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Kurukshetra News: अब पश्चिमी बंगाल में भी गूंजेंगे गीता के श्लोक
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कुरुक्षेत्र। गीता जयंती के अवसर पर अब पश्चिमी बंगाल में भी गीता के श्लोक गूंजेंगे। 24 दिसंबर को गीता जयंती महोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें करीब एक लाख लोग जुटेंगे। इसके लिए वहां के संतों, धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने बीड़ा उठाया है। इस महोत्सव की तैयारी भी शुरू कर दी गई है और इसमें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद सहित कुरुक्षेत्र से भी एक प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है इस आयोजन से गीता स्थली ज्योतिसर की मिट्टी की खुशबू अब पश्चिमी बंगाल में महकेगी। इसके लिए वहां से धर्मनगरी पहुंचे एक शिष्टमंडल को गीता संदेश के साक्षी माने जा रहे वट वृक्ष के नीचे से ली गई मिट्टी से भरा एक कलश भी सौंपा गया है। इस मिट्टी को लेकर वहां भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। पश्चिमी बंगाल के संतजनों को ज्योतिसर वट वृक्ष के नीचे से मिट्टी का कलश भरकर कुरुक्षेत्र 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा ने सौंपा है। इससे पहले प्रधान स्वामी पार्दिपत्ता नंदा महाराज, उप प्रधान स्वामी निरगुना नंदा, जगधर्रिता दास आदि ने कुरुक्षेत्र की महत्ता के बारे में जानकारी ली। इस दौरान यहां पहुंचे शिष्टमंडल से जुड़े लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर वहां भी ब्रिगेड ग्रांउड में 24 दिसंबर को गीता महोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जाएगा और इस दौरान वैश्विक गीता पाठ के साथ एक लाख श्रद्धालु जुड़ेगे।
चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि पश्चिमी बंगाल के संत जनों का एक शिष्टमंडल गीता महोत्सव का आयोजन करने के उद्देश्य से ही धर्मनगरी पहुंचा, जिसने ब्रह्मसरोवर और गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर का भ्रमण किया। शिष्टमंडल ने बताया कि गीता उपदेशों के साक्षी वट वृक्ष के नीचे से ली गई मिट्टी से भरे कलश से वेस्ट बंगाल में शोभा यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा के दौरान नागरिकों को गीता उपदेशों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ कुरुक्षेत्र के महत्व और ज्योतिसर गीता स्थली के बारे में जानकारी भी दी जाएगी।
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कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास जारी : छाबड़ा
मदन मोहन छाबड़ा का कहना है केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के अलावा उदय भारत के तहत दक्षिण भारत के सभी कोटि गीता लिखने, पश्चिम भारत, पंजाब से अनेक संस्थाएं अपने-अपने राज्यों में गीता महोत्सव का आयोजन करने से पहले कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पहुंचती है और यहां से जल, मिट्टी लेकर वापस जाती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के कोने-कोने से लोग आशीर्वाद लेने के लिए लोग कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं।
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उल्लेखनीय है इस आयोजन से गीता स्थली ज्योतिसर की मिट्टी की खुशबू अब पश्चिमी बंगाल में महकेगी। इसके लिए वहां से धर्मनगरी पहुंचे एक शिष्टमंडल को गीता संदेश के साक्षी माने जा रहे वट वृक्ष के नीचे से ली गई मिट्टी से भरा एक कलश भी सौंपा गया है। इस मिट्टी को लेकर वहां भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। पश्चिमी बंगाल के संतजनों को ज्योतिसर वट वृक्ष के नीचे से मिट्टी का कलश भरकर कुरुक्षेत्र 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा ने सौंपा है। इससे पहले प्रधान स्वामी पार्दिपत्ता नंदा महाराज, उप प्रधान स्वामी निरगुना नंदा, जगधर्रिता दास आदि ने कुरुक्षेत्र की महत्ता के बारे में जानकारी ली। इस दौरान यहां पहुंचे शिष्टमंडल से जुड़े लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर वहां भी ब्रिगेड ग्रांउड में 24 दिसंबर को गीता महोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जाएगा और इस दौरान वैश्विक गीता पाठ के साथ एक लाख श्रद्धालु जुड़ेगे।
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चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि पश्चिमी बंगाल के संत जनों का एक शिष्टमंडल गीता महोत्सव का आयोजन करने के उद्देश्य से ही धर्मनगरी पहुंचा, जिसने ब्रह्मसरोवर और गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर का भ्रमण किया। शिष्टमंडल ने बताया कि गीता उपदेशों के साक्षी वट वृक्ष के नीचे से ली गई मिट्टी से भरे कलश से वेस्ट बंगाल में शोभा यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा के दौरान नागरिकों को गीता उपदेशों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ कुरुक्षेत्र के महत्व और ज्योतिसर गीता स्थली के बारे में जानकारी भी दी जाएगी।
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कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास जारी : छाबड़ा
मदन मोहन छाबड़ा का कहना है केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के अलावा उदय भारत के तहत दक्षिण भारत के सभी कोटि गीता लिखने, पश्चिम भारत, पंजाब से अनेक संस्थाएं अपने-अपने राज्यों में गीता महोत्सव का आयोजन करने से पहले कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पहुंचती है और यहां से जल, मिट्टी लेकर वापस जाती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के कोने-कोने से लोग आशीर्वाद लेने के लिए लोग कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं।