
Tue, 19 May 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 19 May 2026 01:30 AM IST
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कुरुक्षेत्र। सबसे वोट पाने वाला अयोग्य अघोषित हुआ उम्मीदवार मामचंद जानकारी देते हुए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/पिहोवा। दी थाना मल्टीपर्पज प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के चुनाव में प्रशासनिक लापरवाही और आरक्षण नियमों के लिए विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित गैर कृषि श्रेणी की सदस्य सीट पर ओबीसी वर्ग के प्रत्याशी को नामांकन से लेकर मतदान तक चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई। वहीं मतदान के बाद उसी ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलने पर अयोग्य घोषित कर कम वोट पाने वाले अनुसूचित वर्ग के प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, रविवार को सोसायटी का चुनाव संपन्न हुआ। इस सोसायटी के अंतर्गत थाना गांव सहित खेड़ी शीशगरां, गुलडेहरा, धूलगढ़ और मांगना गांव शामिल हैं। चुनाव के दौरान गैर कृषि श्रेणी की एक सदस्य सीट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। थाना गांव निवासी व सेना से सेवानिवृत्त मामचंद ने बताया कि उन्होंने सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके अनुसार इसी श्रेणी में एससी वर्ग से लक्ष्मी देवी और सामान्य वर्ग से अंजेश निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद बची एक सदस्य सीट के लिए चुनाव कराया गया, जिसमें उनके अलावा बलकार सिंह और बलबीर सिंह चुनाव मैदान में थे।
मामचंद का आरोप है कि मतदान में उन्हें सबसे अधिक 174 वोट प्राप्त हुए, जबकि बलकार सिंह को 50 और बलबीर सिंह को 54 वोट मिले। इसके बावजूद प्रशासन ने बलबीर सिंह को विजेता घोषित कर दिया। विरोध करने पर उन्हें बताया गया कि संबंधित सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित थी और वे ओबीसी वर्ग से होने के कारण चुनाव लड़ने के पात्र नहीं थे। मामचंद ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सीट आरक्षित थी तो नामांकन जांच के दौरान ही उनका फार्म रद्द किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि चार मई को नामांकन प्रक्रिया हुई थी, जबकि अगले दिन जांच, नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन की कार्रवाई पूरी की गई।
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सीट आरक्षित होने की जानकारी नहीं दी गई : मामचंद
चुनाव में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले मामचंद ने आरोप लगाया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी अधिकारी ने सीट के आरक्षित होने की जानकारी नहीं दी। अधिकारियों ने उनके पर्चे की छंटनी करते समय यह ध्यान नहीं दिया था कि मैं एससी नहीं हूं ओबीसी हूं। अब मतदान और मतगणना के बाद उन्हें अयोग्य घोषित करना प्रशासनिक लापरवाही है, जो किसी षड़यंत्र को दर्शाती है। अगर अधिकारी उन्हें उनका हक नहीं देंगे तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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बलवीर ने एससी वर्ग की सीट होने पर किया विरोध
चुनाव शांति से संपन्न हुआ। पर्चा भरने से लेकर मतगणना तक किसी ने किसी प्रकार का कोई विरोध नहीं किया लेकिन जब मतगणना के बाद मामचंद ने एकतरफा 174 वोट हासिल किए तो एससी वर्ग से 54 वोट पाने वाले बलवीर ने इसका विरोध किया और सीट को नियमों के अनुसार एससी वर्ग के लिए आरक्षित बताया। इस पर अधिकारी अलर्ट हुए और आनन-फानन में मामचंद को अयोग्य घोषित कर बलवीर को विजय घोषित कर दिया।
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चुनाव नियमों के अनुसार हुआ : प्रदीप कुमार
पोलिंग बूथ पर पहुंचे एआरओ प्रदीप कुमार ने बताया कि पूरा चुनाव नियमों के अनुसार हुआ है। मामचंद के आरोप पर कहा कि इसमें सात मेंबर कृषि और तीन गैर कृषि के बनाते हैं। गैर कृषि में नियमानुसार एक उम्मीदवार अनुसूचित वर्ग का होता है। अगर उस गांव में 10 प्रतिशत आबादी एससी वर्ग की है। चुनाव हरियाणा को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट 1984 की धारा 28 के अनुसार है। इसमें पहले पता नहीं चलता कि कौन कितने वोट लेगा। नियमानुसार उम्मीदवार चुने जाते हैं।
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कुरुक्षेत्र/पिहोवा। दी थाना मल्टीपर्पज प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के चुनाव में प्रशासनिक लापरवाही और आरक्षण नियमों के लिए विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित गैर कृषि श्रेणी की सदस्य सीट पर ओबीसी वर्ग के प्रत्याशी को नामांकन से लेकर मतदान तक चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई। वहीं मतदान के बाद उसी ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलने पर अयोग्य घोषित कर कम वोट पाने वाले अनुसूचित वर्ग के प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, रविवार को सोसायटी का चुनाव संपन्न हुआ। इस सोसायटी के अंतर्गत थाना गांव सहित खेड़ी शीशगरां, गुलडेहरा, धूलगढ़ और मांगना गांव शामिल हैं। चुनाव के दौरान गैर कृषि श्रेणी की एक सदस्य सीट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। थाना गांव निवासी व सेना से सेवानिवृत्त मामचंद ने बताया कि उन्होंने सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके अनुसार इसी श्रेणी में एससी वर्ग से लक्ष्मी देवी और सामान्य वर्ग से अंजेश निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद बची एक सदस्य सीट के लिए चुनाव कराया गया, जिसमें उनके अलावा बलकार सिंह और बलबीर सिंह चुनाव मैदान में थे।
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मामचंद का आरोप है कि मतदान में उन्हें सबसे अधिक 174 वोट प्राप्त हुए, जबकि बलकार सिंह को 50 और बलबीर सिंह को 54 वोट मिले। इसके बावजूद प्रशासन ने बलबीर सिंह को विजेता घोषित कर दिया। विरोध करने पर उन्हें बताया गया कि संबंधित सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित थी और वे ओबीसी वर्ग से होने के कारण चुनाव लड़ने के पात्र नहीं थे। मामचंद ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सीट आरक्षित थी तो नामांकन जांच के दौरान ही उनका फार्म रद्द किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि चार मई को नामांकन प्रक्रिया हुई थी, जबकि अगले दिन जांच, नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन की कार्रवाई पूरी की गई।
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सीट आरक्षित होने की जानकारी नहीं दी गई : मामचंद
चुनाव में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले मामचंद ने आरोप लगाया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी अधिकारी ने सीट के आरक्षित होने की जानकारी नहीं दी। अधिकारियों ने उनके पर्चे की छंटनी करते समय यह ध्यान नहीं दिया था कि मैं एससी नहीं हूं ओबीसी हूं। अब मतदान और मतगणना के बाद उन्हें अयोग्य घोषित करना प्रशासनिक लापरवाही है, जो किसी षड़यंत्र को दर्शाती है। अगर अधिकारी उन्हें उनका हक नहीं देंगे तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
बलवीर ने एससी वर्ग की सीट होने पर किया विरोध
चुनाव शांति से संपन्न हुआ। पर्चा भरने से लेकर मतगणना तक किसी ने किसी प्रकार का कोई विरोध नहीं किया लेकिन जब मतगणना के बाद मामचंद ने एकतरफा 174 वोट हासिल किए तो एससी वर्ग से 54 वोट पाने वाले बलवीर ने इसका विरोध किया और सीट को नियमों के अनुसार एससी वर्ग के लिए आरक्षित बताया। इस पर अधिकारी अलर्ट हुए और आनन-फानन में मामचंद को अयोग्य घोषित कर बलवीर को विजय घोषित कर दिया।
चुनाव नियमों के अनुसार हुआ : प्रदीप कुमार
पोलिंग बूथ पर पहुंचे एआरओ प्रदीप कुमार ने बताया कि पूरा चुनाव नियमों के अनुसार हुआ है। मामचंद के आरोप पर कहा कि इसमें सात मेंबर कृषि और तीन गैर कृषि के बनाते हैं। गैर कृषि में नियमानुसार एक उम्मीदवार अनुसूचित वर्ग का होता है। अगर उस गांव में 10 प्रतिशत आबादी एससी वर्ग की है। चुनाव हरियाणा को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट 1984 की धारा 28 के अनुसार है। इसमें पहले पता नहीं चलता कि कौन कितने वोट लेगा। नियमानुसार उम्मीदवार चुने जाते हैं।

कुरुक्षेत्र। सबसे वोट पाने वाला अयोग्य अघोषित हुआ उम्मीदवार मामचंद जानकारी देते हुए। संवाद